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बेटियों ने थामी तूलिका, बेटी बचाने का दिया संदेश
Updated Sat, 24 Nov 2018 11:55 PM IST
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फिरोजाबाद। अमर उजाला के अपराजिता अभियान के तहत पंडित मुरारी लाल इंटर कालेज में आयोजित चित्रकला प्रतियोगिता में छात्राओं ने तूलिका थामकर बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ का संदेश दिया। अपराजिता के मंच पर बेटियों ने नारी गरिमा को अक्षुण्ण बनाए रखने की शपथ भी ली। बेटियों ने गजब का उत्साह दिखाया। उन्होंने चित्रों के माध्यम से भावनात्मक संदेश दिए।
अमर उजाला के अपराजिता अभियान के तहत आयोजित चित्रकला प्रतियोगिता में करीब सौ छात्राओं ने बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का संदेश दिया। छात्रा पूनम प्रजापति ने तराजू की आकृति उकेरी, जिसमें तीन बेटों के बराबर एक बेटी को दर्शाया गया। आयुषी दुबे ने अपनी तूलिका से गर्भ में पल रही बेटी की आकृति दी। संदेश था गैरों की बेटियों पर जान छिड़कते हैं, अपनी बेटियों को जान से मार डालते हैं।
बेटियों को जिस प्रकार घर में रखा जाता है, समाज में लड़कों के बराबर दर्जा नहीं दिया जाता, इस संदेश को कलाकृति के माध्यम से छात्रा ने प्रस्तुत किया। मां मुझे संसार देना सहित अनेकों संदेश देने वाली कलाकृतियां छात्राओं ने बनाई। रंग-बिरंगे व भावनात्मक चित्र देखकर कालेज शिक्षक भी भावुक हो उठे। विद्यालय के मैनेजिंग डायरेक्टर मनोज गर्ग ने अमर उजाला की इस पहल को सकारात्मक संदेश बताया।
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छात्राओं और शिक्षिकाओं को नारी सुरक्षा व सम्मान की शपथ दिलाई गई। प्रबंध समिति की सदस्य पूर्णिमा गर्ग ने शपथ दिलाई। साथ ही अपराजिता अभियान से जुड़े संकल्प पत्र भी भरे गए।
-छात्रा नितिष्का ने कहा कि आज भी समाज में बेटों के बराबर बेटी को दर्जा नहीं दिया जाता है। अमर उजाला ने नारी सम्मान के लिए जो पहल की है, वो सराहनीय है। छात्रा सृष्टि ने कहा कि लड़के बाहर खेलते हैं, मगर लड़कियों को घर में भी रोक-टोक रहती है। कलाकृति में बताया है कि बेटे-बेटियों को समान अधिकार दें। प्रियंका प्रजापति ने कहा कि हमारे देश में बेटियों पर अत्याचार होते हैं। गर्भ में ही बेटियों को मार दिया है। महिलाओं पर भी अत्याचार होते हैं। मैं संदेश देना चाहूंगी कि बेटी ही घर लक्ष्मी होती है।
मानसी सिंह ने कहा कि अपराजिता मुहिम बहुत ही सराहनीय है। अमर उजाला में कलाकृति बनाकर अपने भाव प्रस्तुत किए हैं। प्रियांशी तिवारी ने कहा कि बेटों को बाहर पढ़ने भेज दिया जाता है, मगर बेटियों को इंटर या स्नातक के बाद घर में बैठा दिया जाता है। मैंने कलाकृति के माध्यम से संदेश दिया है कि बेटियों को आगे बढ़ने का मौका देना चाहिए।
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अमर उजाला के अपराजिता अभियान के तहत आयोजित चित्रकला प्रतियोगिता में करीब सौ छात्राओं ने बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का संदेश दिया। छात्रा पूनम प्रजापति ने तराजू की आकृति उकेरी, जिसमें तीन बेटों के बराबर एक बेटी को दर्शाया गया। आयुषी दुबे ने अपनी तूलिका से गर्भ में पल रही बेटी की आकृति दी। संदेश था गैरों की बेटियों पर जान छिड़कते हैं, अपनी बेटियों को जान से मार डालते हैं।
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बेटियों को जिस प्रकार घर में रखा जाता है, समाज में लड़कों के बराबर दर्जा नहीं दिया जाता, इस संदेश को कलाकृति के माध्यम से छात्रा ने प्रस्तुत किया। मां मुझे संसार देना सहित अनेकों संदेश देने वाली कलाकृतियां छात्राओं ने बनाई। रंग-बिरंगे व भावनात्मक चित्र देखकर कालेज शिक्षक भी भावुक हो उठे। विद्यालय के मैनेजिंग डायरेक्टर मनोज गर्ग ने अमर उजाला की इस पहल को सकारात्मक संदेश बताया।
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छात्राओं और शिक्षिकाओं को नारी सुरक्षा व सम्मान की शपथ दिलाई गई। प्रबंध समिति की सदस्य पूर्णिमा गर्ग ने शपथ दिलाई। साथ ही अपराजिता अभियान से जुड़े संकल्प पत्र भी भरे गए।
-छात्रा नितिष्का ने कहा कि आज भी समाज में बेटों के बराबर बेटी को दर्जा नहीं दिया जाता है। अमर उजाला ने नारी सम्मान के लिए जो पहल की है, वो सराहनीय है। छात्रा सृष्टि ने कहा कि लड़के बाहर खेलते हैं, मगर लड़कियों को घर में भी रोक-टोक रहती है। कलाकृति में बताया है कि बेटे-बेटियों को समान अधिकार दें। प्रियंका प्रजापति ने कहा कि हमारे देश में बेटियों पर अत्याचार होते हैं। गर्भ में ही बेटियों को मार दिया है। महिलाओं पर भी अत्याचार होते हैं। मैं संदेश देना चाहूंगी कि बेटी ही घर लक्ष्मी होती है।
मानसी सिंह ने कहा कि अपराजिता मुहिम बहुत ही सराहनीय है। अमर उजाला में कलाकृति बनाकर अपने भाव प्रस्तुत किए हैं। प्रियांशी तिवारी ने कहा कि बेटों को बाहर पढ़ने भेज दिया जाता है, मगर बेटियों को इंटर या स्नातक के बाद घर में बैठा दिया जाता है। मैंने कलाकृति के माध्यम से संदेश दिया है कि बेटियों को आगे बढ़ने का मौका देना चाहिए।