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100 करोड़ खर्च फिर भी शौचालय अधूरे
Updated Sun, 16 Sep 2018 11:05 PM IST
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कासगंज/पटियाली/सहावर। जिला पंचायत राज विभाग का दावा है कि जिले में शौचालय निर्माण का लक्ष्य पूरा हो गया है। दो दिन बाद जिला ओडीएफ घोषित हो जाएगा, लेकिन धरातल पर शौचालयों की हकीकत कुछ और ही है। करीब 100 करोड़ रुपये शौचालयों के निर्माण पर खर्च होने के बावजूद कहीं निर्माण अधूरे हैं, तो कहीं शौचालय बंद पड़े हैं।
एक लाख, 93 हजार 524 शौचालय बनाने का लक्ष्य पूरा होने का दावा है। निर्माण कार्य वर्ष 2012 से चल रहा है। जिले में शौचालयों के निर्माण कार्य में तमाम अनियमितताएं सामने आईं हैं। पटियाली के सनौड़ीखास गांव में कई शौचालय अपूर्ण मिले, एक पर ताला लटका मिला। कई में तो लोगों ने कंडे आदि सामान भर रखा है, तो कई का इस्तेमाल ही नहीं हो रहा। नतीजतन लोग खुले में शौच जाते हैं।
सोरों के लाले नगला में भी तमाम शौचालय अधूरे हैं, तो कई में दरवाजे नहीं हैं। सहावर के खोजपुर गांव में ग्राम पंचायत सचिव ने अनियमितताएं बरतीं, जिससे समय से शौचालय नहीं बन पाए। ऐसी ही अनियमितताएं तमाम ग्राम पंचायतों में हुईं। सहावर के गनेशपुर में भी लोग शौचालयों का इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं।
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-मैंने शौचालय बनवाने को आवेदन किया था। स्वीकृत कराने के लिए काफी कोशिश की, लेकिन नहीं हुआ। ग्राम प्रधान ने भी सहयोग नहीं किया।
मनोज कुमार, नगला लाले
-स्वच्छता मिशन कहां चल रहा है, कुछ पता नहीं। गांव में न तो शौचालय ही बन पाए हैं और न कहीं सफाई दिखती है। प्रधान भी लापरवाह है।
हरिओम गुप्ता, सनौड़ी।
-शौचालय निर्माण को ग्राम प्रधान से कई बार कहा, लेकिन आज तक धन उपलब्ध नहीं कराया है। इससे काफी दिक्कतें रहती हैं।
आशीष तिवारी, ग्राम बीनपुर, पटियाली।
क्या कहते हैं आंकड़े-
-जिले में बनाए गए शौचालय- 193524
-जिले के स्वच्छाग्रहियों की संख्या- 434
-निर्माण में लगे राजमिस्त्री- 1864
- कुल टिगरिंग टीमों की संख्या- 34
-स्वयं के संसाधन से निर्मित शौचालय- 1548
ओडीएफ के बाद की जाएगी पड़ताल
स्वच्छ भारत मिशन के जिला समन्वयक विजय शर्मा का कहना है कि विभाग से लक्ष्य के मुताबिक शौचालयों के निर्माण को पूरा बजट आवंटित हो चुका है। 80 फीसदी शौचालय बन चुके हैं। जिला ओडीएफ घोषित होने के बाद 90 दिन में सभी शौचालयों का सत्यापन किया जाएगा। जो भी अधूरे शौचालय हैं, उन्हें पूर्ण कराया जाएगा। लापरवाह लोग चिह्नित किए जाएंगे।
ग्राम प्रधान को हो चुकी है जेल
म्यांसुर गांव के शौचालय निर्माण में भ्रष्टाचार की शिकायत पर डीएम के निर्देश पर ग्राम प्रधान रामलाल नागर के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई और उन्हें जेल भेजा गया। कई पंचायत सचिवों पर गाज भी गिर चुकी है।
एक लाख, 93 हजार 524 शौचालय बनाने का लक्ष्य पूरा होने का दावा है। निर्माण कार्य वर्ष 2012 से चल रहा है। जिले में शौचालयों के निर्माण कार्य में तमाम अनियमितताएं सामने आईं हैं। पटियाली के सनौड़ीखास गांव में कई शौचालय अपूर्ण मिले, एक पर ताला लटका मिला। कई में तो लोगों ने कंडे आदि सामान भर रखा है, तो कई का इस्तेमाल ही नहीं हो रहा। नतीजतन लोग खुले में शौच जाते हैं।
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सोरों के लाले नगला में भी तमाम शौचालय अधूरे हैं, तो कई में दरवाजे नहीं हैं। सहावर के खोजपुर गांव में ग्राम पंचायत सचिव ने अनियमितताएं बरतीं, जिससे समय से शौचालय नहीं बन पाए। ऐसी ही अनियमितताएं तमाम ग्राम पंचायतों में हुईं। सहावर के गनेशपुर में भी लोग शौचालयों का इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं।
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-मैंने शौचालय बनवाने को आवेदन किया था। स्वीकृत कराने के लिए काफी कोशिश की, लेकिन नहीं हुआ। ग्राम प्रधान ने भी सहयोग नहीं किया।
मनोज कुमार, नगला लाले
-स्वच्छता मिशन कहां चल रहा है, कुछ पता नहीं। गांव में न तो शौचालय ही बन पाए हैं और न कहीं सफाई दिखती है। प्रधान भी लापरवाह है।
हरिओम गुप्ता, सनौड़ी।
-शौचालय निर्माण को ग्राम प्रधान से कई बार कहा, लेकिन आज तक धन उपलब्ध नहीं कराया है। इससे काफी दिक्कतें रहती हैं।
आशीष तिवारी, ग्राम बीनपुर, पटियाली।
क्या कहते हैं आंकड़े-
-जिले में बनाए गए शौचालय- 193524
-जिले के स्वच्छाग्रहियों की संख्या- 434
-निर्माण में लगे राजमिस्त्री- 1864
- कुल टिगरिंग टीमों की संख्या- 34
-स्वयं के संसाधन से निर्मित शौचालय- 1548
ओडीएफ के बाद की जाएगी पड़ताल
स्वच्छ भारत मिशन के जिला समन्वयक विजय शर्मा का कहना है कि विभाग से लक्ष्य के मुताबिक शौचालयों के निर्माण को पूरा बजट आवंटित हो चुका है। 80 फीसदी शौचालय बन चुके हैं। जिला ओडीएफ घोषित होने के बाद 90 दिन में सभी शौचालयों का सत्यापन किया जाएगा। जो भी अधूरे शौचालय हैं, उन्हें पूर्ण कराया जाएगा। लापरवाह लोग चिह्नित किए जाएंगे।
ग्राम प्रधान को हो चुकी है जेल
म्यांसुर गांव के शौचालय निर्माण में भ्रष्टाचार की शिकायत पर डीएम के निर्देश पर ग्राम प्रधान रामलाल नागर के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई और उन्हें जेल भेजा गया। कई पंचायत सचिवों पर गाज भी गिर चुकी है।