{"_id":"59836b6b4f1c1b98628b45fa","slug":"41501784939-agra-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"एलोपैथी चिकित्सकों को मिली नई पहचान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
एलोपैथी चिकित्सकों को मिली नई पहचान
Updated Fri, 04 Aug 2017 12:14 AM IST
विज्ञापन
पेटेंटे
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
फिरोजाबाद। एलोपैथी चिकित्सकों को नई पहचान मिल गई है। झोलाछाप चिकित्सकों पर रोक लगाने के उद्देश्य से आइएमए (इंडियन मेडिकल एसोसिएशन) की मांग पर एमबीबीएस चिकित्सकों को नया सिंबल जारी कर दिया गया है। ये चिकित्सक अब हाइजिया (एक चील व दो सांप वाला चिह्न) की बजाय रेड प्लस पर डीआर (डॉक्टर) लिखा सिंबल इस्तेमाल करेंगे। आयुष चिकित्सकों को अपने क्लीनिक पर हाइजिया का सिंबल ही दर्शाना होगा।
आइएमए एलोपैथी चिकित्सकों को अलग से पहचान दिलाने के लिए काफी समय से लड़ रहा है। इसके लिए अलग से सिंबल की मांग उठाई जाती रही, ताकि झोलाछापों, आयुष चिकित्सकों व एलोपैथी चिकित्सकों के बीच अंतर समझ में आ सके। झोलाछाप धड़ल्ले से हाइजिया व रेडक्रॉस का इस्तेमाल कर खुद को एलोपैथी चिकित्सक दर्शाते हैं। आपत्तियों के बावजूद न तो सिंबल का दुरुपयोग रुक पाया और न झोलाछापों पर अंकुश। अब आइएमए की मांग पर नए सिंबल को मान्यता दे दे गई।
इस तरह का होगा नया सिंबल
एलोपैथी चिकित्सक के लिए लाल रंग के क्रास निशान में सफेद रंग से डीआर लिखे खिले हुए सिंबल को मान्यता दी गई। रेडक्रास सोसाइटी की ओर से भी कोई आपत्ति नहीं जताई गई। हालांकि, नए सिंबल का इस्तेमाल करने वाले चिकित्सक के पास मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया की कम से कम एमबीबीएस की डिग्री होना अनिवार्य है।
विज्ञापन
दुरुपयोग पर होगी सजा
सिंबल का दुरुपयोग होने पर सख्त कार्रवाई का प्रावधान किया गया है। चिकित्सक इस लोगो का प्रयोग अपने अस्पताल, पर्ची व अन्य जगह पर कर सकते हैं। कोई अयोग्य व्यक्ति या झोलाछाप इस सिंबल का इस्तेमाल करता पाया गया तो उस पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। आरोपी को छह माह से तीन साल तक की सजा व 50 हजार से दो लाख रुपये तक का जुर्माना भी लगाया जाएगा।
क्या कहते हैं आईएमए पदाधिकारी
आइएमए के प्रयासों से एमबीबीएस चिकित्सकों को नया सिंबल मिल गया है। इससे हमें अलग पहचान मिलेगी। झोलाछापों पर अंकुश लगेगा। सिंबल का इस्तेमाल आयुर्वेदिक, बीएएमएस, बीयूएमएस आदि चिकित्सक नहीं कर पाएंगे।
डॉ. बीपी कौशिक, डिस्टिक्ट सेक्रेटरी, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन
विज्ञापन
आइएमए एलोपैथी चिकित्सकों को अलग से पहचान दिलाने के लिए काफी समय से लड़ रहा है। इसके लिए अलग से सिंबल की मांग उठाई जाती रही, ताकि झोलाछापों, आयुष चिकित्सकों व एलोपैथी चिकित्सकों के बीच अंतर समझ में आ सके। झोलाछाप धड़ल्ले से हाइजिया व रेडक्रॉस का इस्तेमाल कर खुद को एलोपैथी चिकित्सक दर्शाते हैं। आपत्तियों के बावजूद न तो सिंबल का दुरुपयोग रुक पाया और न झोलाछापों पर अंकुश। अब आइएमए की मांग पर नए सिंबल को मान्यता दे दे गई।
विज्ञापन
इस तरह का होगा नया सिंबल
एलोपैथी चिकित्सक के लिए लाल रंग के क्रास निशान में सफेद रंग से डीआर लिखे खिले हुए सिंबल को मान्यता दी गई। रेडक्रास सोसाइटी की ओर से भी कोई आपत्ति नहीं जताई गई। हालांकि, नए सिंबल का इस्तेमाल करने वाले चिकित्सक के पास मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया की कम से कम एमबीबीएस की डिग्री होना अनिवार्य है।
विज्ञापन
दुरुपयोग पर होगी सजा
सिंबल का दुरुपयोग होने पर सख्त कार्रवाई का प्रावधान किया गया है। चिकित्सक इस लोगो का प्रयोग अपने अस्पताल, पर्ची व अन्य जगह पर कर सकते हैं। कोई अयोग्य व्यक्ति या झोलाछाप इस सिंबल का इस्तेमाल करता पाया गया तो उस पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। आरोपी को छह माह से तीन साल तक की सजा व 50 हजार से दो लाख रुपये तक का जुर्माना भी लगाया जाएगा।
क्या कहते हैं आईएमए पदाधिकारी
आइएमए के प्रयासों से एमबीबीएस चिकित्सकों को नया सिंबल मिल गया है। इससे हमें अलग पहचान मिलेगी। झोलाछापों पर अंकुश लगेगा। सिंबल का इस्तेमाल आयुर्वेदिक, बीएएमएस, बीयूएमएस आदि चिकित्सक नहीं कर पाएंगे।
डॉ. बीपी कौशिक, डिस्टिक्ट सेक्रेटरी, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन