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40 कालेज डकार गए नौ करोड़ की फीस
ब्यूरो, अमर उजाला
Updated Fri, 13 Feb 2015 02:13 AM IST
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डा. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय में एक और घोटाले से पर्दा उठा है। 40 सेल्फ फाइनेंस कालेज नौ करोड़ रुपये से ज्यादा का परीक्षा शुल्क डकार गए हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन की जांच में इस घोटाले की पुष्टि भी हो चुकी है। बावजूद इसके इन कालेजों को पिछले साल परीक्षा में शामिल कर लिया गया और इस साल भी इन्हें परीक्षा में शामिल किए जाने की तैयारी है।
विश्वविद्यालय के अधिकारियों, कर्मचारियों के साथ मिलकर फीस हड़प करने का यह कोई पहला मामला नहीं है। कुलपति डीएन जौहर से पहले विश्वविद्यालय में एक पूरा रैकेट हर साल करोड़ों की फीस हजम करने-कराने का काम करता था। रैकेट के लिए काम करने वाले एकाउंट सेक्शन के क्लर्क कालेजों से परीक्षा शुल्क के ड्राफ्ट ले लिया करते थे, बाद में जब परीक्षा हो जाती थी तो ड्राफ्ट कालेज संचालकों को वापस कर दिए जाते थे। इसके बदले में कालेज संचालक अधिकारियों और कर्मचारियों को मोटा सुविधा शुल्क देते थे। लेकिन डीएन जौहर के कुलपति बनने के बाद फीस की प्रक्रिया आनलाइन कर दी गई और फर्जीवाडे़ में जुटे तीन बाबुओं को सस्पेंड कर दिया गया था जो आज तक बहाल नहीं हो सके हैं। कालांतर में यह रैकेट फिर सक्रिय हो गया। फीस जमा न होने के बावजूद इन कालेजों की परीक्षाएं संपन्न करा ली गईं। आगरा यूनीवर्सिटी टीचर्स एसोसिएशन (औटा) ने जब इस मामले की शिकायत कुलपति प्रो. मोहम्मद मुजम्मिल से की तो उन्होंने जांच कराई। जांच में कालेजों द्वारा परीक्षा शुल्क हजम किए जाने और घोटाले में विश्वविद्यालय के कई अधिकारियों और शिक्षकों की मिलीभगत उजागर हुई।
मामले में लीपापोती करने के मकसद से केएमआई के प्रो. प्रदीप श्रीधर की अध्यक्षता में एक कमेटी बना दी गई। बताते हैं कि कालेज संचालक अब आधी फीस देकर मामले को रफादफा करना चाहते हैं। इसके लिए अधिकारियों ने हामी भर दी है। उन्होंने साल 2015 की परीक्षा में इन कालेजों को शामिल किए जाने का भरोसा भी दिलाया है। इस संबंध में रजिस्ट्रार केएन सिंह से फोन पर बात की गई तो उन्होंने कहा, इस मामले में मुझे कुछ ज्यादा पता नहीं है। मैं कार्यालय में बैठक कर रहा हूं। बाद में आपसे संपर्क करता हूं। लेकिन खबर लिखे जाने तक उन्होंने संपर्क नहीं किया।
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विश्वविद्यालय के अधिकारियों, कर्मचारियों के साथ मिलकर फीस हड़प करने का यह कोई पहला मामला नहीं है। कुलपति डीएन जौहर से पहले विश्वविद्यालय में एक पूरा रैकेट हर साल करोड़ों की फीस हजम करने-कराने का काम करता था। रैकेट के लिए काम करने वाले एकाउंट सेक्शन के क्लर्क कालेजों से परीक्षा शुल्क के ड्राफ्ट ले लिया करते थे, बाद में जब परीक्षा हो जाती थी तो ड्राफ्ट कालेज संचालकों को वापस कर दिए जाते थे। इसके बदले में कालेज संचालक अधिकारियों और कर्मचारियों को मोटा सुविधा शुल्क देते थे। लेकिन डीएन जौहर के कुलपति बनने के बाद फीस की प्रक्रिया आनलाइन कर दी गई और फर्जीवाडे़ में जुटे तीन बाबुओं को सस्पेंड कर दिया गया था जो आज तक बहाल नहीं हो सके हैं। कालांतर में यह रैकेट फिर सक्रिय हो गया। फीस जमा न होने के बावजूद इन कालेजों की परीक्षाएं संपन्न करा ली गईं। आगरा यूनीवर्सिटी टीचर्स एसोसिएशन (औटा) ने जब इस मामले की शिकायत कुलपति प्रो. मोहम्मद मुजम्मिल से की तो उन्होंने जांच कराई। जांच में कालेजों द्वारा परीक्षा शुल्क हजम किए जाने और घोटाले में विश्वविद्यालय के कई अधिकारियों और शिक्षकों की मिलीभगत उजागर हुई।
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मामले में लीपापोती करने के मकसद से केएमआई के प्रो. प्रदीप श्रीधर की अध्यक्षता में एक कमेटी बना दी गई। बताते हैं कि कालेज संचालक अब आधी फीस देकर मामले को रफादफा करना चाहते हैं। इसके लिए अधिकारियों ने हामी भर दी है। उन्होंने साल 2015 की परीक्षा में इन कालेजों को शामिल किए जाने का भरोसा भी दिलाया है। इस संबंध में रजिस्ट्रार केएन सिंह से फोन पर बात की गई तो उन्होंने कहा, इस मामले में मुझे कुछ ज्यादा पता नहीं है। मैं कार्यालय में बैठक कर रहा हूं। बाद में आपसे संपर्क करता हूं। लेकिन खबर लिखे जाने तक उन्होंने संपर्क नहीं किया।
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