{"_id":"5c6d8d94bdec2255676809f5","slug":"155068364320-mainpuri-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"कॉलेजों की लापरवाही","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कॉलेजों की लापरवाही
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
आसपास
कॉलेजों की लापरवाही से 8338 छात्रों को नहीं मिलेगी छात्रवृत्ति
महाविद्यालयों के संचालकों की ओर से संशोधित डाटा न देने पर समाज कल्याण विभाग ने
अमर उजाला ब्यूरो
मैनुपरी। हजारों छात्र-छात्राओं पर कॉलेजों की लापरवाही भारी पड़ गई है। अब उन्हें छात्रवृत्ति का लाभ नहीं मिल सकेगा। डाटा में गड़बड़ी के चलते इन सभी के आवेदन समाज कल्याण विभाग द्वारा निरस्त कर दिए गए हैं। छात्र-छात्राएं अब कॉलेज और समाज कल्याण विभाग के चक्कर लगा रहे हैं।
वर्ष 2018-19 में महाविद्यालयों के 32457 छात्र-छात्राओं ने छात्रवृत्ति के लिए आवेदन किया गया था। इसमें सामान्य के 4899, पिछड़ा वर्ग के 17598, अनुसूचित जाति के 8813 व अल्पसंख्यक वर्ग के 1147 छात्र-छात्राएं शामिल थे। इन सभी का डाटा सत्यापन के बाद समाज कल्याण विभाग व पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग से पास किया जाना था। सत्यापन के दौरान इस डाटा में कमियां पाई गई थीं। किसी का रोल नंबर सही नहीं था तो किसी का परिणाम विश्वविद्यालय के वेबसाइट पर दिखाई नहीं दे रहा था। ऐसे में सत्यापन करने वाले विभागों के लिए उनकी सत्यता की जांच करना संभव नहीं था।
इस डाटा को संशोधित करने के लिए संबंधित कॉलेजों को विभागों की ओर से सूची भेजी गई। डाटा संशोधित करने के बाद दोबारा से ये सूची समाज कल्याण विभाग को उपलब्ध कराई गई, लेकिन इसमें सभी छात्रों का संशोधित डाटा उपलब्ध नहीं कराया गया था। इसके चलते विभाग ने 8338 छात्र-छात्राओं के छात्रवृत्ति के आवेदन निरस्त कर दिए। इसमें सामान्य वर्ग के 1046, पिछड़ा वर्ग के 5505, अनुसूचित जाति के 1631 व अल्पसंख्यक वर्ग के 156 आवेदन निरस्त हुए। छात्र-छात्राओं को तब जानकारी हुई जब उनके मोबाइल पर उनका आवेदन निरस्त होने का मैसेज पहुंचा। ऐसे में अब छात्र-छात्राएं कॉलेज व समाज कल्याण विभाग के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन एक बार आवेदन निरस्त होने के बाद उसे सही किया जाना संभव नहीं है।
विज्ञापन
----
कॉलेजों को भेजी गई थी सूची
समाज कल्याण विभाग ने छात्रवृत्ति डाटा के सत्यापन के दौरान कई गड़बडिय़ा पाई थीं। इन्हें दूर कराने के लिए सभी कॉलेजों को संशोधित डाटा उपलब्ध कराने के लिए सूची भेजी गई थी। कॉलेजों ने सभी छात्राओं का संशोधित डाटा उपलब्ध नहीं कराया, जिससे आवेदन निरस्त करना पड़ा।
----
सीधे नहीं कराया जा सकता है संशोधन
अगर कोई छात्र सीधे छात्रवृत्ति का डाटा समाज कल्याण विभाग के माध्यम से संशोधित कराना चाहे तो ये संभव नहीं है। इसके लिए कॉलेज द्वारा ही संशोधित डाटा आगे भेजा जाता है। विभाग के अनुसार इसमें कॉलेज संचालक हर बार लापरवाही करते हैं। इसका खामियाजा छात्र-छात्राओं को भुगतना पड़ता है।
-------
इतने आवेदन हुए निरस्त
-सामान्य वर्ग के 1046
-पिछड़ा वर्ग के 5505
-अनुसूचित जाति के 1631
-अल्पसंख्यक वर्ग के 156
-------
वर्जन
सभी कॉलेजों को डाटा संशोधन के लिए भेजा गया था। कॉलेजों ने जो भी डाटा संशोधित करने के बाद उपलब्ध कराया, उसे कार्यालय से सही करने के बाद पास कर दिया गया। बाकी आवेदनों को मजबूरन निरस्त करना पड़ा।
इंद्रा सिंह, समाज कल्याण अधिकारी, मैनपुरी।
विज्ञापन
कॉलेजों की लापरवाही से 8338 छात्रों को नहीं मिलेगी छात्रवृत्ति
महाविद्यालयों के संचालकों की ओर से संशोधित डाटा न देने पर समाज कल्याण विभाग ने
अमर उजाला ब्यूरो
मैनुपरी। हजारों छात्र-छात्राओं पर कॉलेजों की लापरवाही भारी पड़ गई है। अब उन्हें छात्रवृत्ति का लाभ नहीं मिल सकेगा। डाटा में गड़बड़ी के चलते इन सभी के आवेदन समाज कल्याण विभाग द्वारा निरस्त कर दिए गए हैं। छात्र-छात्राएं अब कॉलेज और समाज कल्याण विभाग के चक्कर लगा रहे हैं।
वर्ष 2018-19 में महाविद्यालयों के 32457 छात्र-छात्राओं ने छात्रवृत्ति के लिए आवेदन किया गया था। इसमें सामान्य के 4899, पिछड़ा वर्ग के 17598, अनुसूचित जाति के 8813 व अल्पसंख्यक वर्ग के 1147 छात्र-छात्राएं शामिल थे। इन सभी का डाटा सत्यापन के बाद समाज कल्याण विभाग व पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग से पास किया जाना था। सत्यापन के दौरान इस डाटा में कमियां पाई गई थीं। किसी का रोल नंबर सही नहीं था तो किसी का परिणाम विश्वविद्यालय के वेबसाइट पर दिखाई नहीं दे रहा था। ऐसे में सत्यापन करने वाले विभागों के लिए उनकी सत्यता की जांच करना संभव नहीं था।
विज्ञापन
इस डाटा को संशोधित करने के लिए संबंधित कॉलेजों को विभागों की ओर से सूची भेजी गई। डाटा संशोधित करने के बाद दोबारा से ये सूची समाज कल्याण विभाग को उपलब्ध कराई गई, लेकिन इसमें सभी छात्रों का संशोधित डाटा उपलब्ध नहीं कराया गया था। इसके चलते विभाग ने 8338 छात्र-छात्राओं के छात्रवृत्ति के आवेदन निरस्त कर दिए। इसमें सामान्य वर्ग के 1046, पिछड़ा वर्ग के 5505, अनुसूचित जाति के 1631 व अल्पसंख्यक वर्ग के 156 आवेदन निरस्त हुए। छात्र-छात्राओं को तब जानकारी हुई जब उनके मोबाइल पर उनका आवेदन निरस्त होने का मैसेज पहुंचा। ऐसे में अब छात्र-छात्राएं कॉलेज व समाज कल्याण विभाग के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन एक बार आवेदन निरस्त होने के बाद उसे सही किया जाना संभव नहीं है।
विज्ञापन
----
कॉलेजों को भेजी गई थी सूची
समाज कल्याण विभाग ने छात्रवृत्ति डाटा के सत्यापन के दौरान कई गड़बडिय़ा पाई थीं। इन्हें दूर कराने के लिए सभी कॉलेजों को संशोधित डाटा उपलब्ध कराने के लिए सूची भेजी गई थी। कॉलेजों ने सभी छात्राओं का संशोधित डाटा उपलब्ध नहीं कराया, जिससे आवेदन निरस्त करना पड़ा।
----
सीधे नहीं कराया जा सकता है संशोधन
अगर कोई छात्र सीधे छात्रवृत्ति का डाटा समाज कल्याण विभाग के माध्यम से संशोधित कराना चाहे तो ये संभव नहीं है। इसके लिए कॉलेज द्वारा ही संशोधित डाटा आगे भेजा जाता है। विभाग के अनुसार इसमें कॉलेज संचालक हर बार लापरवाही करते हैं। इसका खामियाजा छात्र-छात्राओं को भुगतना पड़ता है।
-------
इतने आवेदन हुए निरस्त
-सामान्य वर्ग के 1046
-पिछड़ा वर्ग के 5505
-अनुसूचित जाति के 1631
-अल्पसंख्यक वर्ग के 156
-------
वर्जन
सभी कॉलेजों को डाटा संशोधन के लिए भेजा गया था। कॉलेजों ने जो भी डाटा संशोधित करने के बाद उपलब्ध कराया, उसे कार्यालय से सही करने के बाद पास कर दिया गया। बाकी आवेदनों को मजबूरन निरस्त करना पड़ा।
इंद्रा सिंह, समाज कल्याण अधिकारी, मैनपुरी।