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दीवार के मलबे में दबकर बा लक की मौत
Updated Fri, 28 Jul 2017 11:50 PM IST
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गिरी दीवार
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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नौरमई (मैनपुरी)। थाना करहल क्षेत्र के गांव गढ़िया जैनपुर में शुक्रवार सुबह अचानक एक मकान की दीवार ढह गई। दीवार के मलबे के नीचे दबकर दो बालक सहित चार लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। एक बालक की अस्पताल ले जाते समय मौत हो गई।
गांव गढ़िया जैनपुर निवासी मानसिंह की दीवार शुक्रवार सुबह करीब आठ बजे अचानक भरभरा कर गिर गई। इस बीच गली से गुजर रहे नरेश कुमार, विनीता, अभी कुमार (05) और नवी कुमार (03) मलबे के नीचे दब गए। चीख पुकार सुनकर आसपास मौजूद लोगों ने घायलों को मलबे के नीचे से निकाला। आनन-फानन में घायलों को अस्पताल ले जाया गया। मगर नबी ने रास्ते में ही दम तोड़ दिया। उसका बड़ा भाई अभी कुमार, विनीता और नरेश कुमार को भर्ती कराया गया। वहां से कुछ देर बाद सभी घायलों को सैफई रेफर कर दिया।
मां अर्चना देवी पिता जितेंद्र का रो-रोकर बुरा हाल था। मां अर्चना कभी बेहोश हो जाती तो ग्रामीण कभी उसके मुंह पर पानी का छींटा मारकर होश में लाने का प्रयास करते। पिता भी कई बार रोते रोते बेहोश हो गए।
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108 एंबुलेंस नहीं आई काम
घटना के तुरंत बाद ग्रामीणों ने 108 नंबर पर फोन किया काफी देर बाद तो फोन उठा इसके बाद एंबुलेंस मौके पर नहीं पहुंची। मजबूरन ग्रामीणों को घायलों को निजी वाहनों से अस्पताल ले जाना पड़ा। आक्रोशित ग्रामीणों का आरोप है कि अगर एंबुलेंस समय पर आ जाती तो नबी की जान बचाई जा सकती थी।
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गांव गढ़िया जैनपुर निवासी मानसिंह की दीवार शुक्रवार सुबह करीब आठ बजे अचानक भरभरा कर गिर गई। इस बीच गली से गुजर रहे नरेश कुमार, विनीता, अभी कुमार (05) और नवी कुमार (03) मलबे के नीचे दब गए। चीख पुकार सुनकर आसपास मौजूद लोगों ने घायलों को मलबे के नीचे से निकाला। आनन-फानन में घायलों को अस्पताल ले जाया गया। मगर नबी ने रास्ते में ही दम तोड़ दिया। उसका बड़ा भाई अभी कुमार, विनीता और नरेश कुमार को भर्ती कराया गया। वहां से कुछ देर बाद सभी घायलों को सैफई रेफर कर दिया।
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मां अर्चना देवी पिता जितेंद्र का रो-रोकर बुरा हाल था। मां अर्चना कभी बेहोश हो जाती तो ग्रामीण कभी उसके मुंह पर पानी का छींटा मारकर होश में लाने का प्रयास करते। पिता भी कई बार रोते रोते बेहोश हो गए।
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108 एंबुलेंस नहीं आई काम
घटना के तुरंत बाद ग्रामीणों ने 108 नंबर पर फोन किया काफी देर बाद तो फोन उठा इसके बाद एंबुलेंस मौके पर नहीं पहुंची। मजबूरन ग्रामीणों को घायलों को निजी वाहनों से अस्पताल ले जाना पड़ा। आक्रोशित ग्रामीणों का आरोप है कि अगर एंबुलेंस समय पर आ जाती तो नबी की जान बचाई जा सकती थी।