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जिले में तीन साल में सबसे कम हुई वर्षा
Updated Tue, 12 Sep 2017 11:31 PM IST
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ासगंज। इंद्रदेव इस बार जनपद से रूठे नजर आ रहे हैं। इस बार तीन साल में सबसे कम वर्षा हुई है। बारिश न होने से किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें हैं। किसानों को फसल प्रभावित होने का खतरा सता रहा है।
जनपद में 140700 हेक्टेअर कृषि भूमि है। जनपद में बारिश ही सिंचाई के लिए प्रमुख साधन हैं। यूं तो जनपद में औसत वर्षा 750 मिमी होती है। अधिकांश वर्षा जून से सितंबर के बीच होती है। इन चार माह की औसत वर्षा 600 मिमी मानी जाती है। इस मौसम में खरीफ की फसल की पैदावार होती है लेकिन इस साल जनपद में सूखे जैसे हालात हैं। पिछले तीन सालों के आंकड़ों पर गौर करें तो इस वर्ष सबसे कम वर्षा हुई है। चार माह में महज 372 मिमी वर्षा दर्ज की गई है। यह वर्षा भी लगातार नहीं हुई। ऐसे में खेतों को पर्याप्त नमी नहीं मिल सकी है। बता दें कि जनपद में 459.01 किमी में नहरें है लेकिन यह नहरें महज 14122 किमी क्षेत्रफल को ही संतृप्त कर पाती है। वहीं जिले में सिंचाई के लिए 347 राजकीय नलकूप है। हालांकि अधिकांश नलकूप खराब पड़े हैं।
97 हजार हैक्टैअर पर है संकट के बादल
कासगंज। जनपद में खरीफ की फसल के तहत लगभग 97 हजार हेक्टेअर में फसल की बुवाई की गई है। फसल में धान, मक्का, बाजरा, दलहन आदि बोया गया। पानी कम बरसने से फसलों पर काफी असर पड़ा है। फसल की पैदावार गिरने का अनुमान है।
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जनपद में तीन साल के वर्षा के आंकड़े मिमी में
वर्ष जून जुलाई अगस्त सितंबर
2015 173 124.33 398 1
2016 105 325 210.33 33
2017 136 116.33 108 11.66
धान की फसल को सबसे अधिक पानी की आवश्यकता पड़ती है। फसल को जितना अधिक पानी मिलता है उतनी अधिक पैदावार होती है। कम बारिश होने से पैदावार प्रभावित होने की संभावना है। रामदीन किसान
बारिश कम होने से फसल के प्रभावित होने की स्थिति का आंकलन करने के लिए सर्वे कराया जा रहा है। जल्द सर्वे रिपोर्ट आएगी। इससे पता चल सकेगा कि फसल पर कितना असर पड़ा है।
सुमित सिंह जिला कृषि अधिकारी
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जनपद में 140700 हेक्टेअर कृषि भूमि है। जनपद में बारिश ही सिंचाई के लिए प्रमुख साधन हैं। यूं तो जनपद में औसत वर्षा 750 मिमी होती है। अधिकांश वर्षा जून से सितंबर के बीच होती है। इन चार माह की औसत वर्षा 600 मिमी मानी जाती है। इस मौसम में खरीफ की फसल की पैदावार होती है लेकिन इस साल जनपद में सूखे जैसे हालात हैं। पिछले तीन सालों के आंकड़ों पर गौर करें तो इस वर्ष सबसे कम वर्षा हुई है। चार माह में महज 372 मिमी वर्षा दर्ज की गई है। यह वर्षा भी लगातार नहीं हुई। ऐसे में खेतों को पर्याप्त नमी नहीं मिल सकी है। बता दें कि जनपद में 459.01 किमी में नहरें है लेकिन यह नहरें महज 14122 किमी क्षेत्रफल को ही संतृप्त कर पाती है। वहीं जिले में सिंचाई के लिए 347 राजकीय नलकूप है। हालांकि अधिकांश नलकूप खराब पड़े हैं।
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97 हजार हैक्टैअर पर है संकट के बादल
कासगंज। जनपद में खरीफ की फसल के तहत लगभग 97 हजार हेक्टेअर में फसल की बुवाई की गई है। फसल में धान, मक्का, बाजरा, दलहन आदि बोया गया। पानी कम बरसने से फसलों पर काफी असर पड़ा है। फसल की पैदावार गिरने का अनुमान है।
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जनपद में तीन साल के वर्षा के आंकड़े मिमी में
वर्ष जून जुलाई अगस्त सितंबर
2015 173 124.33 398 1
2016 105 325 210.33 33
2017 136 116.33 108 11.66
धान की फसल को सबसे अधिक पानी की आवश्यकता पड़ती है। फसल को जितना अधिक पानी मिलता है उतनी अधिक पैदावार होती है। कम बारिश होने से पैदावार प्रभावित होने की संभावना है। रामदीन किसान
बारिश कम होने से फसल के प्रभावित होने की स्थिति का आंकलन करने के लिए सर्वे कराया जा रहा है। जल्द सर्वे रिपोर्ट आएगी। इससे पता चल सकेगा कि फसल पर कितना असर पड़ा है।
सुमित सिंह जिला कृषि अधिकारी