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हज की सब्सिडी खत्म होने का किसी ने किया स्वागत
Updated Tue, 16 Jan 2018 11:36 PM IST
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फिरोजाबाद। हज यात्रियों को मिलने वाली सब्सिडी खत्म कर दी है। हर साल एक लाख 75 हजार हज यात्रियों को सब्सिडी दी जाती थी। ये पैसा किराए में सब्सिडी के तौर पर दिया गया था। केंद्र सरकार ने नई हज नीति के तहत यह फैसला लिया है। इससे पहले मोदी सरकार ने मुस्लिम महिलाओं को बिना मेहरम के हज पर जाने की इजाजत दी थी। मुस्लिम समाज के लोगों ने सब्सिडी खत्म करने के फैसले को सही बताया तो कुछ ने केंद्र सरकार के फैसले को मुस्लिम विरोधी करार दिया है।
भारत सरकार का यह एक अच्छा एवं स्वागत योग्य निर्णय है। जो सब्सिडी हज यात्रियों को मिलती थी, आज तक किसी हज यात्री को सीधे उसके खाते में कभी नहीं आती। जो हज यात्रा करते हैं, उन यात्रियों को हज फर्ज अदा करने के लिए किसी सब्सिडी की जरूरत नहीं। क्योंकि वह धार्मिक कार्य है। हर धर्म का व्यक्ति अपने धार्मिक कार्य को अपनी पाक कमाई से करता है।
आलम मुस्तफा याकूबी, मुख्य प्रशिक्षक
उत्तर प्रदेश हज कमेटी
- 85 साल पुरानी यह नीति थी। जिसे केंद्र सरकार ने खत्म कर दिया है। जबकि सुप्रीम कोर्ट ने 2022 तक सब्सिड़ी धीरे-धीरे खत्म करने को कहा था। आम दिनों में हम जद्दा का टिकट लेते हैं, मुश्किल से 36 हजार का आता है। जबकि सब्सिड़ी से जाते हैं तो यही टिकट 73 हजार का हो जाता था। सब्सिड़ी खत्म कर दी, यह बहुत अच्छा हुआ। लेकिन हज कमेटी को खुला टेंडर करना चाहिए। जिससे किराया सस्ता हो जाएगा।
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अकरम मुस्तफा, जिला हज ट्रेनर
- कें द्र सरकार अल्पसंख्यक विरोधी फैसला कर रही है। जितनी भी आदेश हो रहे हैं, वो 2019 के लोकसभा चुनाव को देखकर हो रहे हैं। जब सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि यह फैसला 2022 तक लागू होना था। यह अभी क्यों कर दिया। तीन तलाक, लाउडस्पीकर पर रोक एवं गौकशी का मुद्दा उठाकर बीजेपी ने हिंदू मुस्लिम को बांटने का कार्य कर रही है। हम मुसलमान इस सब्सिडी का कोई फायदा नहीं लेना चाहते हैं। हम अपने ही पैसे से हज करना चाहेंगे।
हिकमत उल्ला खां, अध्यक्ष करबला कमेटी
- हम भी चाहते थे कि हज पर सब्सिडी खत्म हो। क्योंकि यह हज यात्रियों को नहीं मिल पाती थी। यह हाजियों के साथ छलावा था। केंद्र सरकार ने सब्सिडी खत्म करने का जो निर्णय लिया है, इस फैसले से भ्रष्टाचार रुकेगा। क्योंकि जहां सब्सिडी जारी होती थी, वहां भ्रष्टाचार था।
काजी शाहनियाज अली, शहर काजी
- इस फैसले को समझने की जरूरत है। हम लोगों की हमेशा मांग रही है कि सब्सिडी को बिल्कुल खत्म कर दिया जाए। जहां का ग्लोबल टेंडर खोला जाए। केबल एअर इंडिया को टेंडर न दिया जाए। किसी की दया से या किसी से उधार लेकर हज नहीं किया जाता है। हरेक मुसलमान पर हज फर्ज नहीं है। जो संपन्न हो, वही हज करे।
मुफ्ती कासिम रजी, जिला महासचिव जमीयत उल्लमाहे हिंद
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भारत सरकार का यह एक अच्छा एवं स्वागत योग्य निर्णय है। जो सब्सिडी हज यात्रियों को मिलती थी, आज तक किसी हज यात्री को सीधे उसके खाते में कभी नहीं आती। जो हज यात्रा करते हैं, उन यात्रियों को हज फर्ज अदा करने के लिए किसी सब्सिडी की जरूरत नहीं। क्योंकि वह धार्मिक कार्य है। हर धर्म का व्यक्ति अपने धार्मिक कार्य को अपनी पाक कमाई से करता है।
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आलम मुस्तफा याकूबी, मुख्य प्रशिक्षक
उत्तर प्रदेश हज कमेटी
- 85 साल पुरानी यह नीति थी। जिसे केंद्र सरकार ने खत्म कर दिया है। जबकि सुप्रीम कोर्ट ने 2022 तक सब्सिड़ी धीरे-धीरे खत्म करने को कहा था। आम दिनों में हम जद्दा का टिकट लेते हैं, मुश्किल से 36 हजार का आता है। जबकि सब्सिड़ी से जाते हैं तो यही टिकट 73 हजार का हो जाता था। सब्सिड़ी खत्म कर दी, यह बहुत अच्छा हुआ। लेकिन हज कमेटी को खुला टेंडर करना चाहिए। जिससे किराया सस्ता हो जाएगा।
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अकरम मुस्तफा, जिला हज ट्रेनर
- कें द्र सरकार अल्पसंख्यक विरोधी फैसला कर रही है। जितनी भी आदेश हो रहे हैं, वो 2019 के लोकसभा चुनाव को देखकर हो रहे हैं। जब सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि यह फैसला 2022 तक लागू होना था। यह अभी क्यों कर दिया। तीन तलाक, लाउडस्पीकर पर रोक एवं गौकशी का मुद्दा उठाकर बीजेपी ने हिंदू मुस्लिम को बांटने का कार्य कर रही है। हम मुसलमान इस सब्सिडी का कोई फायदा नहीं लेना चाहते हैं। हम अपने ही पैसे से हज करना चाहेंगे।
हिकमत उल्ला खां, अध्यक्ष करबला कमेटी
- हम भी चाहते थे कि हज पर सब्सिडी खत्म हो। क्योंकि यह हज यात्रियों को नहीं मिल पाती थी। यह हाजियों के साथ छलावा था। केंद्र सरकार ने सब्सिडी खत्म करने का जो निर्णय लिया है, इस फैसले से भ्रष्टाचार रुकेगा। क्योंकि जहां सब्सिडी जारी होती थी, वहां भ्रष्टाचार था।
काजी शाहनियाज अली, शहर काजी
- इस फैसले को समझने की जरूरत है। हम लोगों की हमेशा मांग रही है कि सब्सिडी को बिल्कुल खत्म कर दिया जाए। जहां का ग्लोबल टेंडर खोला जाए। केबल एअर इंडिया को टेंडर न दिया जाए। किसी की दया से या किसी से उधार लेकर हज नहीं किया जाता है। हरेक मुसलमान पर हज फर्ज नहीं है। जो संपन्न हो, वही हज करे।
मुफ्ती कासिम रजी, जिला महासचिव जमीयत उल्लमाहे हिंद