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कहीं निरक्षर, तो कहीं पांचवीं पास सुनेंगे समस्या
Updated Sat, 02 Dec 2017 11:52 PM IST
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एटा। जिले की चार नगर पालिकाओं में नगर की सरकार चुनी जा चुकी है। नगर के विकास के लिए अध्यक्षों के हाथ कमान है, तो गली मोहल्लों में सभासद तैयार हैं। मगर जिले में कई सभासद निरक्षर हैं, तो अधिकांश पांचवीं तक पढ़े हैं। आलम यह है कि एटा नगर पालिका परिषद की नवनिर्वाचित अध्यक्ष भी पांचवीं पास हैं, जबकि अलीगंज, जलेसर और मारहरा के नए अध्यक्ष ग्रेजुएट हैं।
एक ओर देश में शिक्षा पर जोर दिया जा रहा है, तो नेता ही शिक्षा से कोसों दूर हैं। जिले मेें चुने गए नए नगर पालिका अध्यक्ष और सभासदों के शैक्षिक रिकार्ड पर गौर करेंगे तो विकास की तस्वीर साफ हो जाएगी।
एटा नगर पालिका में चार सभासद जहां पांचवीं तक पढ़े हैं, तो वहीं दो आठवीं पास हैं। सबसे ज्यादा सात सभासद केवल हाईस्कूल तक शिक्षित हैं। पांच सभासदों ने इंटर, तो छह सभासद केवल ग्रेजुएट हैं। इसके साथ ही एक सभासद ने डिप्लोमा कोर्स किया हुआ है। नगर पालिका अलीगंज में नए अध्यक्ष बृजेश गुप्ता राजू स्नातक हैं। वहीं उनकी सभासद टीम मेें एक निरक्षर, आठ पांचवी पास, दो आठवीं पास, दो हाईस्कूल, पांच इंटर, चार स्नाक और तीन परास्नातक उत्तीर्ण सभासद हैं।
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जलेसर नगर पालिका में चेयरमैन विकास मित्तल भी ग्रेजुएट हैं, जबकि पालिका मेें सबसे ज्यादा सात सभासद निरक्षर हैं। इसके साथ ही दो ने पांचवी पास की है, जबकि चार आठवीं पास है। पालिका में हाईस्कूल एक, इंटर चार, स्नातक दो और परास्नातक उत्तीर्ण पांच सभासद हैं।
मारहरा नगर पालिका का हाल भी कुछ ऐसा ही है। यहां चेयरमैन वहीद महमूद जुबैरी स्नातक हैं, मगर पालिका में सबसे ज्यादा नौ सभासद निरक्षर हैं। छह सभासद पांचवीं पास कर चुके हैं। इसके साथ ही तीन सभासद आठवीं पास, एक हाईस्कूल, तीन इंटर और तीन स्नातक उत्तीर्ण हैं।
अब सवाल है कि पढ़े लिखे समाज में निरक्षर और पांचवीं पास जैसे सभासद आखिर कैसे जनता की समस्याओं को सुनकर निराकरण कर पाएंगे?
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एक ओर देश में शिक्षा पर जोर दिया जा रहा है, तो नेता ही शिक्षा से कोसों दूर हैं। जिले मेें चुने गए नए नगर पालिका अध्यक्ष और सभासदों के शैक्षिक रिकार्ड पर गौर करेंगे तो विकास की तस्वीर साफ हो जाएगी।
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एटा नगर पालिका में चार सभासद जहां पांचवीं तक पढ़े हैं, तो वहीं दो आठवीं पास हैं। सबसे ज्यादा सात सभासद केवल हाईस्कूल तक शिक्षित हैं। पांच सभासदों ने इंटर, तो छह सभासद केवल ग्रेजुएट हैं। इसके साथ ही एक सभासद ने डिप्लोमा कोर्स किया हुआ है। नगर पालिका अलीगंज में नए अध्यक्ष बृजेश गुप्ता राजू स्नातक हैं। वहीं उनकी सभासद टीम मेें एक निरक्षर, आठ पांचवी पास, दो आठवीं पास, दो हाईस्कूल, पांच इंटर, चार स्नाक और तीन परास्नातक उत्तीर्ण सभासद हैं।
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जलेसर नगर पालिका में चेयरमैन विकास मित्तल भी ग्रेजुएट हैं, जबकि पालिका मेें सबसे ज्यादा सात सभासद निरक्षर हैं। इसके साथ ही दो ने पांचवी पास की है, जबकि चार आठवीं पास है। पालिका में हाईस्कूल एक, इंटर चार, स्नातक दो और परास्नातक उत्तीर्ण पांच सभासद हैं।
मारहरा नगर पालिका का हाल भी कुछ ऐसा ही है। यहां चेयरमैन वहीद महमूद जुबैरी स्नातक हैं, मगर पालिका में सबसे ज्यादा नौ सभासद निरक्षर हैं। छह सभासद पांचवीं पास कर चुके हैं। इसके साथ ही तीन सभासद आठवीं पास, एक हाईस्कूल, तीन इंटर और तीन स्नातक उत्तीर्ण हैं।
अब सवाल है कि पढ़े लिखे समाज में निरक्षर और पांचवीं पास जैसे सभासद आखिर कैसे जनता की समस्याओं को सुनकर निराकरण कर पाएंगे?