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क्या हैट्रिक लगाने में कामयाब होंगे राजवीर सिंह

Fri, 22 Mar 2019 10:51 PM IST
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Updated Fri, 22 Mar 2019 10:51 PM IST
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क्या हैट्रिक लगाने में कामयाब होंगे राजवीर सिंह
क्या हैट्रिक लगाने में कामयाब होंगे राजवीर सिंह - फोटो : अमर उजाला
एटा। लोकसभा क्षेत्र के जातिगत आंकड़े और कल्याण परिवार के पिछले चुनावी आंकड़े यहां से उनके दावे को शुरू से ही मजबूत कर रहे थे। 2009 के चुनाव में कल्याण और 2014 में उनके पुत्र राजवीर यहां से रिकार्ड मतों से जीत चुके हैं। ऐसे में भाजपा ने एक बार फिर राजवीर को यहां से टिकट देकर अपनी जीत को पुख्ता करने का इंतजाम कर लिया है। अगर ऐसा होता है तो एटा लोकसभा क्षेत्र से यह कल्याण परिवार की हैट्रिक होगी।
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भाजपा के फायर ब्रांड नेता कहे जाने वाले कल्याण सिंह जब 2009 ने एटा लोकसभा सीट से निर्दलीय चुनाव लड़े तो लोगों ने उन्हें खूब प्यार दिया। नतीजा यह हुआ कि बिना किसी पार्टी के सपोर्ट के भी वह जीत हासिल करने में सफल रहे। इसके बाद 2014 में उन्होंने अपने पुत्र राजवीर को यहां से चुनाव लड़ाने का फैसला किया। राजवीर सिंह ने भाजपा के टिकट से यहां चुनाव लड़ा और रिकार्ड मतों से जीत हासिल की। अब भाजपा ने एक बार फिर राजवीर सिंह को प्रत्याशी बनाया है। राजवीर के नाम की घोषणा होते ही शहर में क्षेत्र में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया। लोग हार जीत के कयास और आंकड़ों को लेकर बातचीत करने लगे। वर्तमान स्थितियों को देखें तो आंकड़े राजवीर को मजबूत बताते हैं।
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टिकट चयन में रही है भूमिका
कागसंज। एटा, अलीगढ़ और कासगंज में टिकट चयन को लेकर सदैव पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह की प्रमुख भूमिका रही है। साथ ही कल्याण सिंह के लिए यह क्षेत्र सबसे अधिक उपजाऊ राजनीतिक जमीन रही है। 1993 में कल्याण सिंह ने कासगंज विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ा था। इसके बाद 2009 में भी वह एटा-कासगंज सीट से लोकसभा चुनाव जीत चुके हैं।
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बाबूजी के संबंध फिर देंगे मजबूती
2009 के बाद से कल्याण सिंह ने एटा कासगंज को अपना घर बना लिया। मतदाताओं के बीच उनकी मजबूत पैठ उन्हें यहां जीत का भरोसा देती है। जनता के बीच रहने के चलते वह लोगों के बाबूजी बन गए। अब वह जब भी यहां आते हैं तो बाबूजी से मिलने वालों की कतारें लग जाती हैं। हाल ही में वह तीन दिन के लिए यहां आए थे। चुनाव से पहले उनका यह दौरा राजवीर के लिए सियासी बिसात बिछाने वाला बताया जा रहा था। पुराने लोगों से उनके संबंध भी जीत का बड़ा आधार माना जाता है।


भरोसे का नाम हैं एलआर मतदाता
जातिगत आंकड़ेबाजी पर नजर डालें तो भाजपा की ओर से राजवीर के नाम पर मुहर लगाना एकदम ठीक फैसला माना जा रहा है। बदले परिसीमन के बाद से ही एटा लोकसभा क्षेत्र में लोधे राजपूत मतदाताओं का दबदबा बढ़ गया था। इसके बाद से इस सीट पर कल्याण परिवार का कब्जा है। एलआर मतदाताओं का कल्याण परिवार पर यह भरोसा ही है जिसके चलते पार्टी ने राजवीर पर एक बार फिर भरोसा जताया है।

मतदाताओं के जातिगत आंकड़े
लोधी राजपूत-दो लाख 60 हजार
यादव- दो लाख 30 हजार
मुस्लिम- एक लाख 42 हजार
ठाकुर- एक लाख 70 हजार
ब्राह्मण- 90 हजार
वैश्य-90 हजार
शाक्य-दो लाख 10 हजार
जाटव-एक लाख 80 हजार
अन्य-एक लाख

पिछले चुनावों के आंकड़े
एक नजर आंकड़ों पर

लोकसभा चुनाव 2009
प्रत्याशी पार्टी मत स्थिति
कल्याण सिंह निर्दलीय (सपा समर्थित) 275717 विजयी
देवेंद्र सिंह यादव बसपा 147749 पराजित
श्याम सिंह शाक्य भाजपा 88562 पराजित
महादीपक सिंह शाक्य कांग्रेस 25048 पराजित

लोकसभा चुनाव 2014
प्रत्याशी पार्टी मत स्थिति
राजवीर सिंह भाजपा 474978 विजयी
देवेंद्र सिंह यादव सपा 273977 पराजित
नूर मुहम्मद खान बसपा 137127 पराजित
जुगेंद्र सिंह भदौरिया महान दल 12445 पराजित
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