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बाहरी प्रतिभा हावी, स्थानीय कलाकारों की चमक हो रही फीकी
Updated Thu, 04 Oct 2018 10:53 PM IST
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मैनपुरी। जिले में अब रामलीलाओं का मंचन शुरू होने वाला है। प्रमुख रामलीलाओं में अब बाहरी कलाकार अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करते हैं। प्रमुख रामलीलाओं में स्थानीय कलाकारों की चमक अब नहीं दिखती है। स्थानीय कलाकारों पर बाहरी कलाकार भारी पड़ रहे हैं। जिले में 24 स्थानों पर छोटे बडे़ स्तर पर रामलीला का मंचन होता है। शहरी क्षेत्र की रामलीला में अब रामलीला मंडली के बाहर के कलाकार रामलीला का मंचन करते हैं। प्रमुख रामलीला के शुरू होते ही बाहरी कलाकर अपनी मंडली के साथ पहुंचते हैं। कानपुर और मथुरा की रामलीला मंडली को ही रामलीला कमेटी के पदाधिकारी वरीयता देते हैं। शहर में होने वाली दोनों प्रमुख रामलीलाओं में लंबे समय से रामलीला मंडली के कलाकार ही मंचन करने के लिए बुलाए जाते हैं।
देहात क्षेत्र में होने वाली रामलीला में स्थानीय स्तर के कलकार ही रामलीला का मंचन करते हैं। गांव की रामलीला कमेटी के ही कई पदाधिकारी प्रमुख पात्रों का मंचन करते हैं। देहात क्षेत्र की कुछ रामलीला में भी अब बाहरी रामलीला मंडली बुलाई जाने लगी हैं। अजीतगंज की रामलीला में प्रमुख पात्रों का मंचन करने वाले स्थानीय कलाकार बांकेलाल शर्मा कहते हैं व्यवसायिकता बढने के साथ ही लोगों की सोच बदलने लगी है। आज भी स्थानीय कलाकार रामलीला शुरू होने के एक सप्ताह पहले से ही रिहर्सल करते हैं जबकि रामलीला मंडली के कलाकार तो सीधा मंचन करते हैं उनको रिहर्सल करते नहीं देखा जाता है।
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देहात क्षेत्र में होने वाली रामलीला में स्थानीय स्तर के कलकार ही रामलीला का मंचन करते हैं। गांव की रामलीला कमेटी के ही कई पदाधिकारी प्रमुख पात्रों का मंचन करते हैं। देहात क्षेत्र की कुछ रामलीला में भी अब बाहरी रामलीला मंडली बुलाई जाने लगी हैं। अजीतगंज की रामलीला में प्रमुख पात्रों का मंचन करने वाले स्थानीय कलाकार बांकेलाल शर्मा कहते हैं व्यवसायिकता बढने के साथ ही लोगों की सोच बदलने लगी है। आज भी स्थानीय कलाकार रामलीला शुरू होने के एक सप्ताह पहले से ही रिहर्सल करते हैं जबकि रामलीला मंडली के कलाकार तो सीधा मंचन करते हैं उनको रिहर्सल करते नहीं देखा जाता है।
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