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आगरा में इलाज का 'लॉकडाउन': 49 दिनों में एचआईवी संक्रमित 37 रोगियों की मौत
Sat, 16 May 2020 01:18 PM IST
मुकेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: मुकेश कुमार
Updated Sat, 16 May 2020 01:18 PM IST
सार
- लॉकडाउन से पहले 5 से 7 मरीज प्रति माह थी एड्स रोगियों की मृत्यु दर
- दूसरी-तीसरी श्रेणी के रोगियों को दवाएं व उपचार नहीं मिल पा रहा
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एचआईवी संक्रमित
- फोटो : Getty Image
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विस्तार
लॉकडाउन के बीच आगरा में एचआईवी संक्रमित भी इलाज को तरस रहे हैं। 22 मार्च से 10 मई तक 49 दिनों में 37 एड्स रोगियों की मौत हो गई। जबकि लॉकडाउन से पहले एड्स रोगियों की मृत्यु दर प्रति माह पांच से सात थी। जो लॉकडाउन में बढ़ कर 15 से 20 मरीज प्रति माह तक पहुंच गई है।
एड्स के मरीजों के लिए कोरोनाकाल मौत का जाल बुन रहा है। आगरा में 4354 एचआईवी पॉजिटिव हैं। जो एसएन मेडिकल कॉलेज के एंटी रेट्रोवायरल थेरेपी (आरआरटी) सेंटर पर पंजीकृत हैं। बीते पांच माह में यहां 57 एड्स रोगियों की मौत हुई। इनमें लॉकडाउन से पहले एक जनवरी से 21 मार्च तक 20 मरीजों ने दम तोड़ा, जबकि 22 मार्च से 10 मई तक 37 एड्स रोगियों की मौत हुई।
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एड्स के मरीजों के लिए कोरोनाकाल मौत का जाल बुन रहा है। आगरा में 4354 एचआईवी पॉजिटिव हैं। जो एसएन मेडिकल कॉलेज के एंटी रेट्रोवायरल थेरेपी (आरआरटी) सेंटर पर पंजीकृत हैं। बीते पांच माह में यहां 57 एड्स रोगियों की मौत हुई। इनमें लॉकडाउन से पहले एक जनवरी से 21 मार्च तक 20 मरीजों ने दम तोड़ा, जबकि 22 मार्च से 10 मई तक 37 एड्स रोगियों की मौत हुई।
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केस-एक
शहीद नगर निवासी 31 वर्षीय ड्राइवर पांच साल से एचआईवी पॉजिटिव था। हर साल गर्मियों में उसकी हालत बिगड़ती थी। ड्रिप चढ़तीं तो फिर ठीक हो जाता। लॉकडाउन में स्वास्थ्य बिगड़ा। शरीर में पानी और खून की कमी हो गई। इस बार कहीं उपचार नहीं मिला। नौ अप्रैल को ड्राइवर ने दम तोड़ दिया।
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केस-दो
भगवान टॉकीज निवासी 30 वर्षीय महिला पति से संक्रमित हुई थी। अप्रैल-2019 में पति गुजर गया। तीन बच्चे हैं। इनमें एक एचआईवी पॉजिटिव और दो निगेटिव हैं। महिला घरों में काम करती। जनवरी में उसके पैर में चोट लगी, यह नासूर बन गई। एसएन में ऑपरेशन कराया इसके बाद ही लॉकडाउन हो गया। उपचार नहीं मिला। पांच अप्रैल को महिला की मौत हो गई।केस-तीन
कहरई मोड़ निवासी 40 वर्षीय युवक मजदूर था। पति-पत्नी दोनों पांच साल से एचआईवी पॉजिटिव थे। दो बच्चे हुए, दोनों निगेटिव। मार्च में युवक के घुटने में फुंसी हुई। इसमें मवाद पड़ गया। पत्नी ने बताया पति को कहीं उपचार नहीं मिलने से सेप्टिक फैल गया। 29 अप्रैल को एड्स ने उनकी जान ले ली।डिस्ट्रिक्ट केयर सपोर्ट सेंटर (डीसीएससी) के प्रोजेक्ट डायरेक्टर अनिल ने बताया कि जितना हम से बन पड़ रहा है, उससे ज्यादा मरीजों के लिए कर रहे हैं। लेकिन दवा के अलावा उन्हें चिकित्सीय परामर्श व अन्य उपचार चाहिए। लॉकडाउन में यह नहीं मिल रहा। लॉकडाउन से पहले मृत्यु दर पांच से सात मरीज हर माह थी, जो अब 15 से 20 मरीज हर माह हो गई है।
दिल्ली से मांगनी पड़ रहीं दवाएं
दूसरी व तीसरी श्रेणी के एड्स रोगियों के लिए दवाएं नहीं मिल रहीं। इनके लिए दिल्ली से दवा मंगाकर एनजीओ के ओआरडब्ल्यू (आउट रीच वर्कर) घर पहुंचा रहे हैं। जिले में चार ओआरब्ल्यू हैं। जिनके भरोसे चार हजार से अधिक मरीज हैं।‘नाम सुनकर ही भगा देते हैं अस्पताल’
शहीद नगर निवासी एड्स रोगी की मौत नौ अप्रैल को हुई। उसके भाई ने बताया कि मैं भाई के उपचार के लिए कई अस्पतालों में गया, लेकिन जैसे ही उन्हें बताता भाई पॉजिटिव है, नाम सुनकर अस्पताल भगा देते। एक लैब ने तो मेरे भाई का एक्स-रे तक नहीं किया। यदि उसे इलाज मिल जाता तो वह आज जिंदा होता।जिम्मेदार बोले, लॉकडाउन खुलवाना मेरे हाथ में नहीं
एचआईवी/एड्स के नोडल अधिकारी डॉ. यूबी सिंह ने बताया कि एड्स रोगियों की इम्युनिटी कम होती है, इस कारण मौतें बढ़ीं हैं। लॉकडाउन खुलवाना मेरे हाथ में नहीं है। दवाएं व राशन एनजीओ की मदद से पहुंचा रहे हैं।एसएन के प्राचार्य से बात कर इलाज उपलब्ध कराएंगे
जिलाधिकारी प्रभु एन सिंह ने बताया कि एचआईवी रोगियों के लिए उपचार के संबंध में एसएन मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य से बात की जाएगी। एड्स रोगियों को इलाज उपलब्ध कराया जाएगा।आंकड़े
- 4354 एचआईवी पॉजिटिव पंजीकृत हैं जिले में।- 2267 पुरुष संक्रमित हैं।
- 1776 महिला संक्रमित हैं।
- 297 बच्चे संक्रमित हैं। इनमें 191 लड़के व 106 लड़कियां हैं।
- 14 ट्रांसजेंडर भी एचआईवी पॉजिटिव हैं।