{"_id":"59b02ce54f1c1bfe7f8b4662","slug":"201504718053-agra-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"मदरसा घोटाले की जांच में हो रही लीपापोती","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मदरसा घोटाले की जांच में हो रही लीपापोती
Updated Wed, 06 Sep 2017 11:31 PM IST
विज्ञापन
madrasa
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
एटा।
जिले में भूरे खां जनकल्याण शिक्षा समिति के संचालित मदरसेे में हुए घोटालों की पुष्टि होने के बाद प्रशासनिक अधिकारियों ने मामले मेें लीपापोती कर दी है। जांच में अभिलेख नहीं मिलने और मानक पूरे होने के बाद भी प्रशासन ने अब तक कोई कार्रवाई नहीं की है। मामले की जांच में डीएम को सौंपी गई जांच रिपोर्ट और जांच अधिकारी की रिपोर्ट के तथ्यों में हेरफेर किया गया है। तत्कालीन सीडीओ ने मदरसे को क्लीन चिट दी है, जबकि अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी को मदरसे में अनियमितताएं मिली।
जिले में भूरे खां जनकल्याण शिक्षा समिति के मदरसों में शिक्षकों, अनुदान राशि और छात्रवृत्ति वितरण में घोटाला सामने आया था। मई माह में तत्कालीन डीएम विजय किरन आनंद ने तत्कालीन सीडीओ प्रताप सिंह भदौरिया को जांच सौंपी थी। इसके बाद तत्कालीन जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी टीएन तिवारी ने मदरसे का निरीक्षण कर शिकायतों की जांच की। जांच में पाया गया कि मदरसों के लिए जमीन उपलब्ध होने के बाद भी निर्माण कार्य शुरू नहीं कराया गया है। साथ ही एक ही भवन में दो-दो मदरसे संचालित हो रहे हैं। इसके साथ ही मदरसे को छात्रवृत्ति के रूप में प्राप्त हुई धनराशि को मदरसे की मरम्मत में खर्च कर दिया गया। जांच में अधिकारियों ने जब खर्च के अभिलेख मांगे तो मदरसा संचालक अभिलेख नहीं दिखा सके।
मदरसा संचालक ने कह दिया कि मदरसे में तैनात लिपिक के सेवानिवृत्त हो जाने से अभिलेख नहीं दिखाए जा सकते हैं। बताया जाता है कि छात्रवृत्ति रूप में मिले लाखों रुपयों को मरम्मत के नाम पर गायब कर दिया गया। इसके साथ ही छह छात्रों को छात्रवृत्ति दी ही नहीं गई। अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी ने जांच रिपोर्ट में मदरसा संचालन समिति को लापरवाही का दोषी मानते हुए तत्कालीन सीडीओ प्रताप सिंह भदौरिया को रिपोर्ट सौंपी थी। इसके बाद सीडीओ ने डीएम को जांच रिपोर्ट सौंपते हुए मदरसा संचालक को क्लीन चिट दे दी। इसके बाद दोनों अधिकारियों का स्थनांतरण हो गया और जांच ठंडे बस्ते में चली गई।
विज्ञापन
विज्ञापन
जिले में भूरे खां जनकल्याण शिक्षा समिति के संचालित मदरसेे में हुए घोटालों की पुष्टि होने के बाद प्रशासनिक अधिकारियों ने मामले मेें लीपापोती कर दी है। जांच में अभिलेख नहीं मिलने और मानक पूरे होने के बाद भी प्रशासन ने अब तक कोई कार्रवाई नहीं की है। मामले की जांच में डीएम को सौंपी गई जांच रिपोर्ट और जांच अधिकारी की रिपोर्ट के तथ्यों में हेरफेर किया गया है। तत्कालीन सीडीओ ने मदरसे को क्लीन चिट दी है, जबकि अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी को मदरसे में अनियमितताएं मिली।
जिले में भूरे खां जनकल्याण शिक्षा समिति के मदरसों में शिक्षकों, अनुदान राशि और छात्रवृत्ति वितरण में घोटाला सामने आया था। मई माह में तत्कालीन डीएम विजय किरन आनंद ने तत्कालीन सीडीओ प्रताप सिंह भदौरिया को जांच सौंपी थी। इसके बाद तत्कालीन जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी टीएन तिवारी ने मदरसे का निरीक्षण कर शिकायतों की जांच की। जांच में पाया गया कि मदरसों के लिए जमीन उपलब्ध होने के बाद भी निर्माण कार्य शुरू नहीं कराया गया है। साथ ही एक ही भवन में दो-दो मदरसे संचालित हो रहे हैं। इसके साथ ही मदरसे को छात्रवृत्ति के रूप में प्राप्त हुई धनराशि को मदरसे की मरम्मत में खर्च कर दिया गया। जांच में अधिकारियों ने जब खर्च के अभिलेख मांगे तो मदरसा संचालक अभिलेख नहीं दिखा सके।
विज्ञापन
मदरसा संचालक ने कह दिया कि मदरसे में तैनात लिपिक के सेवानिवृत्त हो जाने से अभिलेख नहीं दिखाए जा सकते हैं। बताया जाता है कि छात्रवृत्ति रूप में मिले लाखों रुपयों को मरम्मत के नाम पर गायब कर दिया गया। इसके साथ ही छह छात्रों को छात्रवृत्ति दी ही नहीं गई। अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी ने जांच रिपोर्ट में मदरसा संचालन समिति को लापरवाही का दोषी मानते हुए तत्कालीन सीडीओ प्रताप सिंह भदौरिया को रिपोर्ट सौंपी थी। इसके बाद सीडीओ ने डीएम को जांच रिपोर्ट सौंपते हुए मदरसा संचालक को क्लीन चिट दे दी। इसके बाद दोनों अधिकारियों का स्थनांतरण हो गया और जांच ठंडे बस्ते में चली गई।
विज्ञापन