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Agra: 90 करोड़ ऐसे हो गए बर्बाद...17 साल से खंडहर पड़े आवास, दिशा की बैठक में हुआ ये निर्णय
Thu, 30 Jan 2025 10:06 AM IST
धीरेन्द्र सिंह
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Thu, 30 Jan 2025 10:06 AM IST
सार
आगरा विकास प्राधिकरण ने 2008 में दुर्बल आय वर्ग के 3640 आवास बनाने के लिए ठेका दिया था, लेकिन इनका काम बीच में ही रुक गया।
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दुर्बल आय वर्ग के लिए बने आवास, गरीबों के आवास
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विस्तार
आगरा के नरायच में 140 करोड़ से बने 3640 आवास 17 साल से खंडहर पड़े हैं। आरोप लगाया जा रहा है कि जांच और कार्रवाई के नाम पर नेता, अफसर व ठेकेदार अपना राग अलाप रहे हैं।
बुधवार को जिला विकास समन्वय एवं अनुश्रवण समिति (दिशा) की बैठक में इस मामले की उच्च स्तरीय जांच का निर्णय हुआ है। टेढ़ी बगिया के पास नरायच में आगरा विकास प्राधिकरण ने 2008 में दुर्बल आय वर्ग के 3640 आवास बनाने के लिए मैसर्स गणपति मेगा बिल्डर को 140 करोड़ रुपये का ठेका दिया था।
एडीए ने 90 करोड़ रुपये ठेकेदार को भुगतान किया। बाकी भुगतान नहीं होने पर ठेकेदार ने काम रोक दिया। एडीए ने ठेकेदार से 153 करोड़ का हर्जाना मांगा है। जिसके बाद मामला अदालत में चल रहा है। उधर, एडीए ने आईआईटी रुड़की से निर्माण की जांच कराई तो पता चला कि ये आवास रहने के लिए सुरक्षित नहीं।
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यह मसला बुधवार को विकास भवन में आयोजित दिशा की बैठक में उठा। बैठक में अध्यक्ष सांसद राजकुमार चाहर ने सरकारी धन की इस तरह बर्बादी के लिए एडीए अफसर, इंजीनियर व ठेकेदार की भूमिका की जांच के लिए उच्च स्तरीय समिति गठन का प्रस्ताव शासन भेजने की संस्तुति की।
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बुधवार को जिला विकास समन्वय एवं अनुश्रवण समिति (दिशा) की बैठक में इस मामले की उच्च स्तरीय जांच का निर्णय हुआ है। टेढ़ी बगिया के पास नरायच में आगरा विकास प्राधिकरण ने 2008 में दुर्बल आय वर्ग के 3640 आवास बनाने के लिए मैसर्स गणपति मेगा बिल्डर को 140 करोड़ रुपये का ठेका दिया था।
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एडीए ने 90 करोड़ रुपये ठेकेदार को भुगतान किया। बाकी भुगतान नहीं होने पर ठेकेदार ने काम रोक दिया। एडीए ने ठेकेदार से 153 करोड़ का हर्जाना मांगा है। जिसके बाद मामला अदालत में चल रहा है। उधर, एडीए ने आईआईटी रुड़की से निर्माण की जांच कराई तो पता चला कि ये आवास रहने के लिए सुरक्षित नहीं।
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यह मसला बुधवार को विकास भवन में आयोजित दिशा की बैठक में उठा। बैठक में अध्यक्ष सांसद राजकुमार चाहर ने सरकारी धन की इस तरह बर्बादी के लिए एडीए अफसर, इंजीनियर व ठेकेदार की भूमिका की जांच के लिए उच्च स्तरीय समिति गठन का प्रस्ताव शासन भेजने की संस्तुति की।