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बच्चे ने खेला ऑनलाइन गेम, खाते से निकले 13 हजार
Updated Sun, 03 Dec 2017 12:35 AM IST
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आगरा। बच्चों के हाथ में मोबाइल देकर उनसे बैंक खातों का ऑनलाइन और ई वॉलेट से पेमेंट करा रहे हैं तो फिर सावधान हो जाइए। उनकी जरा सी गलती भारी पड़ सकती है। खातेे से न सिर्फ रकम निकल जाएगी बल्कि आपकी निजी जानकारी साइबर अपराधियों तक पहुंच जाएगी।
एक परचून व्यापारी के साथ ऐसा ही हुआ। बच्चे ने ऑनलाइन गेम खेलने के लिए कंपनी की वेबसाइट पर जानकारी दे दी। एक महीने में व्यापारी के खाते से 13 हजार रुपये निकल गए। परचून व्यापारी सदर क्षेत्र के रहने वाले हैं, उनका बेटा कक्षा आठ में पढ़ता है। बेटा मोबाइल अच्छे से चला लेता है।
व्यापारी अपने व्यापार से संबंधित भुगतान ई वॉलेट और ऑनलाइन बैंक खाते से करते हैं। इस कारण बैंक खाते, एटीएम कार्ड और ई-वॉलेट की जानकारी मोबाइल में रखे हुए थे। इस बारे में बेटे को भी बता रखा था। बेटा ही मोबाइल चलाता था।
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एक दिन बेटे ने मोबाइल पर ऑनलाइन गेम का मैसेज देखा। जब उसने मैसेज को क्लिक किया तो एक वेबसाइट खुल गई। इसमें गेम खेलने के लिए 20 से 50 रुपये तक खाते में जमा करने को कहा गया। गेम इंटरनेशनल वेबसाइट पर था। इसलिए ओटीपी नहीं मांगा गया।
छात्र ने ई-वालेट से पेमेंट कर दिया। ई-वॉलेट में आटो डेबिट का विकल्प चालू कर दिया था। ई-वालेट बैंक खाते से आटो क्रेडिट विकल्प से जुड़ा था। इसके बाद व्यापारी का बेटा लगातार ऑनलाइन गेम खेल रहा था। एक महीने बाद जब व्यापारी बैंक गया तो उनके खाते से 13 हजार रुपये निकल चुके थे।
बैंक कर्मियों ने बताया कि ई-वॉलेट से पेमेंट किया गया है। मगर, रुपये किसके खाते में गए, यह जानकारी नहीं मिल सकी। इस पर उन्होंने साइबर क्राइम सेल की मदद ली। पुलिस ने बताया कि ई-वॉलेट कंपनी से जानकारी ली गई। कंपनी ने बताया कि वॉलेट से एक गेम वेबसाइट को रकम ट्रांसफर की गई है।
इससे लगातार ऑनलाइन गेम की वेबसाइट पर पेमेंट हो रहा था। आटो डेबिट और क्रेडिट विकल्प चालू होने की वजह से खाते से रुपये आने के बाद वेबसाइट को ट्रांसफर हो रहे थे। पुलिस की मदद से व्यापारी ने ई-वालेट बंद करा दिया है।
यह सावधानी बरतें
- इंटरनेशनल वेबसाइट और गेटवे पर एटीएम कार्ड और ई-वालेट की जानकारी शेयर करने से बचें।
- प्ले स्टोर पर किसी एप और गेम की खरीद करने से बचें। अगर, खरीदें तो जानकारी शेयर न करें।
- मोबाइल में कभी भी खाते और एटीएम कार्ड की जानकारी न रखें।
- ई-वालेट में आटो डेबिट और आटो क्रेडिट विकल्प को चालू न करें।
- बच्चों को खाते और ई-वालेट के पासवर्ड न बताएं और उनसे लेनदेन कराने से बचें।
- बच्चों को भुगतान करने वाले गेम न खेलने दें। गेम की वेबसाइट पर जानकारी शेयर न करें।
इंटरनेशनल ट्रांजेक्शन पर नहीं आता ओटीपी
एक्सपर्ट के मुताबिक, भारत में ऑनलाइन लेनदेन करने पर मोबाइल पर वन टाइम पासवर्ड (ओटीपी) आता है। मगर, इंटरनेशनल ट्रांजेक्शन किया जाता है तो ओटीपी मोबाइल पर नहीं आता है। एक बार जानकारी देने पर ही ट्रांजेक्शन हो जाता है।
एप की मदद से मोबाइल से लेते हैं जानकारी
साइबर सेल एक्सपर्ट के मुताबिक, कई एप को मोबाइल में डाउनलोड करने पर मोबाइल की निजी जानकारी साझा हो जाती है। साइबर अपराधी इन एप के माध्यम से निजी जानकारी ले लेते हैं। इसके अलावा ऑनलाइन ट्रांजेक्शन में कई बार मोबाइल से स्वत: ही खाते से संबंधित जानकारी ले ली जाती है, जिसके बारे में खाताधारक को काफी देर बाद पता चल जाता है।
20 से 600 रुपये तक निकले
व्यापारी के बेटे ने जिस गेम की वेबसाइट पर खाते की जानकारी दी थी, उसमें गेम खेलने के दौरान 20 से 600 रुपये तक ई-वालेट से लिए गए। बच्चे को इस बात की जानकारी नहीं हो सकी।
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एक परचून व्यापारी के साथ ऐसा ही हुआ। बच्चे ने ऑनलाइन गेम खेलने के लिए कंपनी की वेबसाइट पर जानकारी दे दी। एक महीने में व्यापारी के खाते से 13 हजार रुपये निकल गए। परचून व्यापारी सदर क्षेत्र के रहने वाले हैं, उनका बेटा कक्षा आठ में पढ़ता है। बेटा मोबाइल अच्छे से चला लेता है।
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व्यापारी अपने व्यापार से संबंधित भुगतान ई वॉलेट और ऑनलाइन बैंक खाते से करते हैं। इस कारण बैंक खाते, एटीएम कार्ड और ई-वॉलेट की जानकारी मोबाइल में रखे हुए थे। इस बारे में बेटे को भी बता रखा था। बेटा ही मोबाइल चलाता था।
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एक दिन बेटे ने मोबाइल पर ऑनलाइन गेम का मैसेज देखा। जब उसने मैसेज को क्लिक किया तो एक वेबसाइट खुल गई। इसमें गेम खेलने के लिए 20 से 50 रुपये तक खाते में जमा करने को कहा गया। गेम इंटरनेशनल वेबसाइट पर था। इसलिए ओटीपी नहीं मांगा गया।
छात्र ने ई-वालेट से पेमेंट कर दिया। ई-वॉलेट में आटो डेबिट का विकल्प चालू कर दिया था। ई-वालेट बैंक खाते से आटो क्रेडिट विकल्प से जुड़ा था। इसके बाद व्यापारी का बेटा लगातार ऑनलाइन गेम खेल रहा था। एक महीने बाद जब व्यापारी बैंक गया तो उनके खाते से 13 हजार रुपये निकल चुके थे।
बैंक कर्मियों ने बताया कि ई-वॉलेट से पेमेंट किया गया है। मगर, रुपये किसके खाते में गए, यह जानकारी नहीं मिल सकी। इस पर उन्होंने साइबर क्राइम सेल की मदद ली। पुलिस ने बताया कि ई-वॉलेट कंपनी से जानकारी ली गई। कंपनी ने बताया कि वॉलेट से एक गेम वेबसाइट को रकम ट्रांसफर की गई है।
इससे लगातार ऑनलाइन गेम की वेबसाइट पर पेमेंट हो रहा था। आटो डेबिट और क्रेडिट विकल्प चालू होने की वजह से खाते से रुपये आने के बाद वेबसाइट को ट्रांसफर हो रहे थे। पुलिस की मदद से व्यापारी ने ई-वालेट बंद करा दिया है।
यह सावधानी बरतें
- इंटरनेशनल वेबसाइट और गेटवे पर एटीएम कार्ड और ई-वालेट की जानकारी शेयर करने से बचें।
- प्ले स्टोर पर किसी एप और गेम की खरीद करने से बचें। अगर, खरीदें तो जानकारी शेयर न करें।
- मोबाइल में कभी भी खाते और एटीएम कार्ड की जानकारी न रखें।
- ई-वालेट में आटो डेबिट और आटो क्रेडिट विकल्प को चालू न करें।
- बच्चों को खाते और ई-वालेट के पासवर्ड न बताएं और उनसे लेनदेन कराने से बचें।
- बच्चों को भुगतान करने वाले गेम न खेलने दें। गेम की वेबसाइट पर जानकारी शेयर न करें।
इंटरनेशनल ट्रांजेक्शन पर नहीं आता ओटीपी
एक्सपर्ट के मुताबिक, भारत में ऑनलाइन लेनदेन करने पर मोबाइल पर वन टाइम पासवर्ड (ओटीपी) आता है। मगर, इंटरनेशनल ट्रांजेक्शन किया जाता है तो ओटीपी मोबाइल पर नहीं आता है। एक बार जानकारी देने पर ही ट्रांजेक्शन हो जाता है।
एप की मदद से मोबाइल से लेते हैं जानकारी
साइबर सेल एक्सपर्ट के मुताबिक, कई एप को मोबाइल में डाउनलोड करने पर मोबाइल की निजी जानकारी साझा हो जाती है। साइबर अपराधी इन एप के माध्यम से निजी जानकारी ले लेते हैं। इसके अलावा ऑनलाइन ट्रांजेक्शन में कई बार मोबाइल से स्वत: ही खाते से संबंधित जानकारी ले ली जाती है, जिसके बारे में खाताधारक को काफी देर बाद पता चल जाता है।
20 से 600 रुपये तक निकले
व्यापारी के बेटे ने जिस गेम की वेबसाइट पर खाते की जानकारी दी थी, उसमें गेम खेलने के दौरान 20 से 600 रुपये तक ई-वालेट से लिए गए। बच्चे को इस बात की जानकारी नहीं हो सकी।