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एमडीएम घोटाले का जिन्न फिर आया बाहर
Updated Sun, 01 Apr 2018 11:08 PM IST
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घोटाला
- फोटो : amar ujala
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मारहरा।
सहायता प्राप्त इंटर कॉलेज में एमडीएम के चेक भुगतान का जिन्न पांच वर्ष बाद फिर निकला। चेक भुगतान का मामला धारा 156/3 के तहत पूर्व प्राचार्य के नाम नगला ककरेट के बलवीर ने दर्ज कराया है हालांकि इस प्रकरण में डीआईओएस और एमडीएम कोर्डीनेटर ने प्रधानाचार्य का हस्तक्षेप मानने से इनकार करते हुए उनको क्लीन चिट दे दी थी।
मामला वर्ष 2013 का आरएबी इंटर कॉलेज का है, जिसमें एमडीएम का संयुक्त खाता तत्कालीन प्रधानाचार्य डॉ. आरएस सागर, हरी सिंह का था और एमडीएम के प्रभारी के रूप में वर्तमान प्रधानाचार्य प्रेमपाल सिंह थे, जो एमडीएम की सारी व्यवस्था देखते थे।
एमडीएम की धनराशि के लिए संयुक्त रूप से हरीसिंह एवं तत्कालीन प्रधानाचार्य ने एक लाख 40 हजार के चेक पर हस्ताक्षर किए, लेकिन चेक भुगतान से पूर्व हरीसिंह की मौत हो गई थी। उनकी मौत के बाद चेक का भुगतान प्रधानाचार्य प्रेमपाल सिंह ने एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के नाम काटकर आहरण कर लिया था। जिसकी शिकायत कुछ लोगों ने विभाग से की।
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जांच डीआईओएस और जिला कार्डीनेटर एमडीएम ने की जिसमें प्रेमपाल सिंह वर्तमान प्रधानाचार्य के खर्च की जाने वाली धनराशि के सदुपयोग की बात सामने आई इस पर दोनों विभागाध्यक्षों को क्लीन चिट दे दी। उसके बाद भी नगला ककरेट के निवासी बलवीर सिंह ने धारा 156/3 के तहत रिपोर्ट दर्ज कराई है।
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सहायता प्राप्त इंटर कॉलेज में एमडीएम के चेक भुगतान का जिन्न पांच वर्ष बाद फिर निकला। चेक भुगतान का मामला धारा 156/3 के तहत पूर्व प्राचार्य के नाम नगला ककरेट के बलवीर ने दर्ज कराया है हालांकि इस प्रकरण में डीआईओएस और एमडीएम कोर्डीनेटर ने प्रधानाचार्य का हस्तक्षेप मानने से इनकार करते हुए उनको क्लीन चिट दे दी थी।
मामला वर्ष 2013 का आरएबी इंटर कॉलेज का है, जिसमें एमडीएम का संयुक्त खाता तत्कालीन प्रधानाचार्य डॉ. आरएस सागर, हरी सिंह का था और एमडीएम के प्रभारी के रूप में वर्तमान प्रधानाचार्य प्रेमपाल सिंह थे, जो एमडीएम की सारी व्यवस्था देखते थे।
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एमडीएम की धनराशि के लिए संयुक्त रूप से हरीसिंह एवं तत्कालीन प्रधानाचार्य ने एक लाख 40 हजार के चेक पर हस्ताक्षर किए, लेकिन चेक भुगतान से पूर्व हरीसिंह की मौत हो गई थी। उनकी मौत के बाद चेक का भुगतान प्रधानाचार्य प्रेमपाल सिंह ने एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के नाम काटकर आहरण कर लिया था। जिसकी शिकायत कुछ लोगों ने विभाग से की।
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जांच डीआईओएस और जिला कार्डीनेटर एमडीएम ने की जिसमें प्रेमपाल सिंह वर्तमान प्रधानाचार्य के खर्च की जाने वाली धनराशि के सदुपयोग की बात सामने आई इस पर दोनों विभागाध्यक्षों को क्लीन चिट दे दी। उसके बाद भी नगला ककरेट के निवासी बलवीर सिंह ने धारा 156/3 के तहत रिपोर्ट दर्ज कराई है।