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हिंसा में बंद आरोपी की पत्नी की सदमे से मौत
Updated Fri, 09 Feb 2018 10:44 PM IST
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हिंसा में बंद आरोपी की पत्नी की सदमे से मौत
- फोटो : अमर उजाला
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कासगंज।
सांप्रदायिक हिंसा एवं हत्या के मामले में जिला जेल में बंद आरोपी की पत्नी की गुरुवार को मौत हो गई। परिवारीजन मौत का कारण पति और बेटे के जेल चले जाने के कारण लगे सदमे को बता रहे हैं। परिवारीजनों ने अंतिम क्रिया के लिए पति और बेटे को जेल से लाए जाने की बात जिलाधिकारी के समक्ष रखी। मानवीय आधार पर जिलाधिकारी ने डेढ़ घंटे का पैरोल आरोपी पिता, पुत्र को दिया। दोनों ही आरोपियों ने जेल से आकर अंतिम क्रिया में हिस्सा लिया।
गौरतलब है कि हिंसा और हत्या के मामले में नसरूद्दीन पुत्र हनीफ एवं उसके पुत्र अकरम को 27 जनवरी को कोतवाली पुलिस ने गिरफ्तार करके जेल भेजा था। पिता-पुत्र के जेल जाने के बाद से नसरूद्दीन की 60 वर्षीय पत्नी हसीन बानो सदमे में थीं। गुरुवार की रात्रि को अलीगढ़ के मेडिकल कॉलेज में उन्होंने दम तोड़ दिया। उनके बेटे मुशर्रफ ने बताया कि गिरफ्तारी के बाद से ही मां की तबीयत खराब थी। पहले शहर में ही उनका इलाज कराया गया। गुरुवार को दिन में उनकी हालत ज्यादा बिगड़ी तो उन्हें अलीगढ़ मेडिकल कॉलेज ले जाया गया। जहंा रात्रि में 3 बजे उन्होंने दम तोड़ दिया। शुक्रवार की सुबह उनका शव घर पर लाया गया। हसीन बानो की मौत की खबर से परिवार और आस पास के लोग सभी सख्ते में आ गए। परिवारीजनों और लोगों की चिंता सबसे ज्यादा चिंता इस बात को लेकर थी कि उनका अंतिम संस्कार कैसे किया जाए। इस मामले को लेकर परिवार व आस पास के लोगों ने प्रशासनिक अधिकारियों से उनके पति और बेटे को अंतिम संस्कार के लिए जेल से बुलाने का आग्रह किया। जिलाधिकारी आरपी सिंह ने मानवीय आधार को देखते हुए नसरूद्दीन और उनके बेेटे अकरम को डेढ़ घंटे का पैरोल का समय दिया। उन्हें पैरोल पर कड़ी सुरक्षा में लाया गया और अंतिम क्रिया के बाद उन्हें वापस जेल भेज दिया गया।
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सांप्रदायिक हिंसा एवं हत्या के मामले में जिला जेल में बंद आरोपी की पत्नी की गुरुवार को मौत हो गई। परिवारीजन मौत का कारण पति और बेटे के जेल चले जाने के कारण लगे सदमे को बता रहे हैं। परिवारीजनों ने अंतिम क्रिया के लिए पति और बेटे को जेल से लाए जाने की बात जिलाधिकारी के समक्ष रखी। मानवीय आधार पर जिलाधिकारी ने डेढ़ घंटे का पैरोल आरोपी पिता, पुत्र को दिया। दोनों ही आरोपियों ने जेल से आकर अंतिम क्रिया में हिस्सा लिया।
गौरतलब है कि हिंसा और हत्या के मामले में नसरूद्दीन पुत्र हनीफ एवं उसके पुत्र अकरम को 27 जनवरी को कोतवाली पुलिस ने गिरफ्तार करके जेल भेजा था। पिता-पुत्र के जेल जाने के बाद से नसरूद्दीन की 60 वर्षीय पत्नी हसीन बानो सदमे में थीं। गुरुवार की रात्रि को अलीगढ़ के मेडिकल कॉलेज में उन्होंने दम तोड़ दिया। उनके बेटे मुशर्रफ ने बताया कि गिरफ्तारी के बाद से ही मां की तबीयत खराब थी। पहले शहर में ही उनका इलाज कराया गया। गुरुवार को दिन में उनकी हालत ज्यादा बिगड़ी तो उन्हें अलीगढ़ मेडिकल कॉलेज ले जाया गया। जहंा रात्रि में 3 बजे उन्होंने दम तोड़ दिया। शुक्रवार की सुबह उनका शव घर पर लाया गया। हसीन बानो की मौत की खबर से परिवार और आस पास के लोग सभी सख्ते में आ गए। परिवारीजनों और लोगों की चिंता सबसे ज्यादा चिंता इस बात को लेकर थी कि उनका अंतिम संस्कार कैसे किया जाए। इस मामले को लेकर परिवार व आस पास के लोगों ने प्रशासनिक अधिकारियों से उनके पति और बेटे को अंतिम संस्कार के लिए जेल से बुलाने का आग्रह किया। जिलाधिकारी आरपी सिंह ने मानवीय आधार को देखते हुए नसरूद्दीन और उनके बेेटे अकरम को डेढ़ घंटे का पैरोल का समय दिया। उन्हें पैरोल पर कड़ी सुरक्षा में लाया गया और अंतिम क्रिया के बाद उन्हें वापस जेल भेज दिया गया।
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