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जेल से आजाद हो सकते हैं 11 सजायाफ्ता कैदी
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मथुरा। जेल में सजा काट रहे 11 सजायाफ्ता कैदी जल्द ही आजाद हो सकते हैं। इन कैदियों में से आठ कैदी आजीवन कारावास की सजा काट रहे हैं तीन कैदी अन्य मामलों में जेल में निरुद्ध हैं। जेल के अंदर उनके द्वारा किए जाने वाले व्यवहार के आधार पर सोमवार को विचारण कमेटी ने जेल के अंदर पहुंचकर सुनवाई की।
जेल में सजायाफ्ता कैदियों की दया याचिका के आधार पर रिहाई का प्रावधान है। इस याचिका पर विचारण कमेटी द्वारा सुनवाई की जाती है। सोमवार को विचारण कमेटी मेें शामिल जिलाधिकारी सर्वज्ञराम मिश्र, एसएसपी शलभ माथुर, जिला प्रोबेशन अधिकारी एएस रस्तोगी तथा वरिष्ठ जेल अधीक्षक शैलेन्द्र कुमार मैत्रेय ने सुनवाई की।
यह सुनवाई आगरा सेंट्रल जेल से आए आठ आजीवन कारावास के कैदी तथा मथुरा जिला जेल में निरुद्ध तीन कैदियों की हुई। कमेटी ने प्रत्येक कैदी की जेल की चरित्र पंजिका का निरीक्षण कर कैदियों को सुना। उनके रिहा होने के आधार की जानकारी ली ।
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विचारण कमेटी द्वारा इसी के आधार पर एक रिपोर्ट तैयार की गई जिसे शासन को भेज दिया गया । इस संबंध में जानकारी देते हुए जेलर अरविंद पांडेय ने बताया कि सोमवार को जेल में विचारण कमेटी द्वारा सुनवाई की गई। जिसकी रिपोर्ट शासन को भेजी गई है ।
कैदी का व्यवहार करता है तय
कैदी का व्यवहार तय करता है कि उसकी दया याचिका पर सकारात्मक रिपोर्ट जाए या नहीं । जेल अधिकारी कैदी के व्यवहार को आधार बनाकर ही शासन को संस्तुति करते हैं । सोमवार को जिन कैदियों की दया याचिका पर सुनवाई हुई उनके व्यवहार की जानकारी भी जेल अधिकारियों द्वारा पूर्व में ही जुटाई गई थी ।
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जेल में सजायाफ्ता कैदियों की दया याचिका के आधार पर रिहाई का प्रावधान है। इस याचिका पर विचारण कमेटी द्वारा सुनवाई की जाती है। सोमवार को विचारण कमेटी मेें शामिल जिलाधिकारी सर्वज्ञराम मिश्र, एसएसपी शलभ माथुर, जिला प्रोबेशन अधिकारी एएस रस्तोगी तथा वरिष्ठ जेल अधीक्षक शैलेन्द्र कुमार मैत्रेय ने सुनवाई की।
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यह सुनवाई आगरा सेंट्रल जेल से आए आठ आजीवन कारावास के कैदी तथा मथुरा जिला जेल में निरुद्ध तीन कैदियों की हुई। कमेटी ने प्रत्येक कैदी की जेल की चरित्र पंजिका का निरीक्षण कर कैदियों को सुना। उनके रिहा होने के आधार की जानकारी ली ।
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विचारण कमेटी द्वारा इसी के आधार पर एक रिपोर्ट तैयार की गई जिसे शासन को भेज दिया गया । इस संबंध में जानकारी देते हुए जेलर अरविंद पांडेय ने बताया कि सोमवार को जेल में विचारण कमेटी द्वारा सुनवाई की गई। जिसकी रिपोर्ट शासन को भेजी गई है ।
कैदी का व्यवहार करता है तय
कैदी का व्यवहार तय करता है कि उसकी दया याचिका पर सकारात्मक रिपोर्ट जाए या नहीं । जेल अधिकारी कैदी के व्यवहार को आधार बनाकर ही शासन को संस्तुति करते हैं । सोमवार को जिन कैदियों की दया याचिका पर सुनवाई हुई उनके व्यवहार की जानकारी भी जेल अधिकारियों द्वारा पूर्व में ही जुटाई गई थी ।