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हिस्ट्रीशीटर लिपिक को बचाने में जुटे अफसर
Updated Fri, 18 Aug 2017 11:18 PM IST
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एटा।
नगर पालिका में नौकरी कर रहे हिस्ट्रीशीटर लिपिक को पालिका अधिकारी बचाने में जुटे हैं। डीएम के आदेश पर कराई गई जांच में आरोप साबित होने के बाद भी अब तक ईओ ने कार्रवाई नहीं की है। इसे लेकर एडीएम प्रशासन ने नगर पालिका ईओ को नोटिस जारी किया है। उधर, कार्रवाई को लेकर बरती जा रही अनदेखी की शिकायत जिले के नोडल अफसर और मानवाधिकार आयोग के सचिव से की गई है।
नगर पालिका में माली से लिपिक बनाए गए निरंकार सिंह यादव के खिलाफ शिकायत की डीएम ने जांच कराई थी। मामले में एडीएम वित्त एवं राजस्व महेश चंद्र शर्मा ने जांच करते हुए डीएम को रिपोर्ट सौंपी। इसमें पाया गया कि लिपिक का चयन माली और दफ्तरी पद पर किया गया था, लेकिन जांच में दोनों पत्रावली नहीं मिलीं। साथ ही लिपिक ने इंटरमीडिएट की फर्जी मार्कशीट लगाकर नियुक्ति पाई थी। जांच में सामने आया कि लिपिक ने पालिका की दो रसीद बुकों से प्राप्त राजस्व को भी कोष मेें जमा नहीं किया। साथ ही लिपिक का नाम पुलिस विभाग के
रजिस्टर नंबर आठ में हिस्ट्रीशीटर में अंकित मिला। मामले में डीएम ने 22 जुलाई को अधिशासी अधिकारी नगर पालिका संतराम सरोज को 15 दिन में लिपिक के खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे लेकिन ईओ ने कोई कार्रवाई नहीं की। इसके बाद एडीएम प्रशासन ने ईओ को नोटिस जारी कर कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि उच्चाधिकारियों के आदेश की अवहेलना और उदासीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
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एडीएम प्रशासन ने ईओ से स्पष्टीकरण मांगते हुए उनके खिलाफ कार्रवाई करने की चेतावनी दी है। इसी क्रम में मामले को लेकर जिले के नोडल अधिकारी और राज्य मानवाधिकार आयोग के सचिव चंद्रकांत को भी शिकायत सौंपी गई है। सचिव ने डीएम को ईओ और लिपिक के खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
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नगर पालिका में नौकरी कर रहे हिस्ट्रीशीटर लिपिक को पालिका अधिकारी बचाने में जुटे हैं। डीएम के आदेश पर कराई गई जांच में आरोप साबित होने के बाद भी अब तक ईओ ने कार्रवाई नहीं की है। इसे लेकर एडीएम प्रशासन ने नगर पालिका ईओ को नोटिस जारी किया है। उधर, कार्रवाई को लेकर बरती जा रही अनदेखी की शिकायत जिले के नोडल अफसर और मानवाधिकार आयोग के सचिव से की गई है।
नगर पालिका में माली से लिपिक बनाए गए निरंकार सिंह यादव के खिलाफ शिकायत की डीएम ने जांच कराई थी। मामले में एडीएम वित्त एवं राजस्व महेश चंद्र शर्मा ने जांच करते हुए डीएम को रिपोर्ट सौंपी। इसमें पाया गया कि लिपिक का चयन माली और दफ्तरी पद पर किया गया था, लेकिन जांच में दोनों पत्रावली नहीं मिलीं। साथ ही लिपिक ने इंटरमीडिएट की फर्जी मार्कशीट लगाकर नियुक्ति पाई थी। जांच में सामने आया कि लिपिक ने पालिका की दो रसीद बुकों से प्राप्त राजस्व को भी कोष मेें जमा नहीं किया। साथ ही लिपिक का नाम पुलिस विभाग के
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रजिस्टर नंबर आठ में हिस्ट्रीशीटर में अंकित मिला। मामले में डीएम ने 22 जुलाई को अधिशासी अधिकारी नगर पालिका संतराम सरोज को 15 दिन में लिपिक के खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे लेकिन ईओ ने कोई कार्रवाई नहीं की। इसके बाद एडीएम प्रशासन ने ईओ को नोटिस जारी कर कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि उच्चाधिकारियों के आदेश की अवहेलना और उदासीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
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एडीएम प्रशासन ने ईओ से स्पष्टीकरण मांगते हुए उनके खिलाफ कार्रवाई करने की चेतावनी दी है। इसी क्रम में मामले को लेकर जिले के नोडल अधिकारी और राज्य मानवाधिकार आयोग के सचिव चंद्रकांत को भी शिकायत सौंपी गई है। सचिव ने डीएम को ईओ और लिपिक के खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।