{"_id":"5cae3483bdec22140e108b51","slug":"201554920579-agra-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"नरायच धाम में शतचंडी यज्ञ में आहुति देने से दूर होते हैं कष्ट","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
नरायच धाम में शतचंडी यज्ञ में आहुति देने से दूर होते हैं कष्ट
विज्ञापन
हवन
- फोटो : shutterstock
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मैनपुरी-कुसमरा। कस्बा का नरायच धाम श्री दुर्गा देवी मंदिर लोगों के लिए आस्था का केंद्र है। बताया जाता है कि यह मंदिर लगभग पांच सौ वर्ष पुराना है। यहां नवरात्र में आयोजित शतचंडी यज्ञ में आहुति देने से कष्ट दूर होते हैं। साथ ही घर में खुशियां आती है। इस मंदिर का निर्माण लाखा बंजारा ने कराया था।
प्रचलित किंमवदंती के अनुसार लाखा बंजारा राजाओं का सामान ढोने का कार्य करता था। एक दिन रात हो जाने के कारण वह अपने साथियों के साथ तालाब के किनारे ठहरा था। उस समय वह कुष्ठ रोग से ग्रसित था। सुबह उठकर उसने यहां स्थित तालाब में स्नान किया। बाद में चमत्कारिक ढंग से उसका कुष्ठ रोग ठीक होने लगा। खुश होकर लाखा बंजारा ने 101 मंदिर बनवाने का संकल्प लिया। इसमें से एक मंदिर वर्तमान में नगर के कटरा मोहल्ला में स्थित है, जिसे नरायच धाम दुर्गा मंदिर के नाम से जाना जाता है। नवरात्र में यहां पूजा पाठ के साथ ही शतचंडी यज्ञ चलता है।
विज्ञापन
प्रचलित किंमवदंती के अनुसार लाखा बंजारा राजाओं का सामान ढोने का कार्य करता था। एक दिन रात हो जाने के कारण वह अपने साथियों के साथ तालाब के किनारे ठहरा था। उस समय वह कुष्ठ रोग से ग्रसित था। सुबह उठकर उसने यहां स्थित तालाब में स्नान किया। बाद में चमत्कारिक ढंग से उसका कुष्ठ रोग ठीक होने लगा। खुश होकर लाखा बंजारा ने 101 मंदिर बनवाने का संकल्प लिया। इसमें से एक मंदिर वर्तमान में नगर के कटरा मोहल्ला में स्थित है, जिसे नरायच धाम दुर्गा मंदिर के नाम से जाना जाता है। नवरात्र में यहां पूजा पाठ के साथ ही शतचंडी यज्ञ चलता है।
विज्ञापन