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तीन तलाक देने वालों के सामाजिक बहिष्कार की तैयारी
तीन तलाक देने वालों के सामाजिक बहिष्कार की तैयारी
Updated Mon, 01 May 2017 12:11 AM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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तीन तलाक के मुद्दे पर उलमा ए दीन ने एक साथ दो काम शुरू किए हैं। एक तो मुस्लिमों में बेदारी ( जागरूकता) लाई जा रही है। उन्हें बताया जा रहा है कि खुदा को भी तलाक का यह तरीका पसंद नहीं है। दूसरा, इसका इस्तेमाल रोकने के लिए डर पैदा किया जा रहा है। इसके लिए तीन तलाक देने वालों के सामाजिक बहिष्कार की तैयारी की जा है। मुस्लिम तंजीमें जगह-जगह पंचायत करने की तैयारी कर रही हैं।
शहर काजी अहमद अली का कहना है कि समाज की जो परेशानी है, उसे तो दूर होना चाहिए। एक बार में तीन तलाक देने वालों का अखलाकी तौर पर बायकाट होना चाहिए। इस पर काम किया जा रहा है। उलमा से बात चल रही है। तीन तलाक से किसी का घर उजड़ जाता है। हालांकि उनका यह भी कहना है कि शरीयत का जो कानून है, वह अपनी जगह मुकम्मल है, उसमें कोई तब्दीली नहीं की जा सकती है।
संगठन सोसाइटी फार सोशल डेवलपमेंट के सचिव एडवोकेट मोहम्मद मुजम्मिल बताते हैं कि तीन तलाक के मामले में गुमराह करने जैसी कोई बात नहीं है। सभी उलमा इस तरीके को गलत बताते हैं मगर इसमें तलाक तो हो ही जाता है। इसे ध्यान में रखते हुए जागरूकता मुहिम चलाई जा रही है। खासतौर से मलिन बस्तियों में रहने वाले तबके के लोगों को इस बारे में जागरूक किया जा रहा है। शहर की कुछ शिक्षित युवतियां भी इस मुहिम में अपनी सहभागिता निभा रही हैं।
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भारतीय मुस्लिम विकास परिषद के अध्यक्ष समी आगाई का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सुझाव अच्छा है क्योंकि मामला कोर्ट में लंबित है। यह सामाजिक बुराई है। इस पर चिंतन करके इसे दूर करने की जिम्मेदारी भी समाज के मुअज्जिज लोगों की है। लंबे समय से चली आ रहीं बुराइयां, (चाहे वो कोई भी समाज हो) एक झटके से खत्म नहीं हो जाती हैं। इसमें समय लगता है। जल्द ही विकास परिषद मुस्लिम मोहल्लों में तीन तलाक के मुद्दे पर जागरूकता अभियान शुरू करने जा रहा है।
उत्तर प्रदेश मुस्लिम महापंचायत के सरपंच नदीम नूर का कहना है कि इस मुद्दे को बेवजह हवा दी गई। जिन लोगों को दीनी तालीम की सही जानकारी है, वे तीन तलाक को बुरा समझते हैं। अब संगठन भी सप्ताह में एक बार मुस्लिम बस्तियों में कैंप करके दीन की तालीम देंगे। तलाक के बारे में समझाएंगे।
उधर, हाल ही में शहर में लखनऊ से आए मुस्लिम स्कालर्स ने खैराती टोला और लोहामंडी इलाकों में कार्यक्रम करके तीन तलाक के बारे में रोशनी डाली। ज्यादातर का मानना है कि अल्लाह को भी ये तरीका पसंद नहीं है। संगठन के सामने भी यह सुझाव रखा गया कि एक बार में तीन तलाक कहने वाले शौहर का समाजिक बहिष्कार किया जाए।
सबसे ज्यादा फतवे तलाक पर
आगरा। उलमा का कहना है कि सबसे ज्यादा मसले तलाक के ही आ रहे हैं। दारुल उलूम देवबंद के फतवा विभाग दारुल इफ्ता की वेबसाइट से पता चलता है कि अभी तक कुल सात लाख फतवे जारी किए गए हैं। इनमें तलाक के सवालों पर अभी तक 1.5 लाख फतवे जारी किए जा चुके हैं।
तलाक देकर पछता रहे शौहर
आगरा। उलमा के पास ऐसे भी मसले आ रहे हैं जिनमें शौहर गुस्से में या नशे में तीन तलाक दे बैठे और बाद में पछताए। हाल ही में आगरा में दो ऐसे मसले आए हैं जिनमें शौहर ने कोर्ट के बाहर गुस्से में आकर तीन तलाक दे दिया लेकिन जब कानूनी शिकंजा कसा तो उन्होंने तलाक देने की बात से ही इंकार कर दिया।
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शहर काजी अहमद अली का कहना है कि समाज की जो परेशानी है, उसे तो दूर होना चाहिए। एक बार में तीन तलाक देने वालों का अखलाकी तौर पर बायकाट होना चाहिए। इस पर काम किया जा रहा है। उलमा से बात चल रही है। तीन तलाक से किसी का घर उजड़ जाता है। हालांकि उनका यह भी कहना है कि शरीयत का जो कानून है, वह अपनी जगह मुकम्मल है, उसमें कोई तब्दीली नहीं की जा सकती है।
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संगठन सोसाइटी फार सोशल डेवलपमेंट के सचिव एडवोकेट मोहम्मद मुजम्मिल बताते हैं कि तीन तलाक के मामले में गुमराह करने जैसी कोई बात नहीं है। सभी उलमा इस तरीके को गलत बताते हैं मगर इसमें तलाक तो हो ही जाता है। इसे ध्यान में रखते हुए जागरूकता मुहिम चलाई जा रही है। खासतौर से मलिन बस्तियों में रहने वाले तबके के लोगों को इस बारे में जागरूक किया जा रहा है। शहर की कुछ शिक्षित युवतियां भी इस मुहिम में अपनी सहभागिता निभा रही हैं।
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भारतीय मुस्लिम विकास परिषद के अध्यक्ष समी आगाई का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सुझाव अच्छा है क्योंकि मामला कोर्ट में लंबित है। यह सामाजिक बुराई है। इस पर चिंतन करके इसे दूर करने की जिम्मेदारी भी समाज के मुअज्जिज लोगों की है। लंबे समय से चली आ रहीं बुराइयां, (चाहे वो कोई भी समाज हो) एक झटके से खत्म नहीं हो जाती हैं। इसमें समय लगता है। जल्द ही विकास परिषद मुस्लिम मोहल्लों में तीन तलाक के मुद्दे पर जागरूकता अभियान शुरू करने जा रहा है।
उत्तर प्रदेश मुस्लिम महापंचायत के सरपंच नदीम नूर का कहना है कि इस मुद्दे को बेवजह हवा दी गई। जिन लोगों को दीनी तालीम की सही जानकारी है, वे तीन तलाक को बुरा समझते हैं। अब संगठन भी सप्ताह में एक बार मुस्लिम बस्तियों में कैंप करके दीन की तालीम देंगे। तलाक के बारे में समझाएंगे।
उधर, हाल ही में शहर में लखनऊ से आए मुस्लिम स्कालर्स ने खैराती टोला और लोहामंडी इलाकों में कार्यक्रम करके तीन तलाक के बारे में रोशनी डाली। ज्यादातर का मानना है कि अल्लाह को भी ये तरीका पसंद नहीं है। संगठन के सामने भी यह सुझाव रखा गया कि एक बार में तीन तलाक कहने वाले शौहर का समाजिक बहिष्कार किया जाए।
सबसे ज्यादा फतवे तलाक पर
आगरा। उलमा का कहना है कि सबसे ज्यादा मसले तलाक के ही आ रहे हैं। दारुल उलूम देवबंद के फतवा विभाग दारुल इफ्ता की वेबसाइट से पता चलता है कि अभी तक कुल सात लाख फतवे जारी किए गए हैं। इनमें तलाक के सवालों पर अभी तक 1.5 लाख फतवे जारी किए जा चुके हैं।
तलाक देकर पछता रहे शौहर
आगरा। उलमा के पास ऐसे भी मसले आ रहे हैं जिनमें शौहर गुस्से में या नशे में तीन तलाक दे बैठे और बाद में पछताए। हाल ही में आगरा में दो ऐसे मसले आए हैं जिनमें शौहर ने कोर्ट के बाहर गुस्से में आकर तीन तलाक दे दिया लेकिन जब कानूनी शिकंजा कसा तो उन्होंने तलाक देने की बात से ही इंकार कर दिया।