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देवोत्थान एकादशी आज, तैयारियों में जुटे लोग
Updated Mon, 30 Oct 2017 10:46 PM IST
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कासगंज में देवात्थान पर्व के लिए सिंघाड़े खरीदतीं महिलाएं
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कासगंज। देवोत्थान एकादशी पर्व मंगलवार को धूमधाम के साथ मनाया जाएगा। पर्व मनाने के लिए बाजारों में भीड़ भाड़ रही। लोगों ने देव पूजन को बाजार से शकरकंद, गन्ना, सिंघाडे आदि की खरीदारी की। इसके अलावा अन्य पूजा सामग्री भी खरीदी गई।
पर्व को लेकर लोगों में काफी उत्साह देखा गया। बाजारों में ग्रामीण इलाकों से गन्ना बेचने के लिए तमाम किसान पहुंचे। वहीं सब्जी बिक्रेताओं ने शकरकंद व सिंघाड़े के फड़ सजाए।
गांधी मूर्ति, बाराद्वारी, सोरों गेट व अन्य इलाकों में गन्ना, सिगाड़ो व शकरकंदी की दुकानें सजाई गईं। सिंघाड़ा 20 रुपये किलो तथा शंकरकंद 30 रुपये किलो बिकी। गन्ना भी 10 रुपये का एक नग बिका।
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लोगों ने परंपरा व धार्मिक मान्यताओं के चलते बाजार से खरीदारी की। जगह-जगह सजे ढेरों पर भीड़ देखी गई।
क्या है मान्यता
देवोत्थान पर देवताओं के जाग्रत होने से मांगलिक कार्यक्रमों का दौर शुरू हो जाता है। लोग देवो के जागने वाले इस पर्व के लिए प्रतिक्षा करते हैं। देव प्रसन्न होने पर परिवार को खुशियों से भर देते हैं।
कैसे होती है पूजा
घर परिवारों में देवोत्थान की पूजा के लिए गेरू व पिसे हुए चावल से बड़ा चौक बनाया जाता है। इस चौक पर गन्नों को खड़ा करके परंपरागत तरीके से पूजा संपन्न होती है। शीत ऋतु के फल गन्ना, सिगाड़े, शंकर कंद आदि से पूजा कर मंगल गीत गाए जाते हैं।
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पर्व को लेकर लोगों में काफी उत्साह देखा गया। बाजारों में ग्रामीण इलाकों से गन्ना बेचने के लिए तमाम किसान पहुंचे। वहीं सब्जी बिक्रेताओं ने शकरकंद व सिंघाड़े के फड़ सजाए।
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गांधी मूर्ति, बाराद्वारी, सोरों गेट व अन्य इलाकों में गन्ना, सिगाड़ो व शकरकंदी की दुकानें सजाई गईं। सिंघाड़ा 20 रुपये किलो तथा शंकरकंद 30 रुपये किलो बिकी। गन्ना भी 10 रुपये का एक नग बिका।
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लोगों ने परंपरा व धार्मिक मान्यताओं के चलते बाजार से खरीदारी की। जगह-जगह सजे ढेरों पर भीड़ देखी गई।
क्या है मान्यता
देवोत्थान पर देवताओं के जाग्रत होने से मांगलिक कार्यक्रमों का दौर शुरू हो जाता है। लोग देवो के जागने वाले इस पर्व के लिए प्रतिक्षा करते हैं। देव प्रसन्न होने पर परिवार को खुशियों से भर देते हैं।
कैसे होती है पूजा
घर परिवारों में देवोत्थान की पूजा के लिए गेरू व पिसे हुए चावल से बड़ा चौक बनाया जाता है। इस चौक पर गन्नों को खड़ा करके परंपरागत तरीके से पूजा संपन्न होती है। शीत ऋतु के फल गन्ना, सिगाड़े, शंकर कंद आदि से पूजा कर मंगल गीत गाए जाते हैं।