{"_id":"59d3bf9c4f1c1b65548b5882","slug":"161507049372-agra-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"दिव्यंागों की पहल बन रही ओडीएफ का सहारा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
दिव्यंागों की पहल बन रही ओडीएफ का सहारा
Updated Tue, 03 Oct 2017 10:52 PM IST
विज्ञापन
पुरस्कार में नेत्रहीन को बकरी देते लोधी
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
एटा।
युवा जोश, कुछ करने की ललक और उम्मीदें। हाथ पैर से दिव्यांग हैं, लेकिन जुनून ने उनको पीछे नहीं हटने दिया। जिले को शौचमुक्त बनाने के लिए वे तेजी से जुटे हैं। अभियान के तहत उन्होंने अपने घर में खुद शौचालय बनाया है।
जिले के सकीट ब्लॉक के गांव चिलमापुर के मजरा कूबरी निवासी विनय की उम्र 18 साल है। सालों से खुले में ही शौच जाते थे। कुछ साल पहले खेत में शौच के वक्त बिजली का करंट लगा, तो विनय को जिंदगी का सबसे बड़ा दर्द मिला। दोनों हाथों से दिव्यांग हो गए। मगर जज्बा कम नहीं हुआ। तब से मन में आस थी कि घर में शौचालय हो। मगर आर्थिक स्थिति इतनी अच्छी नहीं थी कि शौचालय बनवा सकें। पिछले दिनों खुले में शौचमुक्त अभियान के गांव में जागरूकता के लिए खंड प्रेरक बृजमोहन गांव पहुंचे, तो उन्होंने विनय को समझाया। विनय को जब पता चला कि शौचालय निर्माण के लिए सरकार सहायता दे रही है, तो उन्होंने खुद ही घर में शौचालय का काम शुरू कर दिया। सुबह-शाम काम करके वे शौचालय का निर्माण कर रहे हैैं। साथ ही जिले के तमाम दिव्यांगाें के लिए प्रेरणा बन रहे हैं। वे कहते हैं कि खुले में शौच ने उनको जीवन का सबसे बड़ा झटका दिया है। इसे दूर करने के लिए खुले में शौच मुक्ति के लिए शुरूआत की है।
नेत्रहीन सुरेश हुए भावुक
जिला पंचायत में स्वच्छ ग्राम गौरव सम्मेलन के दौरान विधायक मारहरा वीरेंद्र वर्मा ने गांव रामई हेतमशाह निवासी नेत्रहीन सुरेश को बकरियां वापस सौंपीं। दरअसल, बहू की जिद के बाद सुरेश ने बकरियां बेचकर शौचालय बनवाया था। सुरेश को सीएम योगी आदित्यनाथ भी सम्मानित कर चुके हैं। सुरेश को जैसे ही बकरियां वापस मिलने की सूचना मिली, तो वे भावुक हो गए।
विज्ञापन
इनका कहना है
जिले में अब तक 150 गांवों के प्रस्ताव ओडीएफ के लिए मिल चुके हैं। इनमें दिव्यांगों ने काफी मदद की है। जिले के दिव्यांग मिसाल कायम कर रहे हैं।
धनंजय जायसवाल, डीपीआरओ
विज्ञापन
युवा जोश, कुछ करने की ललक और उम्मीदें। हाथ पैर से दिव्यांग हैं, लेकिन जुनून ने उनको पीछे नहीं हटने दिया। जिले को शौचमुक्त बनाने के लिए वे तेजी से जुटे हैं। अभियान के तहत उन्होंने अपने घर में खुद शौचालय बनाया है।
जिले के सकीट ब्लॉक के गांव चिलमापुर के मजरा कूबरी निवासी विनय की उम्र 18 साल है। सालों से खुले में ही शौच जाते थे। कुछ साल पहले खेत में शौच के वक्त बिजली का करंट लगा, तो विनय को जिंदगी का सबसे बड़ा दर्द मिला। दोनों हाथों से दिव्यांग हो गए। मगर जज्बा कम नहीं हुआ। तब से मन में आस थी कि घर में शौचालय हो। मगर आर्थिक स्थिति इतनी अच्छी नहीं थी कि शौचालय बनवा सकें। पिछले दिनों खुले में शौचमुक्त अभियान के गांव में जागरूकता के लिए खंड प्रेरक बृजमोहन गांव पहुंचे, तो उन्होंने विनय को समझाया। विनय को जब पता चला कि शौचालय निर्माण के लिए सरकार सहायता दे रही है, तो उन्होंने खुद ही घर में शौचालय का काम शुरू कर दिया। सुबह-शाम काम करके वे शौचालय का निर्माण कर रहे हैैं। साथ ही जिले के तमाम दिव्यांगाें के लिए प्रेरणा बन रहे हैं। वे कहते हैं कि खुले में शौच ने उनको जीवन का सबसे बड़ा झटका दिया है। इसे दूर करने के लिए खुले में शौच मुक्ति के लिए शुरूआत की है।
विज्ञापन
नेत्रहीन सुरेश हुए भावुक
जिला पंचायत में स्वच्छ ग्राम गौरव सम्मेलन के दौरान विधायक मारहरा वीरेंद्र वर्मा ने गांव रामई हेतमशाह निवासी नेत्रहीन सुरेश को बकरियां वापस सौंपीं। दरअसल, बहू की जिद के बाद सुरेश ने बकरियां बेचकर शौचालय बनवाया था। सुरेश को सीएम योगी आदित्यनाथ भी सम्मानित कर चुके हैं। सुरेश को जैसे ही बकरियां वापस मिलने की सूचना मिली, तो वे भावुक हो गए।
विज्ञापन
इनका कहना है
जिले में अब तक 150 गांवों के प्रस्ताव ओडीएफ के लिए मिल चुके हैं। इनमें दिव्यांगों ने काफी मदद की है। जिले के दिव्यांग मिसाल कायम कर रहे हैं।
धनंजय जायसवाल, डीपीआरओ