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ज्योतिषाचार्य सुधांशु निर्भय की दिल्ली से लौटते समय सड़क दुर्घटना में मौत
Updated Thu, 23 Nov 2017 11:11 PM IST
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फाइल फोटो सुधांशु निर्भय
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सोरों। प्रख्यात ज्योतिषाचार्य सुधांशु निर्भय (36) की बुधवार रात एक सड़क दुर्घटना में मौत हो गई। उनके साथ कार में सवार दो अन्य लोग घायल हो गए। सुधांशु की मौत की सूचना से परिवार में कोहराम मच गया। शोक में गुरुवार को तीर्थनगरी का बाजार नहीं खुला। वहीं स्कूलों में भी शोक अवकाश घोषित कर दिया गया।
ज्योतिषाचार्य सुधांशु तीर्थनगरी के विद्वान, ज्योतिषाचार्य एवं पुरोहित अंबरीष निर्भय के पुत्र थे। बुधवार को वह अपने किसी परिचित को दिल्ली स्थित अस्पताल देखने गए थे। रात को ही वह दिल्ली से सोरों लौट रहे थे। बुलंदशहर जनपद में शिकारपुर के नजदीक उनकी कार में सामने से आ रहे टैंकर ने टक्कर मार दी। हादसे में सुधांशु की सिर में चोट लगने के कारण मौके पर ही मौत हो गई। वहीं कार में सवार कौशल पुत्र प्रकाश और गाड़ी का चालक सौरभ पाराशरी उर्फ गिल्ला घायल हो गए।
कौशल और सौरभ को बुलंदशहर के जिला चिकित्सालय भर्ती कराया गया। दुर्घटना की सूचना मिलते ही सुधांशु के परिवार में शोक की लहर दौड़ गई। सूचना पर परिवार के लोग बुलंदशहर रवाना हो गए। सुबह भोर के साथ ही पूरे कस्बे में घटना की जानकारी लोगों को हो गई। सुधांशु के आवास पर लोग जुटने लगे। कारोबारियों ने कस्बे का बाजार बंद रखा। वहीं स्कूल, कॉलेजों में भी शोक अवकाश घोषित कर दिया गया। गुरुवार देर शाम सुधांशु का शव कस्बे में पहुंचने पर कोहराम मच गया। हर किसी की आंखें नम थीं।
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प्रेटी गुरू के नाम से जाने जाते थे सुधांशु
सोरों। ज्योतिषाचार्य सुधांशु को प्रेटी गुरू के नाम से जाना जाता था। कस्बे के लोग प्यार भरे लहजों में उन्हें प्रेटी गुरू कहते थे। कम उम्र में सुधांशु की सामाजिक सक्रियता भी काफी अधिक थी। वह तीर्थ नगरी के विकास को लेकर चिंतित रहते थे। वह वराह गौशाला में भी नित्य सेवा करते थे। वराह मंदिर में नित्य दर्शन करना एवं गरीब पीड़ितों की सेवा करना उनकी दिनचर्या में शामिल था।
राष्ट्रपति ने उन्हें किया था सम्मानित
सोरों। वर्ष 2011 में राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने सुधांशु निर्भय को अद्भुत ज्योतिष ज्ञान के लिए राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित किया था। देश, विदेश में आयोजित होने वाले ज्योतिष सम्मेलन में वे हिस्सा लेते थे। राजनीति, खेल आदि विभिन्न क्षेत्रों में उनकी भविष्यवाणियां सच साबित हुईं। उन्होंने वर्ष 2012 में सोरों में भी ज्योतिष सम्मेलन कराया था। इसमें देश के विभिन्न विद्वान ज्योतिषाचार्य ने हिस्सा लिया था।
छह माह पूर्व ही हुई थी शादी
सोरों। ज्योतिषाचार्य सुधांशु निर्भय छह माह पूर्व ही विवाह बंधन में बंधे थे। सुधांशु की मौके के बाद परिवारीजनों और उनकी पत्नी का भी रो-रोकर बुरा हाल था।
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ज्योतिषाचार्य सुधांशु तीर्थनगरी के विद्वान, ज्योतिषाचार्य एवं पुरोहित अंबरीष निर्भय के पुत्र थे। बुधवार को वह अपने किसी परिचित को दिल्ली स्थित अस्पताल देखने गए थे। रात को ही वह दिल्ली से सोरों लौट रहे थे। बुलंदशहर जनपद में शिकारपुर के नजदीक उनकी कार में सामने से आ रहे टैंकर ने टक्कर मार दी। हादसे में सुधांशु की सिर में चोट लगने के कारण मौके पर ही मौत हो गई। वहीं कार में सवार कौशल पुत्र प्रकाश और गाड़ी का चालक सौरभ पाराशरी उर्फ गिल्ला घायल हो गए।
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कौशल और सौरभ को बुलंदशहर के जिला चिकित्सालय भर्ती कराया गया। दुर्घटना की सूचना मिलते ही सुधांशु के परिवार में शोक की लहर दौड़ गई। सूचना पर परिवार के लोग बुलंदशहर रवाना हो गए। सुबह भोर के साथ ही पूरे कस्बे में घटना की जानकारी लोगों को हो गई। सुधांशु के आवास पर लोग जुटने लगे। कारोबारियों ने कस्बे का बाजार बंद रखा। वहीं स्कूल, कॉलेजों में भी शोक अवकाश घोषित कर दिया गया। गुरुवार देर शाम सुधांशु का शव कस्बे में पहुंचने पर कोहराम मच गया। हर किसी की आंखें नम थीं।
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प्रेटी गुरू के नाम से जाने जाते थे सुधांशु
सोरों। ज्योतिषाचार्य सुधांशु को प्रेटी गुरू के नाम से जाना जाता था। कस्बे के लोग प्यार भरे लहजों में उन्हें प्रेटी गुरू कहते थे। कम उम्र में सुधांशु की सामाजिक सक्रियता भी काफी अधिक थी। वह तीर्थ नगरी के विकास को लेकर चिंतित रहते थे। वह वराह गौशाला में भी नित्य सेवा करते थे। वराह मंदिर में नित्य दर्शन करना एवं गरीब पीड़ितों की सेवा करना उनकी दिनचर्या में शामिल था।
राष्ट्रपति ने उन्हें किया था सम्मानित
सोरों। वर्ष 2011 में राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने सुधांशु निर्भय को अद्भुत ज्योतिष ज्ञान के लिए राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित किया था। देश, विदेश में आयोजित होने वाले ज्योतिष सम्मेलन में वे हिस्सा लेते थे। राजनीति, खेल आदि विभिन्न क्षेत्रों में उनकी भविष्यवाणियां सच साबित हुईं। उन्होंने वर्ष 2012 में सोरों में भी ज्योतिष सम्मेलन कराया था। इसमें देश के विभिन्न विद्वान ज्योतिषाचार्य ने हिस्सा लिया था।
छह माह पूर्व ही हुई थी शादी
सोरों। ज्योतिषाचार्य सुधांशु निर्भय छह माह पूर्व ही विवाह बंधन में बंधे थे। सुधांशु की मौके के बाद परिवारीजनों और उनकी पत्नी का भी रो-रोकर बुरा हाल था।