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300 करोड़ मिलें तो बने आगरा में अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा
Updated Thu, 29 Jun 2017 01:11 AM IST
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आगरा। जेवर में 15 से 20 हजार करोड़ रुपये इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर खर्च होंगे, लेकिन आगरा में यह महज 300 करोड़ रुपये में ही बन जाएगा। कुशीनगर और इलाहाबाद पर मेहरबान रही प्रदेश सरकार इन दोनों शहरों को पहले ही बजट जारी कर चुकी है, लेकिन आगरा के लिए न तो चर्चा हो रही है और न ही बजट की बात ही उठी। बीते साल अक्तूबर में प्रदेश सरकार के सामने इंटरनेशनल एयरपोर्ट के लिए 55 हेक्टेयर अतिरिक्त जमीन के अधिग्रहण का प्रस्ताव भेजा गया था, लेकिन सिविल एन्क्लेव को ही बनाने के निर्देश दिए गए।
धनौली में नागरिक उड्डयन विभाग के पास 55 करोड़ की लागत से सिविल टर्मिनल का प्रस्ताव और डिजाइन भेजा जा चुका है। 5 हजार वर्ग मीटर जमीन पर प्रस्तावित टर्मिनल की क्षमता पांच हजार यात्रियों की होगी, लेकिन दूसरे चरण में 30 हजार वर्ग मीटर में निर्माण और 35 हजार यात्रियों की क्षमता का टर्मिनल प्रस्तावित किया गया था। आगरा के जनप्रतिनिधि पहले चरण के सिविल टर्मिनल पर ही जोर देते रहे हैं। दूसरे चरण के लिए 300 करोड़ रुपये जारी करने पर बात ही नहीं उठी। जिस तरह कुशीनगर और इलाहाबाद के लिए एक बार में ही बजट जारी हुआ, वैसा आगरा के लिए नहीं किया गया।
कुशीनगर, इलाहाबाद से पीछे है आगरा
दुनिया में भारत के पर्यटन का आईना है ताजमहल, लेकिन 30 सालों से अनवरत उठ रही मांग को आगरा के कमजोर जनप्रतिनिधि मजबूती से सरकारों के सामने न उठा पाए। इसके उलट कुशीनगर और इलाहाबाद में अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा बनाने के लिए प्रदेश सरकार सरकारी खजाने का मुंह खोले हुए हैं। आगरा में सिविल एन्क्लेव के लिए 65 करोड़ रुपये एक साल के बाद निकल सके, लेकिन कुशीनगर में 354 करोड़ और इलाहाबाद के लिए 290 करोड़ रुपये जारी किए गए। कुशीनगर में पीपीपी मॉडल पर 550 एकड़ जमीन अधिग्रहण हो रही है। वाराणसी एयरपोर्ट को 5 साल पहले ही 4 अक्तूबर 2012 को अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का दर्जा दे दिया गया। यहां से कोलंबो, शारजहां और बैंकाक के लिए विदेशी एयरलाइंस उड़ान संचालित कर रही हैं।
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पर्यटन के नाम पर करोड़ों खर्च, एयरपोर्ट को बजट नहीं
समाजवादी पार्टी की पूर्व सरकार ने आगरा में पर्यटन के नाम पर करोड़ों रुपये की ऐसी कई योजनाएं चलाईं, जिनसे पर्यटन को प्रोत्साहन तो नहीं मिला, लेकिन सत्ता से जुड़े ठेकेदारों की बल्ले बल्ले हो गई। सपा सरकार में 239 करोड़ रुपये के ताज ओरिएंटेशन सेंटर, 150 करोड़ के मुगल म्यूजियम, 197 करोड़ के ताजगंज प्रोजेक्ट, 133 करोड़ का साइकिल ट्रैक बनाया, लेकिन पर्यटक नहीं बढ़ पाए। अखिलेश सरकार दस हजार करोड़ का थीम पार्क बनाने को तैयार रही, लेकिन इंटरनेशनल एयरपोर्ट के लिए 300 करोड़ रुपये जारी नहीं कर पाई।
700 करोड़ रुपये की योजनाएं चलाईं, एयरपोर्ट को बजट नहीं दिया
55 हेक्टेयर जमीन का एयरफोर्स के पास ही होना था अधिग्रहण
35 हजार यात्रियों की क्षमता का प्रस्तावित है इंटरनेशनल टर्मिनल
30 हजार वर्ग मीटर क्षेत्र में टर्मिनल की अंतर्राष्ट्रीय सुविधाएं
75 लाख भारतीय और विदेशी पर्यटक आते हैं आगरा
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धनौली में नागरिक उड्डयन विभाग के पास 55 करोड़ की लागत से सिविल टर्मिनल का प्रस्ताव और डिजाइन भेजा जा चुका है। 5 हजार वर्ग मीटर जमीन पर प्रस्तावित टर्मिनल की क्षमता पांच हजार यात्रियों की होगी, लेकिन दूसरे चरण में 30 हजार वर्ग मीटर में निर्माण और 35 हजार यात्रियों की क्षमता का टर्मिनल प्रस्तावित किया गया था। आगरा के जनप्रतिनिधि पहले चरण के सिविल टर्मिनल पर ही जोर देते रहे हैं। दूसरे चरण के लिए 300 करोड़ रुपये जारी करने पर बात ही नहीं उठी। जिस तरह कुशीनगर और इलाहाबाद के लिए एक बार में ही बजट जारी हुआ, वैसा आगरा के लिए नहीं किया गया।
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कुशीनगर, इलाहाबाद से पीछे है आगरा
दुनिया में भारत के पर्यटन का आईना है ताजमहल, लेकिन 30 सालों से अनवरत उठ रही मांग को आगरा के कमजोर जनप्रतिनिधि मजबूती से सरकारों के सामने न उठा पाए। इसके उलट कुशीनगर और इलाहाबाद में अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा बनाने के लिए प्रदेश सरकार सरकारी खजाने का मुंह खोले हुए हैं। आगरा में सिविल एन्क्लेव के लिए 65 करोड़ रुपये एक साल के बाद निकल सके, लेकिन कुशीनगर में 354 करोड़ और इलाहाबाद के लिए 290 करोड़ रुपये जारी किए गए। कुशीनगर में पीपीपी मॉडल पर 550 एकड़ जमीन अधिग्रहण हो रही है। वाराणसी एयरपोर्ट को 5 साल पहले ही 4 अक्तूबर 2012 को अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का दर्जा दे दिया गया। यहां से कोलंबो, शारजहां और बैंकाक के लिए विदेशी एयरलाइंस उड़ान संचालित कर रही हैं।
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पर्यटन के नाम पर करोड़ों खर्च, एयरपोर्ट को बजट नहीं
समाजवादी पार्टी की पूर्व सरकार ने आगरा में पर्यटन के नाम पर करोड़ों रुपये की ऐसी कई योजनाएं चलाईं, जिनसे पर्यटन को प्रोत्साहन तो नहीं मिला, लेकिन सत्ता से जुड़े ठेकेदारों की बल्ले बल्ले हो गई। सपा सरकार में 239 करोड़ रुपये के ताज ओरिएंटेशन सेंटर, 150 करोड़ के मुगल म्यूजियम, 197 करोड़ के ताजगंज प्रोजेक्ट, 133 करोड़ का साइकिल ट्रैक बनाया, लेकिन पर्यटक नहीं बढ़ पाए। अखिलेश सरकार दस हजार करोड़ का थीम पार्क बनाने को तैयार रही, लेकिन इंटरनेशनल एयरपोर्ट के लिए 300 करोड़ रुपये जारी नहीं कर पाई।
700 करोड़ रुपये की योजनाएं चलाईं, एयरपोर्ट को बजट नहीं दिया
55 हेक्टेयर जमीन का एयरफोर्स के पास ही होना था अधिग्रहण
35 हजार यात्रियों की क्षमता का प्रस्तावित है इंटरनेशनल टर्मिनल
30 हजार वर्ग मीटर क्षेत्र में टर्मिनल की अंतर्राष्ट्रीय सुविधाएं
75 लाख भारतीय और विदेशी पर्यटक आते हैं आगरा