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सामान उठाकर भागते नजर आए आवंटी
Updated Sun, 07 Oct 2018 11:34 PM IST
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एटा। अवैध निर्माण को ध्वस्त करने की कार्रवाई को लेकर रविवार सुबह दुकान आवंटियों में दहशत नजर आई। प्रशासन के बुल्डोजर को देख आवंटियों ने दुकानों से सामना हटाना शुरू कर दिया। इस दौरान दुकान आवंटियों ने प्रशासन की कार्रवाई का विरोध किया। उन्होंने सूचना दिए बिना दुकानों को तोडने का आरोप लगाया।
दरअसल, अवैध निर्माण को ध्वस्त करने के लिए कचहरी और जीटी रोड पर सुबह ही बुल्डोजर पहुंच गए थे। पूरे क्षेत्र को पुलिस ने बैरियर लगाकर सीज कर दिया था। पुलिस को देख आवंटी भांप गए कि निर्माण ध्वस्त किया जाना है। इस दौरान आवंटियों ने दुकानों से सामान को हटाने का काम शुरू कर दिया। कुछ आवंटियों को प्रशासन से समय तक देकर दुकान खाली कराईं।
इस दौरान दुकान आवंटी और राज्य महिला आयोग की पूर्व सदस्य अशोक पांडेय ने विरोध किया। उन्होंने दुकान के अंदर बैठकर धरना देने और कार्रवाई रोकने की कोशिश की, लेकिन प्रशासन के आगे उनकी एक नहीं चली। पुलिस बल को देख वे दुकान से बाहर आ गईं और निर्माण गिरा दिया गया। प्रशासन का दावा है कि सबको सुनने का मौका देने के बाद कार्रवाई की गई है।
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तत्कालीन अधिकारियों की मिलीभगत से सरकारी जमीन पर हुआ था कब्जा
सड़क किनारे दुकानों के निर्माण में सरकारी अधिकारियों की मिलीभगत से जमीन पर कब्जा किया गया था। सत्ता पक्ष के दबाव के चलते अधिकारी खुलेआम नियम और कानूनों की धज्जियां उड़ाकर निर्माण को शह देते रहे।
दुकानों के निर्माण में गुणवत्ता का भी नहीं रखा गया था ध्यान
दुकानों के निर्माण में गुणवत्ता को भी नकार दिया गया था। रविवार को ध्वस्तीकरण की कार्रवाई के दौरान दुकानें एक बार में गिर पड़ीं। बताया जाता है कि निर्माण के दौरान गुणवत्ता को लेकर भी शिकायत की गई थी, लेकिन अधिकारियों ने कोई गौर नहीं किया।
दरअसल, अवैध निर्माण को ध्वस्त करने के लिए कचहरी और जीटी रोड पर सुबह ही बुल्डोजर पहुंच गए थे। पूरे क्षेत्र को पुलिस ने बैरियर लगाकर सीज कर दिया था। पुलिस को देख आवंटी भांप गए कि निर्माण ध्वस्त किया जाना है। इस दौरान आवंटियों ने दुकानों से सामान को हटाने का काम शुरू कर दिया। कुछ आवंटियों को प्रशासन से समय तक देकर दुकान खाली कराईं।
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इस दौरान दुकान आवंटी और राज्य महिला आयोग की पूर्व सदस्य अशोक पांडेय ने विरोध किया। उन्होंने दुकान के अंदर बैठकर धरना देने और कार्रवाई रोकने की कोशिश की, लेकिन प्रशासन के आगे उनकी एक नहीं चली। पुलिस बल को देख वे दुकान से बाहर आ गईं और निर्माण गिरा दिया गया। प्रशासन का दावा है कि सबको सुनने का मौका देने के बाद कार्रवाई की गई है।
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तत्कालीन अधिकारियों की मिलीभगत से सरकारी जमीन पर हुआ था कब्जा
सड़क किनारे दुकानों के निर्माण में सरकारी अधिकारियों की मिलीभगत से जमीन पर कब्जा किया गया था। सत्ता पक्ष के दबाव के चलते अधिकारी खुलेआम नियम और कानूनों की धज्जियां उड़ाकर निर्माण को शह देते रहे।
दुकानों के निर्माण में गुणवत्ता का भी नहीं रखा गया था ध्यान
दुकानों के निर्माण में गुणवत्ता को भी नकार दिया गया था। रविवार को ध्वस्तीकरण की कार्रवाई के दौरान दुकानें एक बार में गिर पड़ीं। बताया जाता है कि निर्माण के दौरान गुणवत्ता को लेकर भी शिकायत की गई थी, लेकिन अधिकारियों ने कोई गौर नहीं किया।