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बैंकें नहीं कर रही मुद्रा लोन, योजना को लगा रहे पलीता
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Mudra Yojna
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एटा। प्रधानमंत्री मुद्रा लोन योजना के माध्यम से कोई व्यक्ति 10 लाख तक का लोन लेकर अपना व्यापार चला सकता है। मगर बैंकों के असहयोग की वजह से सरकार की योजना को पलीता लगाया जा रहा है। पूरे साल में मात्र 16 फीसदी आवेदकों ही योजना का लाभ दिया गया है।
अगर बात वन डिस्ट्रिक वन प्रोडक्ट को लेकर की जाए तो जलेसर को इस श्रेणी में रखा गया है। इसमें क्षेत्र की विभिन्न बैंकों के माध्यम से 100 लाभार्थियों का लक्ष्य दिया गया था। जिनको प्रधानमंत्री मुद्रा लोन योजना के तहत कर्ज दिलाकर कारोबार बढ़ाकर व्यापार करने में सहयोग देने का भरोसा दिया गया था। मगर जिन 100 लाभार्थियों को लाभ पहुंचाने की बात की जा रही थी उसमें से मात्र 51 आवेदकों की फाइलें ही बैंकों के पटल तक पहुंच सकी। जिनको स्वीकृति भी मिल गई मगर बैंकों में बैठे जिम्मेदारों ने सिर्फ 16 लाभार्थियों को 163 लाख रुपये का ऋण वितरण किया। बैंकों के असहयोग से की वजह से जहां वन डिस्ट्रिक वन प्रोडक्ट की भरपाई नहीं हो पा रही हैं, वहीं जिले के युवा अन्य कारोबार करने के लिए मुद्रा लोन योजना के के लिए चक्कर काट काटकर परेशान हो गए है। मगर उन्हें ऋण नहीं मिल पाया है।
तमाम कोशिशों के बाद भी नहीं मिला ऋण
जिला मुख्यालय स्थित जीटी रोड खेमका पैट्रोल पंप के सामने रहने वाले नदीम सैफी पुत्र शमीउद्दीन सैफी का आरोप है कि जेएलएन डिग्री कॉलेज के सामने स्थित बैंक में मुद्रा लोन योजना के तहत आवेदन किया था। आवेदक लोहे के शटर बनाने का कार्य करता है, जीएसटी के तहत फर्म पंजीकृत हैं। बैंक को सारे दस्तावेज देने के बाद भी भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया। बैंक प्रबंधक ने सरकार द्वारा संचालित मुद्रा लोन योजना के तहत ऋण मुहैया नहीं कराया।
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अगर बात वन डिस्ट्रिक वन प्रोडक्ट को लेकर की जाए तो जलेसर को इस श्रेणी में रखा गया है। इसमें क्षेत्र की विभिन्न बैंकों के माध्यम से 100 लाभार्थियों का लक्ष्य दिया गया था। जिनको प्रधानमंत्री मुद्रा लोन योजना के तहत कर्ज दिलाकर कारोबार बढ़ाकर व्यापार करने में सहयोग देने का भरोसा दिया गया था। मगर जिन 100 लाभार्थियों को लाभ पहुंचाने की बात की जा रही थी उसमें से मात्र 51 आवेदकों की फाइलें ही बैंकों के पटल तक पहुंच सकी। जिनको स्वीकृति भी मिल गई मगर बैंकों में बैठे जिम्मेदारों ने सिर्फ 16 लाभार्थियों को 163 लाख रुपये का ऋण वितरण किया। बैंकों के असहयोग से की वजह से जहां वन डिस्ट्रिक वन प्रोडक्ट की भरपाई नहीं हो पा रही हैं, वहीं जिले के युवा अन्य कारोबार करने के लिए मुद्रा लोन योजना के के लिए चक्कर काट काटकर परेशान हो गए है। मगर उन्हें ऋण नहीं मिल पाया है।
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तमाम कोशिशों के बाद भी नहीं मिला ऋण
जिला मुख्यालय स्थित जीटी रोड खेमका पैट्रोल पंप के सामने रहने वाले नदीम सैफी पुत्र शमीउद्दीन सैफी का आरोप है कि जेएलएन डिग्री कॉलेज के सामने स्थित बैंक में मुद्रा लोन योजना के तहत आवेदन किया था। आवेदक लोहे के शटर बनाने का कार्य करता है, जीएसटी के तहत फर्म पंजीकृत हैं। बैंक को सारे दस्तावेज देने के बाद भी भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया। बैंक प्रबंधक ने सरकार द्वारा संचालित मुद्रा लोन योजना के तहत ऋण मुहैया नहीं कराया।
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