Agra News: 17 महीने में गायब हो गए 325 तालाब, प्रशासन कराएगा रिकॉर्ड की जांच
दिसंबर 2020 को डीएम के सामने समीक्षा में 3747 तालाबों का विवरण रखा गया था, जिसका आंकड़ा राजस्व विभाग पोर्टल पर अब 3422 है।
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आगरा जिले में पिछले 17 महीने में छह तहसीलों के रिकॉर्ड से 325 तालाब गायब हो गए। 31 दिसंबर 2020 तक जिले में 3747 तालाब थे। इनका ब्योरा बैठक में जिलाधिकारी के सामने रखा गया था। 139 तालाबों पर कब्जे बताए गए थे। 17 महीने बाद अब राजस्व विभाग के पोर्टल पर ब्योरा फीड हुआ तो तालाब 3422 ही रह गए। यानी 325 तालाब गायब हैं। इधर, प्रशासन का कहना है कि संबंधित तहसीलों से जवाब-तलब किया जाएगा। तालाबों के रिकॉर्ड की जांच कराई जाएगी।
जिलाधिकारी द्वारा हर महीने राजस्व विभाग की मासिक समीक्षा की जाती है। जिसमें तालाबों को पुनर्जीवित करने व पुराने स्वरूप में लौटाने के लिए की जा रही कार्रवाई पर चर्चा भी शामिल है। 31 दिसंबर 20202 को जिलाधिकारी प्रभु एन. सिंह ने कलेक्ट्रेट में राजस्व कार्यों की समीक्षा की थी। जिसमें प्रपत्र संख्या-23 में वाटर बॉडीज, तालाब का विवरण रखा गया। एडीएम प्रशासन के हस्ताक्षर युक्त इस विवरण में जिले की छह तहसीलों में सन 1952 यानी फसली वर्ष 1359 के अनुसार राजस्व रिकॉर्ड में तब 3747 तालाब दर्शाए गए थे। इसके बाद मार्च 2021 में कोरोना वायरस की दूसरी लहर आई। आठ महीने तक कार्रवाई ठप रही।
दिसंबर में पोर्टल पर दर्ज हुआ तालाबों का ब्योरा
नवंबर 2021 में राजस्व विभाग के अपर मुख्य सचिव ने डीएम को सभी तालाबों का ब्योरा फोटोग्राफ, अक्षांश-देशांतर व क्षेत्रफल सहित पोर्टल पर दर्ज कराने के आदेश दिए थे। एक महीने तक ब्योरा फीड नहीं हुआ। फिर दिसंबर 2021 में राजस्व परिषद के अध्यक्ष ने वीडियो कॉन्फ्रेसिंग में नाराजगी जताई। जिसके बाद ब्योरा दर्ज करना शुरू किया जा सका।
अमर उजाला के पास मौजूद 18 मई 2022 तक की रिपोर्ट के अनुसार जिले की छह तहसीलों में 3422 तालाबों का ब्योरा राजस्व विभाग के पोर्टल दर्ज हुआ है। इनमें भी सिर्फ 2825 तालाबों के फोटोग्राफ ही तहसीलों के अधिकारी उपलब्ध करा सके हैं। ऐसे में अफसरों पर तालाबों के आंकड़ों को लेकर हेराफेरी के आरोप लग रहे हैं।
62 तालाबों पर और हो गया अतिक्रमण
तालाबों पर हुए अवैध कब्जे व अतिक्रमण हटाने के लिए 17 महीने में कोई कार्य योजना नहीं बनी। तालाबों की खोदाई नहीं हुई। 31 दिसंबर 2020 की रिपोर्ट में जिले में 139 तालाबों पर अतिक्रमण था। राजस्व विभाग के आंकड़ों के अनुसार 18 मई 2022 तक 201 तालाबों पर अतिक्रमण हो गया है। यानी इन 17 महीनों में 62 और तालाबों पर कब्जे हो गए हैं।
बाह में 222 तालाब हुए गायब
तालाबों के आंकड़ों में सबसे ज्यादा गड़बड़ियां बाह में हुई हैं। बाह में दिसंबर 2020 में 754 तालाब दर्शाए गए थे, अब 532 तालाब फीड हुए हैं। 222 तालाब गायब हो गए। इसी तरह खेरागढ़ में 62, एत्मादपुर में 63, फतेहाबाद में 27 और सदर तहसील में 2 तालाब रिकॉर्ड से गायब हैं।
16 साल से मूंद रखी हैं आंखें
सुप्रीम कोर्ट के याचिकाकर्ता डॉ. शरद गुप्ता ने कहा कि डीके जोशी ने 2006 में तत्कालीन कमिश्नर अशोक कुमार को पक्षकार बनाते हुए हाईकोर्ट में रिट दायर की। तब तत्कालीन डीएम संजय प्रसाद ने पुलिस, नगर निगम, एडीए की टीम बनाई थी। कुछ जगह अतिक्रमण हटाए थे। तब से 16 साल हो गए। तालाबों को लेकर अफसरों ने आंखें मूंद रखी हैं।
नहीं बनाई कोई कार्य योजना
जन प्रहरी के संयोजक नरोत्तम शर्मा ने कहा कि तालाबों को लेकर अफसर बैठकों के नाम पर रस्म अदायी करते हैं। लेखपाल व तहसीलकर्मियों की मिलीभगत से कब्जे हुए हैं। उन्हें ही हटाने हैं। प्रशासन लापरवाह है। तालाबों को पुनर्जीवित करने के लिए कोई कार्य योजना हीं नहीं बनाई गई। शासन को भी झूठी रिपोर्टें भेज कर गुमराह कर रहे हैं।
मांगा जा रहा प्रमाणपत्र
एडीएम प्रशासन व प्रभारी अधिकारी के अजय कुमार सिंह ने कहा कि सभी एसडीएम व तहसीलदारों को डाटा फीड कराना था। रिकॉर्ड में कहां गड़बड़ी हैं उसकी जांच करा ली जाएगी। त्रुटि रहित सूचना के संबंध में अधिकारियों से प्रमाणपत्र लिया जाएगा। तालाबों से अवैध कब्जे हटाने के निर्देश दिए गए हैं।