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बदहाल ट्रांसपोर्ट नगर में जाना नहीं चाहते दुकानदार
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एटा। दुकानें जर्जर हो गईं, असामाजिक तत्व शटर उखाड़कर ले गए, जगह-जगह गंदगी और बदहाली। ट्रांसपोर्ट नगर का यह हाल दुकानदारों का मोहभंग कर रहा है। पालिका की अनदेखी और दुकानदारों की मनमानी के चलते ट्रांसपोर्ट नगर आबाद नहीं हो सका है। व्यवस्थाएं नहीं होने से दुकानदार यहां अपने कारोबार को शिफ्ट करने से कतरा रहे हैं। पालिका भी आवंटियों को दो बार नोटिस दे चुकी है, इसके बाद दुकानदार शहर छोड़ने को तैयार नहीं है। इससे ट्रांसपोर्ट नगर वीरान पड़ा हुआ है।
जाम से शहर के मुख्य मार्गों को निजात दिलाने व लाखों की लागत से बने यातायात नगर को बसाने के लिए जो प्रयास किये गये थे, वे फिर धराशाई हो गए हैं। हालात यह हैं कि ट्रांसपोर्टर, ऑटो स्पेयर पार्ट्स विक्रेता और वाहन मिस्त्रियों का कारोबार अब भी मुख्य सड़कों पर संचालित है। आलम यह है कि ट्रांसपोर्ट नगर में दुकानें अब खंडहर हो गईं हैं। कई दुकानों के शटर तक चोरी हो गए हैं। लेकिन पालिका ने ट्रांसपोर्ट नगर के विकास को कोई प्रयास नहीं किए।
छह साल पहले हुई थी कवायद
दरअसल, छह साल पहले प्रशासन ने पाया कि ट्रांसपोर्टरों, वाहन मिस्त्रियों के प्रतिष्ठान के निकट सड़क को घेरकर वाहनों को अक्सर खड़ा कर दिया जाता है, जिसके कारण जाम लगता है। इसी के मद्देनजर तत्कालीन डीएम गौरव दयाल ने शहर के अनेक मार्गों पर ट्रांसपोर्टरों के प्रतिष्ठानों पर तालाबंदी कराकर उन्हें यातायात नगर शिफ्ट कराने के सख्ती से प्रयास किए। कई वाहन मिस्त्रियों के प्रतिष्ठानों पर भी ताले लगवाये गए थे। इसके बाद डीएम बलकार सिंह ने भी दुकान आंवटियों को नोटिस जारी कराए। कई दुकानों पर तालाबंदी हुई, किंतु उनके स्थानांतरण के बाद आवंटी फिर चैन से बैठ गए। मगर ट्रांसपोर्ट नगर आज भी आबाद नहीं हो सका।
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पालिका ने जारी किए थे नोटिस
दो साल पहले पालिका ने अपने स्तर से पहल शुरू की और करीब 150 दुकानदारों को नोटिस देकर दुकानें स्थानांतरित करने को कहा। इसके लिए ट्रांसपोर्ट नगर परिसर में पालिका ने सड़क का निर्माण, बिजली, पानी की व्यवस्था नलकूप और हैंडपंप लगवाया गया था, लेकिन फिर भी किसी भी आवंटी ने ट्रांसपोर्ट नगर में कारोबार को शिफ्ट नहीं किया।
जिलाधिकारी आई पी पांडेय ने कहा कि दुकानदारों को टीपी नगर तक पहुंचाना हमारी प्राथमिकता में है। इसको लेकर कवायद शुरू की जा रही है। दुकानदारों के साथ बैठक की जाएगी। अगर उनको कोई परेशानी भी होती है तो उसे तत्काल दूर कराया जाएगा।
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जाम से शहर के मुख्य मार्गों को निजात दिलाने व लाखों की लागत से बने यातायात नगर को बसाने के लिए जो प्रयास किये गये थे, वे फिर धराशाई हो गए हैं। हालात यह हैं कि ट्रांसपोर्टर, ऑटो स्पेयर पार्ट्स विक्रेता और वाहन मिस्त्रियों का कारोबार अब भी मुख्य सड़कों पर संचालित है। आलम यह है कि ट्रांसपोर्ट नगर में दुकानें अब खंडहर हो गईं हैं। कई दुकानों के शटर तक चोरी हो गए हैं। लेकिन पालिका ने ट्रांसपोर्ट नगर के विकास को कोई प्रयास नहीं किए।
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छह साल पहले हुई थी कवायद
दरअसल, छह साल पहले प्रशासन ने पाया कि ट्रांसपोर्टरों, वाहन मिस्त्रियों के प्रतिष्ठान के निकट सड़क को घेरकर वाहनों को अक्सर खड़ा कर दिया जाता है, जिसके कारण जाम लगता है। इसी के मद्देनजर तत्कालीन डीएम गौरव दयाल ने शहर के अनेक मार्गों पर ट्रांसपोर्टरों के प्रतिष्ठानों पर तालाबंदी कराकर उन्हें यातायात नगर शिफ्ट कराने के सख्ती से प्रयास किए। कई वाहन मिस्त्रियों के प्रतिष्ठानों पर भी ताले लगवाये गए थे। इसके बाद डीएम बलकार सिंह ने भी दुकान आंवटियों को नोटिस जारी कराए। कई दुकानों पर तालाबंदी हुई, किंतु उनके स्थानांतरण के बाद आवंटी फिर चैन से बैठ गए। मगर ट्रांसपोर्ट नगर आज भी आबाद नहीं हो सका।
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पालिका ने जारी किए थे नोटिस
दो साल पहले पालिका ने अपने स्तर से पहल शुरू की और करीब 150 दुकानदारों को नोटिस देकर दुकानें स्थानांतरित करने को कहा। इसके लिए ट्रांसपोर्ट नगर परिसर में पालिका ने सड़क का निर्माण, बिजली, पानी की व्यवस्था नलकूप और हैंडपंप लगवाया गया था, लेकिन फिर भी किसी भी आवंटी ने ट्रांसपोर्ट नगर में कारोबार को शिफ्ट नहीं किया।
जिलाधिकारी आई पी पांडेय ने कहा कि दुकानदारों को टीपी नगर तक पहुंचाना हमारी प्राथमिकता में है। इसको लेकर कवायद शुरू की जा रही है। दुकानदारों के साथ बैठक की जाएगी। अगर उनको कोई परेशानी भी होती है तो उसे तत्काल दूर कराया जाएगा।