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जनपद में न तो हैं डॉक्टर और न ही हैं दवाइयां
Updated Fri, 06 Apr 2018 10:33 PM IST
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मैनपुरी। एक तरफ शासन प्रदेश में बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं दिलाने की बात कर रहा है। दूसरी तरफ जनपद डॉक्टर और दवाइयों की कमी से जूझ रहा है। जनपद में सभी सीएचसी और पीएचसी पर 133 चिकित्सकों की तैनाती के सापेक्ष मात्र 53 चिकित्सक ही तैनात हैं। 80 पद रिक्त चल रहे हैं। वहीं अकेले जिला अस्पताल में ही 16 विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि जिले में स्वास्थ्य सेवाओं का हाल क्या है। रोगियों को मजबूरी में अन्य जनपदों में जाकर उपचार कराना पड़ रहा है।
जिला अस्पतला में प्रतिदिन 700 से 800 मरीज पहुंच रहे हैं। इनमें हृदय से पीड़ित मरीजों की संख्या भी कम नहीं है। पहले अधिकांश हृदय रोगी 60 वर्ष से अधिक उम्र के होते थे। अब तो 35 वर्ष के लोग भी रोग की चपेट में आ रहे हैं। जिला अस्पताल के हृदय रोग विभाग में 13 वर्ष पूर्व टीएमटी मशीन स्थापित की गई थी। टीएमटी मशीन तो आ गई लेकिन उसके लिए विशेषज्ञ नहीं हैं। टीएमटी जांच के लिए रोगियों को बाहर ही जाना पड़ता है। जिला अस्पताल में नि:शुल्क अल्ट्रासाउंड की व्यवस्था है, लेकिन अल्ट्रासाउंड करने के लिए रेडियोलॉजिस्ट का पद रिक्त चल रहा है। इसके चलते रोगी मजबूरन प्राइवेट में अल्ट्रासाउंड करा रहे हैं।
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जिला अस्पतला में प्रतिदिन 700 से 800 मरीज पहुंच रहे हैं। इनमें हृदय से पीड़ित मरीजों की संख्या भी कम नहीं है। पहले अधिकांश हृदय रोगी 60 वर्ष से अधिक उम्र के होते थे। अब तो 35 वर्ष के लोग भी रोग की चपेट में आ रहे हैं। जिला अस्पताल के हृदय रोग विभाग में 13 वर्ष पूर्व टीएमटी मशीन स्थापित की गई थी। टीएमटी मशीन तो आ गई लेकिन उसके लिए विशेषज्ञ नहीं हैं। टीएमटी जांच के लिए रोगियों को बाहर ही जाना पड़ता है। जिला अस्पताल में नि:शुल्क अल्ट्रासाउंड की व्यवस्था है, लेकिन अल्ट्रासाउंड करने के लिए रेडियोलॉजिस्ट का पद रिक्त चल रहा है। इसके चलते रोगी मजबूरन प्राइवेट में अल्ट्रासाउंड करा रहे हैं।
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