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यूजीसी खर्च करेगा एक हजार करोड़
Updated Sat, 10 Mar 2018 11:16 PM IST
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केंद्रीय विश्वविद्यालय में शिक्षा की गुणवत्ता सुधार को यूजीसी खर्च करेगा एक हजार करोड़
- फोटो : अमर उजाला
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एटा। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) देश के विश्वविद्यालयों की शिक्षा गुणवत्ता में सुधार करने की तैयारी कर रहा है। देश के हर उच्च शिक्षा संस्थान में पारदर्शी व्यवस्था के जरिए बदलावों को लेकर कवायद शुरू हो चुकी है। शिक्षा क्षेत्र में पिछड़ रहे ग्राउंड रेसियो से लेकर विश्वविद्यालयों को प्रथम पायदान पर लाने का जिम्मा यूजीसी को सौंपा गया है।
इसके लिए एक हजार करोड़ रुपये का बजट तय किया है, ताकि उच्च शिक्षा क्षेत्र में नए आयाम स्थापित किए जा सकें। यह बातें शनिवार को अपने पैतृक गांव नगला चांद पहुंचे यूजीसी के चेयरमैन धीरेंद्र पाल सिंह ने अमर उजाला से साझा कीं।
उन्होंने कहा कि देश में उच्च शिक्षा क्षेत्र में गुणवत्ता सुधार को चुनौती मानकर काम किया जा रहा है। 25.2 फीसदी पर अटके उच्च शिक्षा के ग्राउंड रेसियो को सन 2020 तक 30 प्रतिशत पर लेकर आना है। साथ ही विश्व के टॉप 100 विवि में देश के विश्वविद्यालयों को शामिल किए जाने की तैयारी है। इसके लिए देश में 20 बेहतर विश्वविद्यालयों का चयन किया जाएगा।
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इसे लेकर यूजीसी ने देश भर के विवि से आवेदन मांगे हैं। इनमें से पांच केन्द्रीय और पांच राज्य विवि के साथ-साथ दस निजी विवि शामिल किए जाएंगे। वहीं गुणवत्ता सुधार के लिए सरकार यूजीसी के जरिए पांच केंद्रीय विश्वविद्यालयों पर सरकार एक हजार करोड़ रुपये खर्च करेगी।
विश्व के टॉप 200 में शामिल नहीं एक भी विवि
उन्होंने कहा कि भारत युवाओं का देश है और प्रधानमंत्री मोदी चाहते हैं कि देश के युवा विश्व के लिए तैयार हों। इसके लिए जरूरी है कि देश के विश्वविद्यालयों का हाल सुधरे। उन्होंने बताया कि अब तक देश का एक भी विवि विश्व के प्रमुख 200 विश्वविद्यालयों की सूची में शामिल नहीं हो पाया है। इसको सुधारने के प्रयास किए जा रहे हैं। प्रत्येक विवि से संसाधनों की कमी पूरे करने के लिए कहा जा रहा है। हालात को सुधारने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों के साथ विवि को भी निजी तौर पर भी रुचि लेनी होगी।
आंबेडकर विवि की दुर्दशा सुधारने के भी प्रयास
आगरा के भीमराव आंबेडकर विवि की दुर्दशा को लेकर यूजीसी सुधारने के लिए प्रयास हो रहे हैं। तमाम व्यवस्थाओं में बदलाव हुआ है। आंबेडकर विवि जैसे कई विश्वविद्यालयों में आवश्यक परिवर्तन के साथ नए शिक्षा संस्थानों की स्थापना पर जोर दिया जा रहा है।
भारत को सशक्त बनाने में योगदान दें युवा
यूजीसी के चेयरमैन ने कहा कि बदलते दौर में गांव, खलिहान, खेत, मजदूरों के साथ भारत बदल रहा है। सशक्त, समर्थ और विकसित भारत प्रगति की ओर बढ़ रहा है। इस कड़ी में युवाओं के अहम योगदान की जरूरत है। प्रतिभा को सिर्फ मौके की जरूरत होती है। शिक्षा एक ऐसा शस्त्र है, जिसे कहीं भी इस्तेमाल किया जा सकता है। अच्छे संस्कार और ईमानदारी से युवा कार्य करें और भारत को सशक्त बनाने में भूमिका निभाएं।
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इसके लिए एक हजार करोड़ रुपये का बजट तय किया है, ताकि उच्च शिक्षा क्षेत्र में नए आयाम स्थापित किए जा सकें। यह बातें शनिवार को अपने पैतृक गांव नगला चांद पहुंचे यूजीसी के चेयरमैन धीरेंद्र पाल सिंह ने अमर उजाला से साझा कीं।
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उन्होंने कहा कि देश में उच्च शिक्षा क्षेत्र में गुणवत्ता सुधार को चुनौती मानकर काम किया जा रहा है। 25.2 फीसदी पर अटके उच्च शिक्षा के ग्राउंड रेसियो को सन 2020 तक 30 प्रतिशत पर लेकर आना है। साथ ही विश्व के टॉप 100 विवि में देश के विश्वविद्यालयों को शामिल किए जाने की तैयारी है। इसके लिए देश में 20 बेहतर विश्वविद्यालयों का चयन किया जाएगा।
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इसे लेकर यूजीसी ने देश भर के विवि से आवेदन मांगे हैं। इनमें से पांच केन्द्रीय और पांच राज्य विवि के साथ-साथ दस निजी विवि शामिल किए जाएंगे। वहीं गुणवत्ता सुधार के लिए सरकार यूजीसी के जरिए पांच केंद्रीय विश्वविद्यालयों पर सरकार एक हजार करोड़ रुपये खर्च करेगी।
विश्व के टॉप 200 में शामिल नहीं एक भी विवि
उन्होंने कहा कि भारत युवाओं का देश है और प्रधानमंत्री मोदी चाहते हैं कि देश के युवा विश्व के लिए तैयार हों। इसके लिए जरूरी है कि देश के विश्वविद्यालयों का हाल सुधरे। उन्होंने बताया कि अब तक देश का एक भी विवि विश्व के प्रमुख 200 विश्वविद्यालयों की सूची में शामिल नहीं हो पाया है। इसको सुधारने के प्रयास किए जा रहे हैं। प्रत्येक विवि से संसाधनों की कमी पूरे करने के लिए कहा जा रहा है। हालात को सुधारने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों के साथ विवि को भी निजी तौर पर भी रुचि लेनी होगी।
आंबेडकर विवि की दुर्दशा सुधारने के भी प्रयास
आगरा के भीमराव आंबेडकर विवि की दुर्दशा को लेकर यूजीसी सुधारने के लिए प्रयास हो रहे हैं। तमाम व्यवस्थाओं में बदलाव हुआ है। आंबेडकर विवि जैसे कई विश्वविद्यालयों में आवश्यक परिवर्तन के साथ नए शिक्षा संस्थानों की स्थापना पर जोर दिया जा रहा है।
भारत को सशक्त बनाने में योगदान दें युवा
यूजीसी के चेयरमैन ने कहा कि बदलते दौर में गांव, खलिहान, खेत, मजदूरों के साथ भारत बदल रहा है। सशक्त, समर्थ और विकसित भारत प्रगति की ओर बढ़ रहा है। इस कड़ी में युवाओं के अहम योगदान की जरूरत है। प्रतिभा को सिर्फ मौके की जरूरत होती है। शिक्षा एक ऐसा शस्त्र है, जिसे कहीं भी इस्तेमाल किया जा सकता है। अच्छे संस्कार और ईमानदारी से युवा कार्य करें और भारत को सशक्त बनाने में भूमिका निभाएं।