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अरसे से खारे पानी का दंश झेल रहे 60 गांव
Updated Thu, 08 Feb 2018 11:53 PM IST
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फिरोजाबाद। नारखी ब्लाक में हजारों ग्रामीण सालों से खारे पानी की गंभीर समस्या का शिकार हैं। खारा पानी पीने से ग्रामीण दांत खराब होने, घुटनों में दर्द, चेहरे पर सूजन जैसी गंभीर बीमारियों से जूझ रहे हैं। जिला प्रशासन आजतक समस्या का हल नहीं हो खोज सका। हाथवंत और नारखी ब्लाक के लगभग 60 गांव ऐसे हैं जहां खारा पानी है।
सुहानगरी में सालों से पेयजल का गंभीर संकट बना हुआ है। पानी के अतिदोहन के कारण पेयजल स्तर लगातार नीचे गिर रहा है, जिससे कई इलाके डार्क जोन में पहुंच गए हैं। नारखी ब्लाक में सालों से खारे पानी की गंभीर समस्या बनी हुई है। हजारों ग्रामीण फ्लोराइड युक्त पानी पीने से गंभीर बीमारियों के शिकार हो गए हैं।
इन रोगों से छुटकारा पाने को सालों से इलाज करा रहे हैं, लेकिन न तो बीमारी दूर हुई और नहीं स्वच्छ पानी मिला। नारखी ब्लाक में गांगनी, कायथा, पगुली, नगला बलू, मिल्क, कनवार, भूड़ नगरिया, राजारामपुर, पहाड़पुर, रजावली, कातिकी, एरई, गोथुआ, गढ़ी अफोह, गढ़ी हंसराम, नारखी ताल्लुका सहित 50-55 गांवों में खारे पानी समस्या है।
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हाथवंत ब्लाक में भी करीब 15 सालों से खारे पानी की समस्या से हजारों ग्रामीण पीड़ित हैं। हाथवंत, ककरारा, रहना, ललऊआ, नंदपुर, नगला सदिया में खारे पानी की समस्या है। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में खारे पानी की समस्या के कारण हैंडपंपों के पाइप तक गल जाते हैं। दूरदराज के क्षेत्रों में पानी के लिए सुबह से शाम तक दौड़ लगानी पड़ती है।
नारखी में खारे पानी की समस्या के निदान के लिए शासन-प्रशासन द्वारा सर्वे कराया जा चुका है, इसका परिणाम शून्य रहा है। शासन ने प्राइवेट कंपनी एडीसीसी द्वारा सर्वे कराया, इसमें हैंडपंप के पानी की जांच कराई गई है कि पानी में कितना फ्लोराइड है, कितना टीडीएस है। कंपनी ने शासन को सर्वे रिपोर्ट सौंप दी है। जलनिगम द्वारा भी अगस्त-17 में सर्वे कराया गया, लेकिन उसका भी परिणाम शून्य रहा।
गांव में बनी टंकी तीस साल से अधिक पुरानी है, इसमें दरारें पड़ने के कारण पानी का संकट है। टंकी भरने को लगे तीनों नलकूप खराब पड़े हैं। पुरानी पाइप लाइन पड़ी है, वह भी पूरी तरह चौक पड़ी है। गांव में खारे पानी की गंभीर समस्या है। गांव से 500 मीटर से पानी लाने को मजबूर हैं।
अगस्त-17 में सर्वे कराया गया था। समस्या के निदान के लिए 12 करोड़ का प्रस्ताव भेजा। सर्वे कराकर शासन को प्रस्ताव भेज दिया था, परंतु आजतक कोई बजट नहीं मिला।
आरसी सैनी, अधिशासी अभियंता-जलनिगम
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सुहानगरी में सालों से पेयजल का गंभीर संकट बना हुआ है। पानी के अतिदोहन के कारण पेयजल स्तर लगातार नीचे गिर रहा है, जिससे कई इलाके डार्क जोन में पहुंच गए हैं। नारखी ब्लाक में सालों से खारे पानी की गंभीर समस्या बनी हुई है। हजारों ग्रामीण फ्लोराइड युक्त पानी पीने से गंभीर बीमारियों के शिकार हो गए हैं।
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इन रोगों से छुटकारा पाने को सालों से इलाज करा रहे हैं, लेकिन न तो बीमारी दूर हुई और नहीं स्वच्छ पानी मिला। नारखी ब्लाक में गांगनी, कायथा, पगुली, नगला बलू, मिल्क, कनवार, भूड़ नगरिया, राजारामपुर, पहाड़पुर, रजावली, कातिकी, एरई, गोथुआ, गढ़ी अफोह, गढ़ी हंसराम, नारखी ताल्लुका सहित 50-55 गांवों में खारे पानी समस्या है।
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हाथवंत ब्लाक में भी करीब 15 सालों से खारे पानी की समस्या से हजारों ग्रामीण पीड़ित हैं। हाथवंत, ककरारा, रहना, ललऊआ, नंदपुर, नगला सदिया में खारे पानी की समस्या है। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में खारे पानी की समस्या के कारण हैंडपंपों के पाइप तक गल जाते हैं। दूरदराज के क्षेत्रों में पानी के लिए सुबह से शाम तक दौड़ लगानी पड़ती है।
नारखी में खारे पानी की समस्या के निदान के लिए शासन-प्रशासन द्वारा सर्वे कराया जा चुका है, इसका परिणाम शून्य रहा है। शासन ने प्राइवेट कंपनी एडीसीसी द्वारा सर्वे कराया, इसमें हैंडपंप के पानी की जांच कराई गई है कि पानी में कितना फ्लोराइड है, कितना टीडीएस है। कंपनी ने शासन को सर्वे रिपोर्ट सौंप दी है। जलनिगम द्वारा भी अगस्त-17 में सर्वे कराया गया, लेकिन उसका भी परिणाम शून्य रहा।
गांव में बनी टंकी तीस साल से अधिक पुरानी है, इसमें दरारें पड़ने के कारण पानी का संकट है। टंकी भरने को लगे तीनों नलकूप खराब पड़े हैं। पुरानी पाइप लाइन पड़ी है, वह भी पूरी तरह चौक पड़ी है। गांव में खारे पानी की गंभीर समस्या है। गांव से 500 मीटर से पानी लाने को मजबूर हैं।
अगस्त-17 में सर्वे कराया गया था। समस्या के निदान के लिए 12 करोड़ का प्रस्ताव भेजा। सर्वे कराकर शासन को प्रस्ताव भेज दिया था, परंतु आजतक कोई बजट नहीं मिला।
आरसी सैनी, अधिशासी अभियंता-जलनिगम