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न्यट्रीशियन बीक में बच्चे मिले कुपोषित
Updated Fri, 08 Sep 2017 11:46 PM IST
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कुपोषण (प्रतीकात्मक चित्र)
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कासगंज।
बच्चों के पोषण की स्थिति का आंकलन करने के लिए प्रतिवर्ष एक सितंबर से सात सितंबर तक न्यूटीशियन वीक का आयोजन किया जाता है। इस वीक के तहत आंगनबाड़ी केंद्रों से जुडे़ बच्चों का वजन कराया गया। वजन के दौरान सारी हकीकत सामने आ गई। 8.11 प्रतिशत बच्चेे कुपोषित और अतिकुपोषित श्रेणी के निकले। जबकि सभी बच्चों का वजन तक नहीं हो पाया।
जनपद में 2445 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं। इन केंद्रों पर पांच साल तक के 175764 बच्चे जुड़े हुए है। इन बच्चों को पोषित करने के लिए पुष्टाहार योजना संचालित है, लेकिन आंगनबाड़ी केंद्रों की स्थिति काफी खराब है। अधिकांश आंगनबाड़ी केंद्र घर से ही संचालित होते है। इन केंद्रों से जुड़े बच्चे केंद्रों पर नहीं पहुंचते। इस पुष्टाहार को बाजार में बेच दिए जाने के आरोप लगते रहते हैं। एक सप्ताह में आंगनबाड़ी केंद्रों पर 163334 बच्चों का वजन कर लिया गया। इसके बाद जो आंकड़े सामने आए हैं वे काफी चौंकाने वाले हैं। इन बच्चों में 5802 बच्चे अतिकुपोषित श्रेणी के पाए गए। जबकि 7457 बच्चे कुपोषित श्रेणी में निकले। यदि सभी बच्चों का वजन हो जाता तो यह आंकड़ा और भी बढ़ जाता। बाल विकास परियोजना अधिकारी संजीव कुमार का कहना है कि बच्चों को पोषित करने पर पूरा ध्यान दिया जा रहा है। बच्चे की स्थिति में काफी सुधार हुआ है। कुपोषित एवं अतिकुपोषित बच्चों के आंकड़ों में गिरावट आई है। पिछले साल की अपेक्षा अब कम बच्चे इन श्रेणी में हैं।
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बच्चों के पोषण की स्थिति का आंकलन करने के लिए प्रतिवर्ष एक सितंबर से सात सितंबर तक न्यूटीशियन वीक का आयोजन किया जाता है। इस वीक के तहत आंगनबाड़ी केंद्रों से जुडे़ बच्चों का वजन कराया गया। वजन के दौरान सारी हकीकत सामने आ गई। 8.11 प्रतिशत बच्चेे कुपोषित और अतिकुपोषित श्रेणी के निकले। जबकि सभी बच्चों का वजन तक नहीं हो पाया।
जनपद में 2445 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं। इन केंद्रों पर पांच साल तक के 175764 बच्चे जुड़े हुए है। इन बच्चों को पोषित करने के लिए पुष्टाहार योजना संचालित है, लेकिन आंगनबाड़ी केंद्रों की स्थिति काफी खराब है। अधिकांश आंगनबाड़ी केंद्र घर से ही संचालित होते है। इन केंद्रों से जुड़े बच्चे केंद्रों पर नहीं पहुंचते। इस पुष्टाहार को बाजार में बेच दिए जाने के आरोप लगते रहते हैं। एक सप्ताह में आंगनबाड़ी केंद्रों पर 163334 बच्चों का वजन कर लिया गया। इसके बाद जो आंकड़े सामने आए हैं वे काफी चौंकाने वाले हैं। इन बच्चों में 5802 बच्चे अतिकुपोषित श्रेणी के पाए गए। जबकि 7457 बच्चे कुपोषित श्रेणी में निकले। यदि सभी बच्चों का वजन हो जाता तो यह आंकड़ा और भी बढ़ जाता। बाल विकास परियोजना अधिकारी संजीव कुमार का कहना है कि बच्चों को पोषित करने पर पूरा ध्यान दिया जा रहा है। बच्चे की स्थिति में काफी सुधार हुआ है। कुपोषित एवं अतिकुपोषित बच्चों के आंकड़ों में गिरावट आई है। पिछले साल की अपेक्षा अब कम बच्चे इन श्रेणी में हैं।
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