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जानलेवा हमले में चार को सात साल की सजा
Updated Wed, 13 Dec 2017 11:33 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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मैनपुरी। बिछवां क्षेत्र के गांव गोशलपुर में 17 साल पहले जानलेवा हमला करने के मामले में एफटीसी जज ने गांव के ही चार लोगों को सात-सात साल की सजा सुनाई है। पांच-पांच हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। सभी को हिरासत में लेकर जेल भेज दिया गया है।
गोशलपुर निवासी जयपाल सिंह तथा धनपाल सिंह के बीच पुरानी रंजिश है। इसी कारण से 18 मई 2000 की सुबह आठ बजे गांव के ही करन सिंह, जितेंद्र सिंह, रामपाल सिंह, हरेंद्र सिंह उर्फ करु ने फायरिंग की थी। इसमें जयपाल घायल हुआ था। थाने में रिपोर्ट दर्र्ज कराने गए जयपाल को पुलिस ने धनपाल की हत्या करने में जेल भेज दिया था।
अदालत में पेश करने के दौरान सीजेएम के आदेश पर पुलिस ने जयपाल का मेडिकल कराया। जयपाल की रिपोर्ट पर जांच के बाद पुलिस ने चारों को दोषी पाकर आरोपपत्र न्यायालय में दाखिल किया। मुकदमे की सुनवाई एफटीसी प्रथम के जज आनंद कुमार सिंह के न्यायालय में की गई।
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अभियोजन पक्ष की गवाही तथा जिला शासकीय अधिवक्ता सुभाषचंद्र यादव की दलीलों के आधार पर एफटीसी जज ने चारों आरोपियों को दोषी पाया। 30 नवंबर को सजा सुनाने के समय वह अदालत में नहीं आए। उनकी गिरफ्तारी के लिए वारंट जारी कर एसपी को भेजे गए।
बुधवार को चारों आरोपी अदालत में हाजिर हुए। एफटीसी जज ने सभी को सात-सात साल की सजा सुनाई। पांच-पांच हजार रुपये जुर्माना अदा करने का भी आदेश दिया गया।
जानलेवा हमले के मामले में जयपाल की तहरीर पर पुलिस ने रिपोर्ट नहीं लिखी थी। जमानत कराने केे बाद उसने सीजेएम कोर्ट में प्रार्थनापत्र दिया, जो निरस्त कर दिया गया। उसने जिला जज की अदालत की शरण ली।
जिला जज के आदेश के बाद सीजेएम ने सुनवाई करके पुलिस को रिपोर्ट दर्ज करने के आदेश दिए। सीजेएम के आदेश पर थाना बिछवां में सात जून 2000 को घटना की रिपोर्ट दर्ज की गई थी।
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गोशलपुर निवासी जयपाल सिंह तथा धनपाल सिंह के बीच पुरानी रंजिश है। इसी कारण से 18 मई 2000 की सुबह आठ बजे गांव के ही करन सिंह, जितेंद्र सिंह, रामपाल सिंह, हरेंद्र सिंह उर्फ करु ने फायरिंग की थी। इसमें जयपाल घायल हुआ था। थाने में रिपोर्ट दर्र्ज कराने गए जयपाल को पुलिस ने धनपाल की हत्या करने में जेल भेज दिया था।
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अदालत में पेश करने के दौरान सीजेएम के आदेश पर पुलिस ने जयपाल का मेडिकल कराया। जयपाल की रिपोर्ट पर जांच के बाद पुलिस ने चारों को दोषी पाकर आरोपपत्र न्यायालय में दाखिल किया। मुकदमे की सुनवाई एफटीसी प्रथम के जज आनंद कुमार सिंह के न्यायालय में की गई।
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अभियोजन पक्ष की गवाही तथा जिला शासकीय अधिवक्ता सुभाषचंद्र यादव की दलीलों के आधार पर एफटीसी जज ने चारों आरोपियों को दोषी पाया। 30 नवंबर को सजा सुनाने के समय वह अदालत में नहीं आए। उनकी गिरफ्तारी के लिए वारंट जारी कर एसपी को भेजे गए।
बुधवार को चारों आरोपी अदालत में हाजिर हुए। एफटीसी जज ने सभी को सात-सात साल की सजा सुनाई। पांच-पांच हजार रुपये जुर्माना अदा करने का भी आदेश दिया गया।
जानलेवा हमले के मामले में जयपाल की तहरीर पर पुलिस ने रिपोर्ट नहीं लिखी थी। जमानत कराने केे बाद उसने सीजेएम कोर्ट में प्रार्थनापत्र दिया, जो निरस्त कर दिया गया। उसने जिला जज की अदालत की शरण ली।
जिला जज के आदेश के बाद सीजेएम ने सुनवाई करके पुलिस को रिपोर्ट दर्ज करने के आदेश दिए। सीजेएम के आदेश पर थाना बिछवां में सात जून 2000 को घटना की रिपोर्ट दर्ज की गई थी।