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सोशल मीडिया पर छिड़ी निकाय चुनावों की जंग
Updated Wed, 01 Nov 2017 11:12 PM IST
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कासगंज। निकाय चुनावों में आचार संहिता लगने के बाद से होर्डिंग्स, फ्लैक्स और पोस्टर अब नजर नहीं आ रहे हैं। मतदाताओं में पहुंच बनाने के लिए अभी बाजारों में भले ही शोरगुल न हों, लेकिन चुनावों की सरगर्मियों काफी तेजी से बढ़ रही हैं।
निकाय चुनावों के लिए धीरे धीरे सभी दल अपने पत्ते खोलने लगे हैं। कांग्रेस, समाजवादी पार्टी एवं राष्ट्रीय लोकदल आदि ने अपने प्रत्याशियों की सूची जारी कर दी हैं। वहीं भाजपा सहित अन्य निर्दलीय प्रत्याशी शीघ्र ही चुनाव मैदान में सामने होंगे। चुनावी जंग में हर प्रत्याशी एक दूसरे आगे निकालने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं। मतदाताओं को रिझाने के लिए, अपनी नीतियों और अपना एजेंडा मतदाताओं तक पहुंचाने के लिए सोशल मीडिया का सहारा ले रहा है।
फेसबुक पेज बनाए गए हैं, वहीं व्हाट्सअप ग्रुप भी तैयार किए गए हैं। यह ग्रुप सीधे प्रत्याशियों के द्वारा न बनाकर उनके समर्थकों ने बनाए हैं। इससे यदि कोई कभी कोई कार्रवाई हो तो भी प्रत्याशियों की दावेदारी पर आंच न आए। समर्थकों के लिए इलेक्शन 2017, चुनाव के अतिरिक्त पार्टियों के नाम से भी ग्रुप बनाए गए हैं। इसमें समर्थकों एवं कार्यकर्ताओं को जोड़ा गया है। इससे कोई भी मैसेज तुरंत कार्यकर्ताओं तक पहुंच सकें। वहीं इनके सहारे अपना नीतियां समर्थकों एवं मतदाताओं तक पहुंचाकर उन्हें अपने पक्ष में किया जा सके। इस तरह से बिना शोर गुल के खामोशी से प्रत्याशी प्रचार में जुटे हुए हैं।
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जिलाधिकारी आरपी सिंह ने बताया कि चुनाव आयोग ने सोशल मीडिया से जुड़े किसी भी ग्रुप में निकाय चुनाव के प्रत्याशियों के प्रचार प्रसार पर पूरी तरह रोक लगाई। ऐसे ग्रुपों के एडमिन को जेल जाना पड़ सकता है। पुलिस ग्रुप में चुनाव के मुद्दे पर किसी भी वाद विवाद और चर्चा बहस की मानीटरिंग करेगी। आवश्यकता होने पर संबंधित के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाएगी।
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निकाय चुनावों के लिए धीरे धीरे सभी दल अपने पत्ते खोलने लगे हैं। कांग्रेस, समाजवादी पार्टी एवं राष्ट्रीय लोकदल आदि ने अपने प्रत्याशियों की सूची जारी कर दी हैं। वहीं भाजपा सहित अन्य निर्दलीय प्रत्याशी शीघ्र ही चुनाव मैदान में सामने होंगे। चुनावी जंग में हर प्रत्याशी एक दूसरे आगे निकालने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं। मतदाताओं को रिझाने के लिए, अपनी नीतियों और अपना एजेंडा मतदाताओं तक पहुंचाने के लिए सोशल मीडिया का सहारा ले रहा है।
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फेसबुक पेज बनाए गए हैं, वहीं व्हाट्सअप ग्रुप भी तैयार किए गए हैं। यह ग्रुप सीधे प्रत्याशियों के द्वारा न बनाकर उनके समर्थकों ने बनाए हैं। इससे यदि कोई कभी कोई कार्रवाई हो तो भी प्रत्याशियों की दावेदारी पर आंच न आए। समर्थकों के लिए इलेक्शन 2017, चुनाव के अतिरिक्त पार्टियों के नाम से भी ग्रुप बनाए गए हैं। इसमें समर्थकों एवं कार्यकर्ताओं को जोड़ा गया है। इससे कोई भी मैसेज तुरंत कार्यकर्ताओं तक पहुंच सकें। वहीं इनके सहारे अपना नीतियां समर्थकों एवं मतदाताओं तक पहुंचाकर उन्हें अपने पक्ष में किया जा सके। इस तरह से बिना शोर गुल के खामोशी से प्रत्याशी प्रचार में जुटे हुए हैं।
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जिलाधिकारी आरपी सिंह ने बताया कि चुनाव आयोग ने सोशल मीडिया से जुड़े किसी भी ग्रुप में निकाय चुनाव के प्रत्याशियों के प्रचार प्रसार पर पूरी तरह रोक लगाई। ऐसे ग्रुपों के एडमिन को जेल जाना पड़ सकता है। पुलिस ग्रुप में चुनाव के मुद्दे पर किसी भी वाद विवाद और चर्चा बहस की मानीटरिंग करेगी। आवश्यकता होने पर संबंधित के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाएगी।