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हौसलों से भरी उड़ान, पैरों से दे दिया इम्तिहान
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हौसलों से भरी उड़ान, पैरों से दे दिया इम्तिहान
- फोटो : अमर उजाला
कासगंज। किसी को कुदरत ने दिव्यांग बनाकर भेजा तो कोई दुर्घटना में हाथ पैर गंवा बैठा। इन्हीं में शामिल है, हाईस्कूल का छात्र रंजीत। शारीरिक कमजोरी को अपनी दुर्बलता न मानकर उसने हौसलों की उड़ान तय की है। हाथों से दिव्यांग विद्यार्थी ने वर्ष भर पैरों से लिखाई पढ़ाई का इम्तिहान दिया। अब बोर्ड की परीक्षा में पैरों से उत्तर पुस्तिकाएं लिख रहा है।
ढोलना थाना क्षेत्र के गांव महेवा खुर्द निवासी रंजीत कुमार पुत्र इंद्रपाल सिंह बचपन से ही पढ़ने लिखने में काफी तेज है। लेकिन जब वह पांच साल था तो बिजली की चपेट में आ जाने के कारण वह दोनों हाथों को गंवा बैठा। शरीर में और भी कई विसंगतियां आ गईं। वह पढ़ने में काफी होशियार था, लेकिन लिखने में उसे दिक्कत थी। रंजीत ने अपना हौसला नहीं टूटने दिया। उसने निरंतर अभ्यास कर लिखाई का हुनर पैरों से सीख लिया। रंजीत ने तीन वर्ष पूर्व मुन्नीदेवी इंटर कॉलेज में कक्षा 8 में दाखिला लिया। वर्ष 2018 में पूरे वर्ष उसने हाईस्कूल की कक्षाओं में पढ़ाई के दौरान लिखाई का इम्तिहान पास किया और राणा इंटर कालेज ढोलना परीक्षा केंद्र पर परीक्षा दे रहा है। उसकी पैरों से लिखाई का हुनर देख अन्य छात्र ही नहीं बल्कि सचल दल भी हैरान रह गए।
पेरों से लिखता मोती जैसे शब्द
पेरों से उसने लिखाई का हुनर ही नहीं सिखा, बल्कि लेखनी को खूबसूरत भी बनाया। होनहार विद्यार्थी रंजीत मोती जैसे शब्द लिखता है और वह लेखन प्रतियोगिता की पूरी क्षमता रखता है।
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बहन का है मार्ग दर्शक
रंजीत की छोटी बहन ज्योति हैं। बताया जाता है बहन कक्षा 8 की छात्रा है। रंजीत अपनी बहन का मार्ग दर्शक बना हुआ है। अपनी शिक्षा के साथ साथ वह अपनी बहन को भी बेहतर शिक्षा के लिए प्रेरित कर रहा है।
जब मैं निरीक्षण के लिए राणा इंटर कालेज ढोलना में पहुंचा तो इस परीक्षा केंद्र पर कक्षा 10 के परीक्षार्थी रंजीत का हुनर देख आश्चर्य चकित रह गया। वह अन्य दिव्यांगों के लिए प्रेरणास्रोत बना है और समाज को बेहतर संदेश दे रहा है।
राजेश कुमार, स्टेटिक मजिस्ट्रेट
जब बचपन में मेरे हाथ निष्क्रिय हो गए तो मुझे काफी कष्ट हुआ। ज्यों ज्यों बढ़ा होता गया, पढ़ाई के प्रति रुचि बढ़ी। लेखन में दिक्कत होती थी। निरंतर अभ्यास कर पेरों से लिखने का हुनर सीखा।
रंजीत कुमार, दिव्यांग छात्र
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ढोलना थाना क्षेत्र के गांव महेवा खुर्द निवासी रंजीत कुमार पुत्र इंद्रपाल सिंह बचपन से ही पढ़ने लिखने में काफी तेज है। लेकिन जब वह पांच साल था तो बिजली की चपेट में आ जाने के कारण वह दोनों हाथों को गंवा बैठा। शरीर में और भी कई विसंगतियां आ गईं। वह पढ़ने में काफी होशियार था, लेकिन लिखने में उसे दिक्कत थी। रंजीत ने अपना हौसला नहीं टूटने दिया। उसने निरंतर अभ्यास कर लिखाई का हुनर पैरों से सीख लिया। रंजीत ने तीन वर्ष पूर्व मुन्नीदेवी इंटर कॉलेज में कक्षा 8 में दाखिला लिया। वर्ष 2018 में पूरे वर्ष उसने हाईस्कूल की कक्षाओं में पढ़ाई के दौरान लिखाई का इम्तिहान पास किया और राणा इंटर कालेज ढोलना परीक्षा केंद्र पर परीक्षा दे रहा है। उसकी पैरों से लिखाई का हुनर देख अन्य छात्र ही नहीं बल्कि सचल दल भी हैरान रह गए।
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पेरों से लिखता मोती जैसे शब्द
पेरों से उसने लिखाई का हुनर ही नहीं सिखा, बल्कि लेखनी को खूबसूरत भी बनाया। होनहार विद्यार्थी रंजीत मोती जैसे शब्द लिखता है और वह लेखन प्रतियोगिता की पूरी क्षमता रखता है।
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बहन का है मार्ग दर्शक
रंजीत की छोटी बहन ज्योति हैं। बताया जाता है बहन कक्षा 8 की छात्रा है। रंजीत अपनी बहन का मार्ग दर्शक बना हुआ है। अपनी शिक्षा के साथ साथ वह अपनी बहन को भी बेहतर शिक्षा के लिए प्रेरित कर रहा है।
जब मैं निरीक्षण के लिए राणा इंटर कालेज ढोलना में पहुंचा तो इस परीक्षा केंद्र पर कक्षा 10 के परीक्षार्थी रंजीत का हुनर देख आश्चर्य चकित रह गया। वह अन्य दिव्यांगों के लिए प्रेरणास्रोत बना है और समाज को बेहतर संदेश दे रहा है।
राजेश कुमार, स्टेटिक मजिस्ट्रेट
जब बचपन में मेरे हाथ निष्क्रिय हो गए तो मुझे काफी कष्ट हुआ। ज्यों ज्यों बढ़ा होता गया, पढ़ाई के प्रति रुचि बढ़ी। लेखन में दिक्कत होती थी। निरंतर अभ्यास कर पेरों से लिखने का हुनर सीखा।
रंजीत कुमार, दिव्यांग छात्र