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बिजली के अभाव में नारकीय जीवन जी रहे नगला बीच के बाशिंदे
Updated Sat, 30 Dec 2017 08:17 PM IST
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नंदगांव (मथुरा)। प्रदेश के ऊर्जा मंत्री के गृह जनपद में एक गांव ऐसा भी है जहां के बाशिंदों को वर्ष 2017 में भी बिजली के दर्शन नहीं हुए। दिन छिपते ही अंधेरे में डूब जाता है राजस्थान बार्डर से लगा नगला बीच।
बदनगढ़ ग्राम पंचायत के मजरा नगला बीच को बसे 60 वर्ष से अधिक हो गए। इसकी आबादी 200 के करीब है। लोगों की पांच से अधिक पीढ़ियां हो गई हैं, लेकिन मूलभूत सुविधाओं का पूरी तरह से अभाव है।
ऊर्जा मंत्री और धर्मार्थ और संस्कृति विभाग के मंत्री के गृह जनपद वाले इस गांव में बिना बिजली के लोग अपना जीवन यापन कर रहे हैं। प्रदेश में कई सरकारें आईं और चली गईं, लेकिन नगला बीच के बाशिंदों को बिजली के दर्शन नहीं हुए। यहां बिना बिजली के मोबाइल और कंप्यूटर की कल्पना बेईमानी होगी। बिना बिजली के महिलाओं, पशुओं और घर की सुरक्षा कान्हा के हवाले रहती है। खेतों के बीच गांव की बसावट के चलते मच्छरों का प्रकोप हर मौसम में बना रहता है।
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गांव में पानी खारा है, अधिकांश बालिकाओं और महिलाओं का पूरा दिन कई किलोमीटर दूर से पानी लाने में निकल जाता है। ऐसे में बालिकाएं अपनी शिक्षा कैसे पूरी करें? स्कूल न होने के चलते दूसरे गांव में पढ़ने के लिए जाना पड़ता है। दूर स्कूल होने के चलते जब बच्चों की उम्र आठ-नौ वर्ष हो जाती है तब लोग उन्हें स्कूल भेजते हैं। मूलभूत सुविधाओं के अभाव के चलते छह परिवार गांव से पलायन कर चुके हैं। गांव के लोगों का पहला और आखिरी व्यवसाय खेती है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छता अभियान की तो यहां झलक भी दिखाई नहीं देती। जब गांव की महिलाओं से पूछा गया तो सुरति, राजन, लच्छो, विजय आदि ने बताया कि गांव के लोग नारकीय जीवन जीने को मजबूर हैं। नेता सिर्फ वोटों के लिए आते हैं। सरकार की कोई भी मदद उन तक नहीं पहुंचती। राजो, मिथलेश, बटेश, सुंदरी, ललिता, अंगूरी, राजवती आदि ने बताया कि प्रदेश के ऊर्जा मंत्री के सामने अपनी समस्या रखेंगे। वर्ष 2017 उन्हें कोई उपलब्धि नहीं दिला सका।
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बदनगढ़ ग्राम पंचायत के मजरा नगला बीच को बसे 60 वर्ष से अधिक हो गए। इसकी आबादी 200 के करीब है। लोगों की पांच से अधिक पीढ़ियां हो गई हैं, लेकिन मूलभूत सुविधाओं का पूरी तरह से अभाव है।
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ऊर्जा मंत्री और धर्मार्थ और संस्कृति विभाग के मंत्री के गृह जनपद वाले इस गांव में बिना बिजली के लोग अपना जीवन यापन कर रहे हैं। प्रदेश में कई सरकारें आईं और चली गईं, लेकिन नगला बीच के बाशिंदों को बिजली के दर्शन नहीं हुए। यहां बिना बिजली के मोबाइल और कंप्यूटर की कल्पना बेईमानी होगी। बिना बिजली के महिलाओं, पशुओं और घर की सुरक्षा कान्हा के हवाले रहती है। खेतों के बीच गांव की बसावट के चलते मच्छरों का प्रकोप हर मौसम में बना रहता है।
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गांव में पानी खारा है, अधिकांश बालिकाओं और महिलाओं का पूरा दिन कई किलोमीटर दूर से पानी लाने में निकल जाता है। ऐसे में बालिकाएं अपनी शिक्षा कैसे पूरी करें? स्कूल न होने के चलते दूसरे गांव में पढ़ने के लिए जाना पड़ता है। दूर स्कूल होने के चलते जब बच्चों की उम्र आठ-नौ वर्ष हो जाती है तब लोग उन्हें स्कूल भेजते हैं। मूलभूत सुविधाओं के अभाव के चलते छह परिवार गांव से पलायन कर चुके हैं। गांव के लोगों का पहला और आखिरी व्यवसाय खेती है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छता अभियान की तो यहां झलक भी दिखाई नहीं देती। जब गांव की महिलाओं से पूछा गया तो सुरति, राजन, लच्छो, विजय आदि ने बताया कि गांव के लोग नारकीय जीवन जीने को मजबूर हैं। नेता सिर्फ वोटों के लिए आते हैं। सरकार की कोई भी मदद उन तक नहीं पहुंचती। राजो, मिथलेश, बटेश, सुंदरी, ललिता, अंगूरी, राजवती आदि ने बताया कि प्रदेश के ऊर्जा मंत्री के सामने अपनी समस्या रखेंगे। वर्ष 2017 उन्हें कोई उपलब्धि नहीं दिला सका।