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Agra News: 315 स्कूलों की हुई पेयरिंग, अब पड़ोसी स्कूलों में लगेंगी कक्षाएं
Tue, 01 Jul 2025 11:07 PM IST
आगरा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
Updated Tue, 01 Jul 2025 11:07 PM IST
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मैनपुरी। शासन के निर्देश पर परिषदीय स्कूलों की पेयरिंग का काम 1 जुलाई से शुरू हो गया है। जून के आखिरी दिन जारी हुई सूची ने सभी को चौंका दिया, जब जिले के 315 स्कूलों को पास के स्कूलों में पेयर कर दिया गया। इन स्कूलों के स्टाफ को भी पेयरिंग वाले स्कूल में ही शिक्षण कार्य करने के आदेश दिए गए हैं। अब करीब 600 अन्य स्कूलों की भी पेयरिंग पर विचार किया जा रहा है, जिससे शिक्षा विभाग और अभिभावकों में हड़कंप मच गया है।
पिछले एक महीने से बेसिक शिक्षा विभाग 50 से कम छात्र संख्या वाले स्कूलों की गोपनीय रूप से पेयरिंग की तैयारी कर रहा था। विभागीय अधिकारी मान रहे थे कि यह आदेश अगले सत्र से लागू होगा, लेकिन 30 जून की रात अचानक शासन के आदेश पर बीएसए ने 315 स्कूलों की सूची जारी कर दी। इस आदेश के तहत संबंधित स्कूलों का पूरा स्टाफ भी पेयरिंग स्कूल में भेज दिया गया है। इस अचानक आए फैसले से शिक्षकों और अभिभावकों में खलबली मच गई है।
विभाग के सामने अब पेयर किए गए स्कूलों के बच्चों को नए स्कूलों में लाने की चुनौती है। बीएसए ने शिक्षकों को अभिभावकों से संपर्क कर उन्हें समझाने के निर्देश दिए हैं कि पेयरिंग से बेहतर शिक्षा मिलेगी और बच्चों को कॉन्वेंट स्कूल से भी अच्छी शिक्षा दी जाएगी।
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अचानक हुई स्कूलों की पेयरिंग से अभिभावक हैरान हैं। विभाग भले ही एक किलोमीटर के अंदर के स्कूलों की पेयरिंग का दावा कर रहा हो, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है। नगला स्वामी निवासी अवनीश कुमार ने बताया कि उनके गांव का स्कूल बरौली में पेयर किया गया है, जिसकी दूरी लगभग दो किलोमीटर है। छोटे बच्चों का वहां तक पहुंचना संभव नहीं होगा। उनका कहना है कि गांव के बच्चों को गांव में ही शिक्षा मिलनी चाहिए।
वहीं, शिक्षक भी इस बात से चिंतित हैं कि बड़ी संख्या में स्कूलों के मर्ज होने से कई प्रधानाध्यापक सहायक अध्यापक बन जाएंगे, जिससे उन्हें उनकी योग्यता के अनुसार पद नहीं मिल पाएगा। बीएड प्रशिक्षु विकास ने चिंता जताई कि इस नई व्यवस्था से नई शिक्षक भर्ती पर भी असर पड़ेगा, क्योंकि स्कूलों की संख्या कम होने से शिक्षकों की भर्ती भी नहीं होगी।
बीएसए दीपिका गुप्ता ने अभिभावकों को आश्वस्त किया है कि वे परेशान न हों। उन्होंने कहा कि सरकार की मंशा है कि पेयरिंग स्कूल में छात्र संख्या और शिक्षक मानक के अनुसार रहें। उनका मानना है कि पहले सात से दस बच्चों में बेहतर शिक्षा नहीं मिल पा रही थी और शिक्षकों का भी पढ़ाई में मन नहीं लग रहा था। अब पर्याप्त छात्र संख्या होने से शिक्षक भी मेहनत से बच्चों को पढ़ाते दिखेंगे।
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पिछले एक महीने से बेसिक शिक्षा विभाग 50 से कम छात्र संख्या वाले स्कूलों की गोपनीय रूप से पेयरिंग की तैयारी कर रहा था। विभागीय अधिकारी मान रहे थे कि यह आदेश अगले सत्र से लागू होगा, लेकिन 30 जून की रात अचानक शासन के आदेश पर बीएसए ने 315 स्कूलों की सूची जारी कर दी। इस आदेश के तहत संबंधित स्कूलों का पूरा स्टाफ भी पेयरिंग स्कूल में भेज दिया गया है। इस अचानक आए फैसले से शिक्षकों और अभिभावकों में खलबली मच गई है।
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विभाग के सामने अब पेयर किए गए स्कूलों के बच्चों को नए स्कूलों में लाने की चुनौती है। बीएसए ने शिक्षकों को अभिभावकों से संपर्क कर उन्हें समझाने के निर्देश दिए हैं कि पेयरिंग से बेहतर शिक्षा मिलेगी और बच्चों को कॉन्वेंट स्कूल से भी अच्छी शिक्षा दी जाएगी।
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अचानक हुई स्कूलों की पेयरिंग से अभिभावक हैरान हैं। विभाग भले ही एक किलोमीटर के अंदर के स्कूलों की पेयरिंग का दावा कर रहा हो, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है। नगला स्वामी निवासी अवनीश कुमार ने बताया कि उनके गांव का स्कूल बरौली में पेयर किया गया है, जिसकी दूरी लगभग दो किलोमीटर है। छोटे बच्चों का वहां तक पहुंचना संभव नहीं होगा। उनका कहना है कि गांव के बच्चों को गांव में ही शिक्षा मिलनी चाहिए।
वहीं, शिक्षक भी इस बात से चिंतित हैं कि बड़ी संख्या में स्कूलों के मर्ज होने से कई प्रधानाध्यापक सहायक अध्यापक बन जाएंगे, जिससे उन्हें उनकी योग्यता के अनुसार पद नहीं मिल पाएगा। बीएड प्रशिक्षु विकास ने चिंता जताई कि इस नई व्यवस्था से नई शिक्षक भर्ती पर भी असर पड़ेगा, क्योंकि स्कूलों की संख्या कम होने से शिक्षकों की भर्ती भी नहीं होगी।
बीएसए दीपिका गुप्ता ने अभिभावकों को आश्वस्त किया है कि वे परेशान न हों। उन्होंने कहा कि सरकार की मंशा है कि पेयरिंग स्कूल में छात्र संख्या और शिक्षक मानक के अनुसार रहें। उनका मानना है कि पहले सात से दस बच्चों में बेहतर शिक्षा नहीं मिल पा रही थी और शिक्षकों का भी पढ़ाई में मन नहीं लग रहा था। अब पर्याप्त छात्र संख्या होने से शिक्षक भी मेहनत से बच्चों को पढ़ाते दिखेंगे।