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गृहस् थ जीवन त्याग कर जैनेश्वरी दीक्षा लेंगी गुलाब देवी
Updated Wed, 27 Sep 2017 12:11 AM IST
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फिरोजाबाद। गृहस्थ जीवन का त्याग कर सुहाग नगरी की धर्मपरायण श्राविका गुलाब देवी जैनेश्वरी दीक्षा लेंगी। जैनाचार्य चैत्य सागर उन्हें जैनेश्वरी क्षुल्लिका दीक्षा देंगे। 28 सितंबर को रत्नत्रय नसियाजी परिसर में भव्य दीक्षा समारोह होगा।
चौकीगेट निवासी धर्मपरायण श्राविका गुलावदेवी जब जैनाचार्य चैत्य सागर और क्षुल्लिका माता शाश्वतमती माताजी के संपर्क में आई तो उनके भावों में वैराग्य का बीजारोपण हुआ। संसार असार लगने लगा। उन्होंने जैनाचार्य सागर से जैनेश्वरी दीक्षा देने का आग्रह किया।
धर्म की कसौटी पर जैनाचार्य ने उनके भावों को तौल कर दीक्षा की स्वीकृति दी। तीन दिन पहले परिवार को छोड़ कर गुलाब देवी जैनाचार्य की शरण में आई। वे आर्यिका और क्षुल्लिका माता के साथ साधनारत हैं।
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मंगलवार को वात्सल्य रत्नाकर जैनाचार्य विमल सागर महाराज के शिष्य जैनाचार्य चैत्य सागर ने दीक्षा महोत्सव के बारे में बताया। जैनाचार्य ने कहा कि ब्रह्मगुलाल मुनि की तपोभूमि और आचार्य महावीर कीर्ति महाराज की जन्मस्थली पर जैनेश्वरी दीक्षा देखने का सौभाग्य सुहाग नगरी को मिलेगा।
जैनेेश्वरी दीक्षा महान पुण्य का संयोग है। 28 सितंबर को देवाधिदेव शीतलनाथ भगवान के मोक्ष दिवस पर शीतलनाथ भगवान का निर्वाण लाडू महोत्सव होगा। गणधरवलय विधान के साथ गुलाबदेवी को जैनेश्वरी दीक्षा के संस्कार दिए जाएंगे।
जैनाचार्य चैत्य सागर ने बताया कि दीक्षा महोत्सव में कलकत्ता, असम, गुवाहटी, एटा, आगरा, दिल्ली सहित कई शहर और कई प्रांतों के भक्तजन वैराग्यमयी दृश्य को देखेंगे। नवदीक्षार्थी के माता-पिता बनने का सौभाग्य आगरा निवासी नीलम जैन और राजेंद्र जैन एडवोकेट को मिलेगा।
चौकी गेट निवासी वयोवृद्ध गुलाबदेवी ने कहा है कि जैनेश्वरी दीक्षा का निमित्त पाकर मेरा जीवन धन्य हो गया। आत्मकल्याण के लिए गृहस्थ जीवन का त्याग किया है। इसमें किसी से क्या पूछना। अपना कल्याण करना है तो पूरा कुआं छानने की क्या सोचना...। इसलिए वैराग्य का रास्ता चुना है।
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चौकीगेट निवासी धर्मपरायण श्राविका गुलावदेवी जब जैनाचार्य चैत्य सागर और क्षुल्लिका माता शाश्वतमती माताजी के संपर्क में आई तो उनके भावों में वैराग्य का बीजारोपण हुआ। संसार असार लगने लगा। उन्होंने जैनाचार्य सागर से जैनेश्वरी दीक्षा देने का आग्रह किया।
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धर्म की कसौटी पर जैनाचार्य ने उनके भावों को तौल कर दीक्षा की स्वीकृति दी। तीन दिन पहले परिवार को छोड़ कर गुलाब देवी जैनाचार्य की शरण में आई। वे आर्यिका और क्षुल्लिका माता के साथ साधनारत हैं।
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मंगलवार को वात्सल्य रत्नाकर जैनाचार्य विमल सागर महाराज के शिष्य जैनाचार्य चैत्य सागर ने दीक्षा महोत्सव के बारे में बताया। जैनाचार्य ने कहा कि ब्रह्मगुलाल मुनि की तपोभूमि और आचार्य महावीर कीर्ति महाराज की जन्मस्थली पर जैनेश्वरी दीक्षा देखने का सौभाग्य सुहाग नगरी को मिलेगा।
जैनेेश्वरी दीक्षा महान पुण्य का संयोग है। 28 सितंबर को देवाधिदेव शीतलनाथ भगवान के मोक्ष दिवस पर शीतलनाथ भगवान का निर्वाण लाडू महोत्सव होगा। गणधरवलय विधान के साथ गुलाबदेवी को जैनेश्वरी दीक्षा के संस्कार दिए जाएंगे।
जैनाचार्य चैत्य सागर ने बताया कि दीक्षा महोत्सव में कलकत्ता, असम, गुवाहटी, एटा, आगरा, दिल्ली सहित कई शहर और कई प्रांतों के भक्तजन वैराग्यमयी दृश्य को देखेंगे। नवदीक्षार्थी के माता-पिता बनने का सौभाग्य आगरा निवासी नीलम जैन और राजेंद्र जैन एडवोकेट को मिलेगा।
चौकी गेट निवासी वयोवृद्ध गुलाबदेवी ने कहा है कि जैनेश्वरी दीक्षा का निमित्त पाकर मेरा जीवन धन्य हो गया। आत्मकल्याण के लिए गृहस्थ जीवन का त्याग किया है। इसमें किसी से क्या पूछना। अपना कल्याण करना है तो पूरा कुआं छानने की क्या सोचना...। इसलिए वैराग्य का रास्ता चुना है।