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कच्ची गलियां, उखड़ी सड़क बनी चिश्तीनगर की पहचान
Updated Sat, 08 Jul 2017 11:37 PM IST
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टूटी सड़के।
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फिरोजाबाद। नई आबादी क्षेत्रों के हालात में सुधार होता नहीं दिख रहा। नई आबादी में आज भी जनता नारकीय हालात से जूझने को मजबूर है। कच्ची गलियां और जर्जर सड़क चिश्तीनगर की पहचान बन गईं हैं।
नई आबादी क्षेत्रों की गलियां कच्ची होने के कारण नारकीय हालात बने हुए हैं। इसमें साफ सफाई न होने से दलदल जैसी स्थिति बन गई है। यहां जनता को नगर निगम के नाम पर सड़क, बिजली, पानी सफाई जैसी कोई सुविधा नसीब नहीं है।
बरसात होने पर हालात और भी गंभीर हो जाते हैं। लोग सीढ़ियों के सहारे घर तक पहुंच पाते है। क्षेत्रीय बाशिंदों ने समस्याओं के निदान के लिए कई बार अफसरों की चौखट पर दस्तक दी, परंतु आजतक कोई सुनवाई न होने से वह भी मायूस होकर घर बैठने को मजबूर हो गए हैं।
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असलम परवेज का कहना है कि कच्ची गलियों के निर्माण को नगर निगम अधिकारियों को कई बार लिखित में शिकायत कर चुके हैं, परंतु आजतक कोई सुनवाई नहीं हुई। नाजिम का कहना है कि क्षेत्र में जगह-जगह सड़कें काफी नीचे तक धंस गई हैं, जिससे हर समय हादसे की आशंका बनी रहती है।
नगर निगम में कोई सुनवाई नहीं कर रहा। मुज्जफर का कहना है कि कच्ची गली में दलदल जैसे हालात हैं। गंदगी के कारण पाइप लाइन के जरिए आने वाले पानी में काफी बदवू आती है, जिससे पानी पीने का भी मन नहीं करता। मुन्नी का कहना है कि यहां रहते हुए 20 साल हो गए लेकिन आजतक क्षेत्र में कच्ची गलियां नहीं बन सकीं। नगर निगम के चक्कर काट-काटकर थक चुके हैं।
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नई आबादी क्षेत्रों की गलियां कच्ची होने के कारण नारकीय हालात बने हुए हैं। इसमें साफ सफाई न होने से दलदल जैसी स्थिति बन गई है। यहां जनता को नगर निगम के नाम पर सड़क, बिजली, पानी सफाई जैसी कोई सुविधा नसीब नहीं है।
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बरसात होने पर हालात और भी गंभीर हो जाते हैं। लोग सीढ़ियों के सहारे घर तक पहुंच पाते है। क्षेत्रीय बाशिंदों ने समस्याओं के निदान के लिए कई बार अफसरों की चौखट पर दस्तक दी, परंतु आजतक कोई सुनवाई न होने से वह भी मायूस होकर घर बैठने को मजबूर हो गए हैं।
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असलम परवेज का कहना है कि कच्ची गलियों के निर्माण को नगर निगम अधिकारियों को कई बार लिखित में शिकायत कर चुके हैं, परंतु आजतक कोई सुनवाई नहीं हुई। नाजिम का कहना है कि क्षेत्र में जगह-जगह सड़कें काफी नीचे तक धंस गई हैं, जिससे हर समय हादसे की आशंका बनी रहती है।
नगर निगम में कोई सुनवाई नहीं कर रहा। मुज्जफर का कहना है कि कच्ची गली में दलदल जैसे हालात हैं। गंदगी के कारण पाइप लाइन के जरिए आने वाले पानी में काफी बदवू आती है, जिससे पानी पीने का भी मन नहीं करता। मुन्नी का कहना है कि यहां रहते हुए 20 साल हो गए लेकिन आजतक क्षेत्र में कच्ची गलियां नहीं बन सकीं। नगर निगम के चक्कर काट-काटकर थक चुके हैं।