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अटल बिहारी वाजपेयी के पूर्वजों की अस्थियों का भी हुआ है सोरों में विसर्जन
Updated Tue, 21 Aug 2018 11:06 PM IST
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Tirthnagri Soron
- फोटो : Amar Ujala
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सोरों।
तीर्थ नगरी सोरों से भारत के पूर्व प्रधानमंत्री एवं भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी का गहरा लगाव रहा है। वहीं उनके पूर्वज यहां बटेश्वर से गंगा स्नान के लिए आते रहे हैं। पूर्वजों की अस्थियां भी विसर्जन के लिए यहां पहुंची हैं। अब अटल जी की अस्थियां 25 अगस्त को विसर्जन के लिए यहां पहुंचेंगी।
भगवान हरि विष्णुु के तीसरे अवतार वराह की इस नगरी मेे मान्यता के अनुसार हरिपदी गंगा मे अस्थियां विसर्जन के 72 घटे के अंदर जल मे विलीन हो जाती हैं। तीथ पुुरोहित दिनेश मैदावार ने बताया कि अटल जी के पूर्वजों की अस्थियां भी पूर्व में तीर्थनगरी मे आई हैं। जब उनके पूर्वज बटेश्वर मे रहते थे तो गंगा स्नान के लिए सोमवती अमावस्या पर तीर्थनगरी आते रहे हैं। विद्वान डा. राधाकष्ण दीक्षित ने बताया कि 25 अगस्त को सायं हरिपदी के वराह घाट पर दिवगत पूर्व पीएम अटल जी की अस्थियों का विसर्जन होगा। मोक्षनगरी मे विजयाराजे सिंधिया, अशोक सिंघल के अस्थि कलश भी आए थे। पंडित राहुुल वशिष्ठ के अनुुसार मोक्ष की यह पावन नगरी आदि काल से तपस्वीयों व महापुरुषों की प्रियस्थली रही है। श्राद्ध पक्ष में बड़ी संख्या में देश के कोने के श्रद्धालु यहां पहुंचकर मोक्ष की कामना के लिए अपने पितरों का श्राद्ध करते हैं।
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तीर्थ नगरी सोरों से भारत के पूर्व प्रधानमंत्री एवं भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी का गहरा लगाव रहा है। वहीं उनके पूर्वज यहां बटेश्वर से गंगा स्नान के लिए आते रहे हैं। पूर्वजों की अस्थियां भी विसर्जन के लिए यहां पहुंची हैं। अब अटल जी की अस्थियां 25 अगस्त को विसर्जन के लिए यहां पहुंचेंगी।
भगवान हरि विष्णुु के तीसरे अवतार वराह की इस नगरी मेे मान्यता के अनुसार हरिपदी गंगा मे अस्थियां विसर्जन के 72 घटे के अंदर जल मे विलीन हो जाती हैं। तीथ पुुरोहित दिनेश मैदावार ने बताया कि अटल जी के पूर्वजों की अस्थियां भी पूर्व में तीर्थनगरी मे आई हैं। जब उनके पूर्वज बटेश्वर मे रहते थे तो गंगा स्नान के लिए सोमवती अमावस्या पर तीर्थनगरी आते रहे हैं। विद्वान डा. राधाकष्ण दीक्षित ने बताया कि 25 अगस्त को सायं हरिपदी के वराह घाट पर दिवगत पूर्व पीएम अटल जी की अस्थियों का विसर्जन होगा। मोक्षनगरी मे विजयाराजे सिंधिया, अशोक सिंघल के अस्थि कलश भी आए थे। पंडित राहुुल वशिष्ठ के अनुुसार मोक्ष की यह पावन नगरी आदि काल से तपस्वीयों व महापुरुषों की प्रियस्थली रही है। श्राद्ध पक्ष में बड़ी संख्या में देश के कोने के श्रद्धालु यहां पहुंचकर मोक्ष की कामना के लिए अपने पितरों का श्राद्ध करते हैं।
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