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एक साल में हुए निर्माणों की होगी जांच
Updated Tue, 25 Jul 2017 09:58 PM IST
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आगरा। आगरा विकास प्राधिकरण में अधिकारियों के तबादले और नए अफसरों की नियुक्ति के बाद कई परिवर्तन किए जा रहे हैं। सबसे पहले प्रवर्तन विभाग को चुस्त दुरुस्त किया जा रहा है। इंजीनियरों को 2016 से हुए निर्माणों का ब्योरा वार्ड वाइज देना होगा।
आगरा विकास प्राधिकरण का प्रवर्तन विभाग अवैध निर्माणों को लेकर खासा बदनाम है। मंडलायुक्त के. राममोहन राव ने पिछले पांच वर्षों में हुए निर्माणों का ब्योरा तलब कर उनका सत्यापन करने के निर्देश दिए थे। कुछ दिन इस पर कार्यवाही के बाद मामला ठंडे बस्ते में चला गया। इसके बाद एडीए उपाध्यक्ष अजय यादव और सचिव राजकुमार का तबादला हो गया।
उसके बाद यहां वर्षों से जमे इंजीनियरों का तबादला कर दिया गया। अब नए अधिकारियों ने ज्वाइन करना शुरू कर दिया है। हाल में एडीए में आए कार्यकारी अधिकारी योगेंद्र कुमार को प्रवर्तन और संपत्ति विभाग का चार्ज दिया गया है। उन्होेंने निर्देश दिए हैं कि वर्ष 2016 से अब तक शहर में जितने निर्माण हुए हैं उनका वार्ड वाइज ब्योरा बनाया जाएगा।
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इसमें कुल कितने मानचित्र स्वीकृत हुए? मानचित्र स्वीकृत होने के बाद कितने निर्माण हुए? निर्माण मानचित्र के अनुरूप हुए हैं या मानचित्र का विचलन किया गया है, कितने नोटिस काटे गए? उन नोटिसों पर क्या कार्रवाई हुई? कितने अवैध निर्माण चिह्नित हुए? उनके खिलाफ क्या कार्रवाई हुई? कितनी सीलिंग और ध्वस्तीकरण किए? इन सवालों पर प्रवर्तन विभाग के इंजीनियरों को दो दिन के भीतर ब्योरा उपलब्ध कराना होगा।
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आगरा विकास प्राधिकरण का प्रवर्तन विभाग अवैध निर्माणों को लेकर खासा बदनाम है। मंडलायुक्त के. राममोहन राव ने पिछले पांच वर्षों में हुए निर्माणों का ब्योरा तलब कर उनका सत्यापन करने के निर्देश दिए थे। कुछ दिन इस पर कार्यवाही के बाद मामला ठंडे बस्ते में चला गया। इसके बाद एडीए उपाध्यक्ष अजय यादव और सचिव राजकुमार का तबादला हो गया।
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उसके बाद यहां वर्षों से जमे इंजीनियरों का तबादला कर दिया गया। अब नए अधिकारियों ने ज्वाइन करना शुरू कर दिया है। हाल में एडीए में आए कार्यकारी अधिकारी योगेंद्र कुमार को प्रवर्तन और संपत्ति विभाग का चार्ज दिया गया है। उन्होेंने निर्देश दिए हैं कि वर्ष 2016 से अब तक शहर में जितने निर्माण हुए हैं उनका वार्ड वाइज ब्योरा बनाया जाएगा।
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इसमें कुल कितने मानचित्र स्वीकृत हुए? मानचित्र स्वीकृत होने के बाद कितने निर्माण हुए? निर्माण मानचित्र के अनुरूप हुए हैं या मानचित्र का विचलन किया गया है, कितने नोटिस काटे गए? उन नोटिसों पर क्या कार्रवाई हुई? कितने अवैध निर्माण चिह्नित हुए? उनके खिलाफ क्या कार्रवाई हुई? कितनी सीलिंग और ध्वस्तीकरण किए? इन सवालों पर प्रवर्तन विभाग के इंजीनियरों को दो दिन के भीतर ब्योरा उपलब्ध कराना होगा।