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जाया गई 208 पेड़ों की बलि, फेसिलिटी सेंटर को मंजूरी

Sun, 29 May 2016 01:56 AM IST
अमर उजाला आगरा
अमर उजाला आगरा Updated Sun, 29 May 2016 01:56 AM IST
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208 trees were sacrificed, but facility center not approve
जाया गई 208 पेड़ों की बलि, फेसिलिटी सेंटर को मंजूरी - फोटो : Amar Ujala
नेशनल मान्यूमेंट अथारिटी ने लगाई रोक
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ताजगंज प्रोजेक्ट में ताज पूर्वी गेट पर प्रस्तावित था सेंटर 

ताज ट्रिपेजियम जोन में प्रदूषण रोकने में सहायक थे पेड़

ताज ट्रिपेजियम जोन में प्रदूषण रोकने के लिए जनता पर तमाम प्रतिबंध लगाए जा रहे हैं, लेकिन पिछली साल सत्ता की हनक में ताजमहल के महज 50 मीटर दूर पूर्वी गेट पाठक प्रेस के सामने 208 पेड़ काट दिए गए थे। यह सब ताजगंज प्रोजेक्ट के तहत प्रस्तावित फैसिलिटी सेंटर के लिए किया गया था। अब नेशनल मान्यूमेंट अथारिटी से इस सेंटर को बनाने की मंजूरी नहीं मिली है। ताजगंज प्रोजेक्ट की मॉनिटरिंग कर रहे यूपी टूरिज्म और कार्यदायी संस्था राजकीय निर्माण निगम का कहना है कि खाली जमीन पर अब हरी घास और पेड़ लगवा दिए जाएंगे।
ताजमहल के पास ताज नेचर वॉक में पेड़ काटने का मामला एनजीटी (नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल) में चल रहा है, यह पेड़ ताजमहल पर पूर्वी हवाओं के साथ आने वाले धूल के कणों के लिए एक दीवार की तरह थे। लेकिन ताजगंज प्रोजेक्ट में ठेकेदार फर्म के दबाव में इनको कटवा दिया गया। हैरतअंगेज पहलू यह है कि पूर्वी गेट बैरियर पर मौजूद जगह पर सबसे पहले पेड़ काटे गए। उसके बाद चारों ओर की बाउंड्री बनवाई गई। इस बीच नेशनल मान्यूमेंट अथारिटी ने फैसिलिटी सेंटर के निर्माण पर ही यह कहते हुए रोक लगा दी कि यह ताज के प्रतिबंधित 100 मीटर दायरे में है। इन पेड़ों के काटे जाने से सबसे ज्यादा नुकसान ताजमहल को हुआ। दरअसल, इसी जमीन पर वन विभाग की नर्सरी भी थी। 
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विकास के नाम पर हरियाली का विनाश-:
- आगरा-दिल्ली 6 लेन हाईवे में 66 हजार पेड़ काटे गए
- आगरा-इटावा रेल मार्ग पर 25,505 पेड़ों पर चली आरी
- ताज नेचरवॉक, बाबरपुर में 10,500 पेड़ों को काटा
- आगरा-अलीगढ़ सड़क मार्ग के चौड़ीकरण में 484 पेड़ कटे
- दक्षिणी बाईपास के लिए 400 पेड़ों की बलि चढ़ाई गई
- डेडीकेटेड फ्रेट कारीडोर के लिए 178 पेड़ों को काटा गया
- ताजमहल के पास ताजगंज प्रोजेक्ट में 208 पेड़ों की कटाई

ट्रांसलोकेट विधि का नहीं किया प्रयोग
सत्ता से जुड़े लोगों के हाथ में दिए गए 197 करोड़ रुपये के ताजगंज प्रोजेक्ट में सरकारी खजाना पानी की तरह लुटाया गया, लेकिन ताजमहल के मुहाफिज बने पेड़ों के लिए ट्रांसलोकेट विधि का प्रयोग नहीं किया गया। ताजनगरी में तीन डीएफओ के सस्पेंड होने के बाद भी प्रोजेक्ट में पेड़ काटने को लेकर जल्दबाजी इतनी रही कि मंजूरी का इंतजार भी नहीं किया गया।
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10 साल में पनप पाते हैं पौधे
ताज के पास जो पेड़ काटे, नए पेड़ लगाए भी दिए जाएं तो भी वह 10 साल से पहले नहीं पनप सकेंगे। पेड़ काटने के एवज में दो से पांच गुने तक पेड़ लगाने का प्रावधान है, लेकिन ताजमहल के पास एक भी पेड़ नहीं लगाया गया। 
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