{"_id":"59762ba54f1c1ba4738b46d6","slug":"181500916645-agra-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"हादसों को दावत दे रहीं शहर की जर्जर इमारतें","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हादसों को दावत दे रहीं शहर की जर्जर इमारतें
Updated Mon, 24 Jul 2017 11:21 PM IST
विज्ञापन
मकान में लगी आग को बुझाते लोग
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
एटा।
हर पल हादसे की आशंका और मौत का खौफ। पता नहीं कब कौनसी इमारत गिरकर जिंदगी को फना कर दे। लेकिन न तो जिम्मेदारों को परवाह और न ही इमारत के रखवालों को। जिले में जर्जर होते सरकारी और प्राइवेट भवनों को लेकर प्रशासन बेखबर है। बरसात शुरू हो चुकी है और ऐसे में कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।
हाल ही में हुई बारिश में कई मकानों की दीवारें तक गिर चुकी हैं और लोग घायल हुए हैं। लेकिन इन सब के बावजूद भी अधिकारियों का इस ओर ध्यान नहीं है। लापरवाही का आलम यह है कि वर्ष 2015 में आए भूकंप के झटकों के दौरान प्रशासन ने लेखपालों, नगरपंचायत और नगरपालिकाओं से जर्जर भवनों की सूची मांगी थी, लेकिन यह कार्रवाई भी ठंडे बस्ते में पड़ कर रह गई। जिले के राजकीय इंटर कालेज में बने सरकारी आवासों में आए दिन मलबा टूटकर गिरता रहता है। उधर, व्यस्ततम बाजार मैनगंज में भी आधा दर्जन पुराने भवन जर्जर हो चुके हैं। यहां लोगों को बारिश के दिनों में तो हादसा होने का खासा डर बना रहता है। इसके अलावा घंटाघर की गुंबदें भी जर्जर हैं। आए दिन मलबा गिरता रहता है। पहले एक-दो लोग चुटैल भी हुए हैं। पिछले साल भी बारिश के दौरान जिला प्रशासन ने संबंधित भवन स्वामियों को इन भवनों को ढहाने के निर्देश दिए थे।
ग्राम प्रधानों, नगर पंचायतों एवं नगर पालिका प्रशासन को भी ऐसे भवनों को चिह्नित कर कार्रवाई करने को कहा था, बावजूद इसके कोई सुनवाई नहीं हुई। वर्ष 2015 में भूकंप को देखते हुए भी जिला प्रशासन ने इन जर्जर भवनों की सूची मांगी थी। ताकि संबंधित लोगों को नोटिस जारी कर इन्हें ध्वस्त कराया जा सके और आगे की कार्रवाई हो, लेकिन नतीजा शून्य निकला। न तो पालिका ने कोई सुनवाई की और न ही भवन स्वामियों ने खुद ही पहल की। नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी संतराम सरोज ने कहा जर्जर भवनों का सर्वे हो रहा है। जर्जर भवनों को लेकर पालिका संजीदा है।
विज्ञापन
सरकारी कार्यालय भी जर्जर
सरकारी कार्यालयों की बात करें तो चकबंदी कार्यालय, सहायक निदेशक मत्स्य कार्यालय, मनोरंजन विभाग के अलावा जिला अस्पताल परिसर, पुलिस लाइन एवं कोतवाली देहात परिसर में बनीं आवासीय इमारतों की भी हालत ठीक नहीं हैं। पुराने जीआईसी भवन को भी धाराशाई होने का इंतजार है। सौ साल से अधिक पुरानी इमारत के हॉल की आधी छत गिर चुकी है।
विज्ञापन
हर पल हादसे की आशंका और मौत का खौफ। पता नहीं कब कौनसी इमारत गिरकर जिंदगी को फना कर दे। लेकिन न तो जिम्मेदारों को परवाह और न ही इमारत के रखवालों को। जिले में जर्जर होते सरकारी और प्राइवेट भवनों को लेकर प्रशासन बेखबर है। बरसात शुरू हो चुकी है और ऐसे में कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।
हाल ही में हुई बारिश में कई मकानों की दीवारें तक गिर चुकी हैं और लोग घायल हुए हैं। लेकिन इन सब के बावजूद भी अधिकारियों का इस ओर ध्यान नहीं है। लापरवाही का आलम यह है कि वर्ष 2015 में आए भूकंप के झटकों के दौरान प्रशासन ने लेखपालों, नगरपंचायत और नगरपालिकाओं से जर्जर भवनों की सूची मांगी थी, लेकिन यह कार्रवाई भी ठंडे बस्ते में पड़ कर रह गई। जिले के राजकीय इंटर कालेज में बने सरकारी आवासों में आए दिन मलबा टूटकर गिरता रहता है। उधर, व्यस्ततम बाजार मैनगंज में भी आधा दर्जन पुराने भवन जर्जर हो चुके हैं। यहां लोगों को बारिश के दिनों में तो हादसा होने का खासा डर बना रहता है। इसके अलावा घंटाघर की गुंबदें भी जर्जर हैं। आए दिन मलबा गिरता रहता है। पहले एक-दो लोग चुटैल भी हुए हैं। पिछले साल भी बारिश के दौरान जिला प्रशासन ने संबंधित भवन स्वामियों को इन भवनों को ढहाने के निर्देश दिए थे।
विज्ञापन
ग्राम प्रधानों, नगर पंचायतों एवं नगर पालिका प्रशासन को भी ऐसे भवनों को चिह्नित कर कार्रवाई करने को कहा था, बावजूद इसके कोई सुनवाई नहीं हुई। वर्ष 2015 में भूकंप को देखते हुए भी जिला प्रशासन ने इन जर्जर भवनों की सूची मांगी थी। ताकि संबंधित लोगों को नोटिस जारी कर इन्हें ध्वस्त कराया जा सके और आगे की कार्रवाई हो, लेकिन नतीजा शून्य निकला। न तो पालिका ने कोई सुनवाई की और न ही भवन स्वामियों ने खुद ही पहल की। नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी संतराम सरोज ने कहा जर्जर भवनों का सर्वे हो रहा है। जर्जर भवनों को लेकर पालिका संजीदा है।
विज्ञापन
सरकारी कार्यालय भी जर्जर
सरकारी कार्यालयों की बात करें तो चकबंदी कार्यालय, सहायक निदेशक मत्स्य कार्यालय, मनोरंजन विभाग के अलावा जिला अस्पताल परिसर, पुलिस लाइन एवं कोतवाली देहात परिसर में बनीं आवासीय इमारतों की भी हालत ठीक नहीं हैं। पुराने जीआईसी भवन को भी धाराशाई होने का इंतजार है। सौ साल से अधिक पुरानी इमारत के हॉल की आधी छत गिर चुकी है।