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28 मानसिक रोगियों के ‘अपनों’ की तलाश
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 20 Jul 2016 01:24 AM IST
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मानसिक संस्थान में लंबे समय से भर्ती, नहीं आए हैं परिजन
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सुप्रीम कोर्ट ने ठीक हो चुके मानसिक रोगियों को डिस्चार्ज करने के निर्देश दिए हैं, लेकिन मानसिक स्वास्थ्य संस्थान एवं चिकित्सालय में ऐसे 28 मरीजों को अपने परिजनों की तलाश है। अरसे से यहां भर्ती इन मरीजों की सुध-बुध लेने कोई नहीं आया। इनके अपनों की तलाश के लिए संस्थान सोशल मीडिया के अलावा अखबार का भी सहारा ले रहा है।
संस्थान में 535 मानसिक रोगी भर्ती हैं। इसमें से 28 मरीज ऐसे हैं, जो लावारिस हैं और पूरी तरह स्वस्थ नहीं हैं। इनमें 12 महिलाएं हैं। अधिकांश की उम्र 50 से अधिक है। मानसिक हालत ठीक न होने पर इनको पुलिस या फिर सामाजिक संस्थाएं इलाज के लिए यहां छोड़ गई। कई साल गुजर जाने के बाद भी इनसे कोई मिलने नहीं आया। इलाज से इनकी हालत में सुधार तो है, लेकिन ये पूरी तरह से ठीक नहीं हुए हैं। चिकित्सक मानते हैं कि इनके परिजनों का पता लग जाए तो परिवार का साथ मिलने से इनमें सुधार तेजी से होगा।
सोशल मीडिया पर जारी किए जाएंगे फोटो
सोशल मीडिया पर इन मरीजों का फोटो जारी किया जाएगा, इनकी पहचान होने पर संस्थान में संपर्क के लिए अपील की जाएगी। पुलिस की मदद से अखबार में फोटो भी प्रकाशित कराए जाएंगे।
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ठीक होने के बाद यहां कोई नहीं
चिकित्साधिकारी डा. दिनेश राठौर बताते हैं कि सुप्रीम कोर्ट की मानीटरिंग कमेटी यहां निरीक्षण कर चुकी है, लेकिन स्वस्थ हो चुका कोई मरीज यहां नहीं मिला। 28 मरीज ऐसे हैं, जो अपने घर-नाम की थोड़ी-बहुत जानकारी देते हैं, उनके बताए गए पते पर पत्र व्यवहार भी किया गया, लेकिन ये मरीजों के परिजन नहीं निकले। बीते कुछ महीनों में चार मरीजों के परिजनों को तलाशने में जरूर सफलता मिली है।
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संस्थान में 535 मानसिक रोगी भर्ती हैं। इसमें से 28 मरीज ऐसे हैं, जो लावारिस हैं और पूरी तरह स्वस्थ नहीं हैं। इनमें 12 महिलाएं हैं। अधिकांश की उम्र 50 से अधिक है। मानसिक हालत ठीक न होने पर इनको पुलिस या फिर सामाजिक संस्थाएं इलाज के लिए यहां छोड़ गई। कई साल गुजर जाने के बाद भी इनसे कोई मिलने नहीं आया। इलाज से इनकी हालत में सुधार तो है, लेकिन ये पूरी तरह से ठीक नहीं हुए हैं। चिकित्सक मानते हैं कि इनके परिजनों का पता लग जाए तो परिवार का साथ मिलने से इनमें सुधार तेजी से होगा।
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सोशल मीडिया पर जारी किए जाएंगे फोटो
सोशल मीडिया पर इन मरीजों का फोटो जारी किया जाएगा, इनकी पहचान होने पर संस्थान में संपर्क के लिए अपील की जाएगी। पुलिस की मदद से अखबार में फोटो भी प्रकाशित कराए जाएंगे।
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ठीक होने के बाद यहां कोई नहीं
चिकित्साधिकारी डा. दिनेश राठौर बताते हैं कि सुप्रीम कोर्ट की मानीटरिंग कमेटी यहां निरीक्षण कर चुकी है, लेकिन स्वस्थ हो चुका कोई मरीज यहां नहीं मिला। 28 मरीज ऐसे हैं, जो अपने घर-नाम की थोड़ी-बहुत जानकारी देते हैं, उनके बताए गए पते पर पत्र व्यवहार भी किया गया, लेकिन ये मरीजों के परिजन नहीं निकले। बीते कुछ महीनों में चार मरीजों के परिजनों को तलाशने में जरूर सफलता मिली है।