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गरीबों के हक पर कर्मचारियों ने डाला डाका
Updated Sat, 08 Dec 2018 11:33 PM IST
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मैनपुरी। भ्रष्टाचार के मामले में इस बार जिला टॉप पर रहा। हर रोज सरकारी विभागों में एक न एक मामले सामने आते रहे। अफसरों की लचर कार्रवाई से भ्रष्टाचारियों को शह भी मिलती रही। विभागों के कर्मचारियों ने गरीबों के हक पर डाका डालकर अपनी जेबें भरीं।
राजस्व विभाग से भ्रष्टाचार की शुरुआत हुई थी। सरकारी भूमि को जहां एक ओर सरकार खाली कराने पर जोर दे रही है, वहीं दूसरी ओर खुद विभागीय कर्मचारियों ने सरकारी भूमि का फर्जीवाड़ा कर डाला। भू-माफिया से साठगांठ कर क्षेत्रीय लेखपालों ने सैकड़ों नहीं, बल्कि हजारों बीघा कृषि योग्य भूमि फर्जी तरीके से लोगों के नाम दर्ज कर दी गई है। शिकायत पर मामला खुला तो खुद लेखपाल ही दोषी पाए गए।
इसके अलावा कुरावली तहसील में तहसीलदार के फर्जी हस्ताक्षर कर एक लेखपाल ने 30 पत्रावलियों की दाखिल खारिज करा दी। यहां भी एसडीएम ने संदेह के आधार पर जांच कराई तो हस्ताक्षर फर्जी निकले। तहसीलदार ने लेखपाल के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया, जिसकी जांच चल रही है। इसके अलावा राशन घोटाला, शौचालय धनराशि घोटाला, पुष्टाहार घोटाला व प्रधानमंत्री आवास घोटालों में भी करोड़ों का खेल हुआ।
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केस-एक
तीन माह पूर्व भोगांव के गांव अहिरवा में एक बड़ा घोटाला सामने आया। इसमें एक हजार बीघा सरकारी भूमि का लेखपालों ने रुपये लेकर फर्जी बैनामा कर दिया। मामला सामने आया तो पांच लेखपालों सहित 55 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई। पुलिस दो लेखपालों को जेल भेज चुकी है।
केस-दो
शौचालय निर्माण में भी कई घोटाले सामने आए। कुरावली के गांव फतेहजंगपुर में तो घोटाले के चलते पुलिस ने महिला ग्राम प्रधान को गिरफ्तार कर जेल तक भेज दिया, वहीं पुलिस सचिव की तलाश में जुटी है। इसके अलावा अन्य कई ग्राम पंचायतों में घोटाले पाए जाने पर एफआईआर कराई गई।
केस-तीन
लेखपालों के कारनामे भी इस साल खूब चर्चा में रहे। जमीन के अभिलेखों में हेराफेरी करने व अन्य गलत कार्य किए जाने के कई मामले चर्चा में रहे। हाल ही में किशनी में रिश्वत लेते एक लेखपाल का वीडियो वायरल हुआ तो, वहीं करहल क्षेत्र के लेखपाल द्वारा भी रुपये मांगने का ऑडियो लोगों के बीच चर्चा का विषय बना रहा। किशनी के लेखपाल को एसडीएम ने निलंबित भी कर दिया।
केस चार
डूडा के कारनामे से तो हर कोई वाकिफ है। इसमें कर्मचारियों द्वारा प्रधानमंत्री आवास की किस्त के नाम पर जमकर वसूली की गई। इसके कई ऑडियो व वीडियो भी वायरल हुए। इस मामले में अपर जिलाधिकारी जांच कर रहे हैं, अब तक इसमें कोई कार्रवाई नहीं हो सकी।
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राजस्व विभाग से भ्रष्टाचार की शुरुआत हुई थी। सरकारी भूमि को जहां एक ओर सरकार खाली कराने पर जोर दे रही है, वहीं दूसरी ओर खुद विभागीय कर्मचारियों ने सरकारी भूमि का फर्जीवाड़ा कर डाला। भू-माफिया से साठगांठ कर क्षेत्रीय लेखपालों ने सैकड़ों नहीं, बल्कि हजारों बीघा कृषि योग्य भूमि फर्जी तरीके से लोगों के नाम दर्ज कर दी गई है। शिकायत पर मामला खुला तो खुद लेखपाल ही दोषी पाए गए।
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इसके अलावा कुरावली तहसील में तहसीलदार के फर्जी हस्ताक्षर कर एक लेखपाल ने 30 पत्रावलियों की दाखिल खारिज करा दी। यहां भी एसडीएम ने संदेह के आधार पर जांच कराई तो हस्ताक्षर फर्जी निकले। तहसीलदार ने लेखपाल के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया, जिसकी जांच चल रही है। इसके अलावा राशन घोटाला, शौचालय धनराशि घोटाला, पुष्टाहार घोटाला व प्रधानमंत्री आवास घोटालों में भी करोड़ों का खेल हुआ।
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केस-एक
तीन माह पूर्व भोगांव के गांव अहिरवा में एक बड़ा घोटाला सामने आया। इसमें एक हजार बीघा सरकारी भूमि का लेखपालों ने रुपये लेकर फर्जी बैनामा कर दिया। मामला सामने आया तो पांच लेखपालों सहित 55 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई। पुलिस दो लेखपालों को जेल भेज चुकी है।
केस-दो
शौचालय निर्माण में भी कई घोटाले सामने आए। कुरावली के गांव फतेहजंगपुर में तो घोटाले के चलते पुलिस ने महिला ग्राम प्रधान को गिरफ्तार कर जेल तक भेज दिया, वहीं पुलिस सचिव की तलाश में जुटी है। इसके अलावा अन्य कई ग्राम पंचायतों में घोटाले पाए जाने पर एफआईआर कराई गई।
केस-तीन
लेखपालों के कारनामे भी इस साल खूब चर्चा में रहे। जमीन के अभिलेखों में हेराफेरी करने व अन्य गलत कार्य किए जाने के कई मामले चर्चा में रहे। हाल ही में किशनी में रिश्वत लेते एक लेखपाल का वीडियो वायरल हुआ तो, वहीं करहल क्षेत्र के लेखपाल द्वारा भी रुपये मांगने का ऑडियो लोगों के बीच चर्चा का विषय बना रहा। किशनी के लेखपाल को एसडीएम ने निलंबित भी कर दिया।
केस चार
डूडा के कारनामे से तो हर कोई वाकिफ है। इसमें कर्मचारियों द्वारा प्रधानमंत्री आवास की किस्त के नाम पर जमकर वसूली की गई। इसके कई ऑडियो व वीडियो भी वायरल हुए। इस मामले में अपर जिलाधिकारी जांच कर रहे हैं, अब तक इसमें कोई कार्रवाई नहीं हो सकी।