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सरकार की उदासीनता से बर्बाद हो रहा अन्नदाता: कुलदीप
Updated Sat, 01 Dec 2018 10:48 PM IST
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सरकार की उदासीनता से बर्बाद हो रहा अन्नदाता: कुलदीप
- फोटो : अमर उजाला
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कासगंज। भारतीय किसान यूनियन (भानु) ने किसानों की समस्याओं को लेकर शनिवार को बारह पत्थर मैदान के बाहर जमकर प्रदर्शन किया। केंद्र सरकार और राज्य सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। किसान सरकार की नीतियों के खिलाफ जमकर बरसे। यह आंदोलन निरंतर दस दिन तक चलेगा। 10 दिसंबर को बड़े स्तर पर प्रदर्शन किया जाएगा।
धरना प्रदर्शन के दौरान किसान यूनियन के मंडल अध्यक्ष कुलदीप पांडे ने कहा कि देश का किसान खेती की बढ़ती लागत और फसलों का उचित मूल्य न मिलने से कर्जदार हो गया है। किसान के सभी कर्ज माफ किए जाएं। देश के आम किसानों, मजदूरों को कृषि उपयोग हेतु सिंचाई और बिजली निशुल्क दी जाए। मौजूदा केंद्र सरकार और प्रदेश सरकार ने तो किसानों का भरोसा ही खो दिया है। उन्होंने कहा कि डीएपी की बोरी का वजन घटा दिया है। रजबाहों में पानी नहीं है। ग्रामीण आंचल में विद्युत सप्लाई नहीं मिल पा रही। अ
नारेबाजी कर रहे किसानों को सड़क की ओर जाने से पुलिस रोकती रही। इस बात को लेकर कई बार पुलिसकर्मियों से नोंकझोंक भी हुई। किसानों ने एलान किया कि उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो किसान चक्का जाम और उग्र प्रदर्शन करने को बाध्य होंगे। किसान नेता मोनू राजपूत, नाथूराम, महावीर सिंह, रवीश कुमार, सतीश चंद्र, देव प्रकाश, मुन्ना लाल, हरवीर सिंह, सुनीता देवी, मोहन लाल, किरन देवी, गवेंद्र सिंह, अशोक कुमार, प्रेमपाल, नीरज, सुखवीर, अमर सिंह, चंद्रभान, किताबश्री, नीरज, तिलक सिंह, राजू, महावीर प्रसाद आदि मौजूद रहे।
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धरना प्रदर्शन के दौरान किसान यूनियन के मंडल अध्यक्ष कुलदीप पांडे ने कहा कि देश का किसान खेती की बढ़ती लागत और फसलों का उचित मूल्य न मिलने से कर्जदार हो गया है। किसान के सभी कर्ज माफ किए जाएं। देश के आम किसानों, मजदूरों को कृषि उपयोग हेतु सिंचाई और बिजली निशुल्क दी जाए। मौजूदा केंद्र सरकार और प्रदेश सरकार ने तो किसानों का भरोसा ही खो दिया है। उन्होंने कहा कि डीएपी की बोरी का वजन घटा दिया है। रजबाहों में पानी नहीं है। ग्रामीण आंचल में विद्युत सप्लाई नहीं मिल पा रही। अ
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नारेबाजी कर रहे किसानों को सड़क की ओर जाने से पुलिस रोकती रही। इस बात को लेकर कई बार पुलिसकर्मियों से नोंकझोंक भी हुई। किसानों ने एलान किया कि उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो किसान चक्का जाम और उग्र प्रदर्शन करने को बाध्य होंगे। किसान नेता मोनू राजपूत, नाथूराम, महावीर सिंह, रवीश कुमार, सतीश चंद्र, देव प्रकाश, मुन्ना लाल, हरवीर सिंह, सुनीता देवी, मोहन लाल, किरन देवी, गवेंद्र सिंह, अशोक कुमार, प्रेमपाल, नीरज, सुखवीर, अमर सिंह, चंद्रभान, किताबश्री, नीरज, तिलक सिंह, राजू, महावीर प्रसाद आदि मौजूद रहे।
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