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जान देने से पहले पांच बच्चों के बारे में भी नहीं सोचा

Wed, 16 Jan 2019 11:16 PM IST
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Updated Wed, 16 Jan 2019 11:16 PM IST
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जान देने से पहले पांच बच्चों के बारे में भी नहीं सोचा
जान देने से पहले पांच बच्चों के बारे में भी नहीं सोचा - फोटो : अमर उजाला
कासगंज । सहावर कोतवाली क्षेत्र गांव के धनसिंहपुर में मंगलवार को हर किसी की जुबां पर बस एक ही सवाल था कि क्या अरविंद और ममता गोली मारने से पहले एक बार भी अपने पांचों बच्चों के बारे में नहीं सोचा। अगर सोचा होता तो शायद इतनी बड़ी घटना होने से बच जाती। सोचा होता तो शायद पांच बच्चों के सिर से मां बाप का साया न उठता। फिलहाल यह सवाल अब सवाल बन कर ही रह गया है। इसका जवाब देने वाला कोई बचा ही नहीं। आलम यह है कि जिस घर से हर रोज किलकारियां और बच्चों की खिलखिलाहट की आवाज आती थी अब वहां पसरे सन्नाटे को उनकी चीत्कार तोड़ रहीं हैं।
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कुछ ऐसा था परिवार
कासगंज। अरविंद खेती किसानी करके परिवार का भरण पोषण करता था। उसके अलावा परिवार में उसकी पत्नी ममता और 11 साल का बेटा पूरन, 9 साल की बेटी कोमल, 7 साल का बेटा बटकन, 5 साल की बेटी पूनम और 1 साल का बेटा प्रेम था। घटना के समय सभी बच्चे सो रहे थे। ममता ने जब गोली मारी तो उसकी आवाज सुनकर बड़ा बेटा पूरन जाग गया और घटना स्थल पर पहुंचा। जब तक वह कुछ समझ पाता तब तक पिता अरविंद ने भी गोली मार ली। यह देखकर वह चीखते हुए घर से बाहर निकला। भाई की चीख सुनते ही अन्य भाई बहन भी जाग गए और चीख पुकार करने लगे।
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माता पिता का रो रोकर बुरा हाल
सहावर। मृतक अरविंद के पिता रामवीर एवं मां सुनीता बुजुर्ग हैं। वह अपने बेटों के साथ नहीं रहते थे। समीप के गांव म्यांसुर में रामवीर अपनी ससुराल में रहकर गुजर बसर करते हैं। पुत्र और पुत्रवधू की मौत के बाद 5 बच्चों के भविष्य को लेकर यह दोनों बेहद चिंतित है और पूरी तरह से टूट गए हैं। दोनों का ही रो रोकर बुरा हाल है।
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बच्चों का सहारा बनेगा प्रशासन
कासगंज। अरविंद और ममता तो अपने बच्चों को छोड़कर दुनियां चले गए। अब सभी को बच्चों की परवरिश की चिंता सताए जा रही थी। ऐसे में बच्चों की परवरिश करने का जिम्मा प्रशासन ने लिया है। परिवार के किसी व्यक्ति या फिर किसी संस्था को उनकी जिम्मेदारी देकर बच्चों की देखभाल कराई जाएगी। इसके लिए डीएम आरपी सिंह ने पटियाली के एसडीएम को मौके पर भेजकर जांच पड़ताल कराई है। एसडीएम की रिपोर्ट के बाद प्रशासनिक योजनाओं का लाभ पांचों बच्चों तक पहुंचाया जाएगा।


- जो बच्चे पढ़ने योग्य हैं उन्हें प्रशासन की ओर से 2 हजार रुपये प्रतिमाह दिए जाएंगे। 18 वर्ष तक बच्चों को दो हजार रुपये की दर से भुगतान किया जाएगा। उसके बाद जो भी संभव होगा पूरी मदद की जाएगी। सरकारी योजनाओं के अलावा मानवीय आधार पर भी मदद होगी। - आरपी सिंह, डीएम।
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