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किसके सिर बंधेगा महापौर का ताज, आंकडे़बाजी पर अटकलें
Updated Thu, 30 Nov 2017 12:15 AM IST
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फिरोजाबाद। बुधवार को नगर निगम के मतदाताओं ने तय कर दिया कि शहर का पहले महापौर का ताज किसके सिर बंधेगा। फैसला ईवीएम में सुरक्षित हो चुका है। नए महापौर की घोषणा एक दिसंबर को होगी। मतदाताओं ने गजब का उत्साह दिखाया है। मतदान का प्रतिशत देख सभी उम्मीदवार उत्साहित है। महापौर के लिए वोटों की जंग भाजपा और सपा के बीच हुई है। बसपा ने कई जगह मुकाबले को त्रिकोणीय बना दिया है। आखिरी लड़ाई में कांग्रेस बाहर दिखाई दी तो एआईएमआईएम ने मुकाबले की तस्वीर बहुकोणीय बनाने के लिए अंत तक पूरी ताकत लगाए रखी।
महापौर के लिए पहला चुनाव बुधवार को संपन्न हो गया। पहला चुनाव था, लिहाजा वोटरों ने पहला मेयर चुनने के लिए गजब का उत्साह दिखाया। चुनावी जमीन पर मुकाबले के लिए सपा से सावित्री देवी गुप्ता, भाजपा से नूतन राठौर, बसपा से पायल राठौर, कांग्रेस से शहाजहां परवीन और एआईएमआईएम से मशरूर फातिमा सहित 11 प्रत्याशी नगर निगम के पांच लाख मतदाताओं का जनमत लेने उतरी थी। पिछड़ा वर्ग महिला के लिए आरक्षित सीट पर पहले तो जंग प्रमुख दलों में टिकट हासिल करने को लेकर हुई।
भाजपा में लंबी सूची थी लेकिन टिकट पार्टी के कद्दावर नेता मंगल सिंह राठौर की बेटी नूतन राठौर ने बाजी मार ली। सपा से पार्टी के पूर्व प्रदेश सचिव राज नरायन गुप्ता मुन्ना की टिकट फाइनल हुई। इस बीच पार्षदों की टिकट वितरण में उपेक्षा का आरोप लगाते हुए सपा के पूर्व विधायक अजीम भाई ने पार्टी का साथ छोड़ दिया और एआईएमआईएम का समर्थन कर दिया। बुधवार को चुनावी मुकाबले की तस्वीर भाजपा और सपा के बीच दिखाई दी। जानकारों के अनुसार मतदान का रूझान सपा और भाजपा के बीच मुकाबले का रहा।
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लेकिन बसपा को इसलिए कम नहीं आंका जा रहा कि बसपा अपने परंपरागत वोट बैंक के साथ सजातीय राठौर समाज के वोट और मुुस्लिम समाज के वोटों पर मतदान के अंत तक जोर लगाए रही। बसपा के लिए पड़ा खामोशी का वोट समीक्षक कम नहीं आंक रहे हैं। मतदान के रूझान में कांग्रेस लड़ाई से पूरी तरह से बाहर दिखाई दी।
अजीम भाई की सपा से बगावत के बाद माना जा रहा था कि मुस्लिम वोट एकजुट होकर एआईएमआईएम प्रत्याशी के पक्ष में जाएगा, लेकिन मुस्लिम बस्तियों में वोट चार जगह विभाजित दिखा। एआईएमआईएम, सपा, बसपा और कांग्रेस के बीच मुस्लिम मतों का रूझान रहा। अब गणित लगाया जा रहा है सर्वाधिक मुुस्लिम वोट किसके पक्ष में गया। मुस्लिम मतों को लेकर चारों ही दलों में जोर अजमाइश चल रही थी।
एआईएमआईएम को मिलने वाले वोटों को लेकर सभी का अपना गणित है। जबकि सपा को मिले मुुस्लिम वोटों पर कई तरह के दावे हैं। चुनाव मुकाबले में आम आदमी पार्र्टी की प्रत्याशी सुनीता शर्मा भी थी। मतदान का रुझान बताता है कि आप मुकाबले में नहीं आ पाई।
हार-जीत के फैसले के दिन भीतरघात से कोई भी दल बच नहीं सका। भाजपा में भीतरघात की स्थिति रही। पार्टी के बस्तों पर बैठे कई कार्यकर्ता और नेता भी दूसरी ओर इशारा करते दिखे। सपा में भी भीतरघात करने वाले सक्रिय रहे। बसपा में भीरतघात का खतरा कम दिखा। कांग्रेस का वोट अंत में इधर-उधर खिसकता दिखाई दिया। मतदान का रूझान चौंकाने वाला यह है कि एआईएमआईएम विधानसभा चुनाव से अधिक ताकतवर बन कर उभरी है।
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महापौर के लिए पहला चुनाव बुधवार को संपन्न हो गया। पहला चुनाव था, लिहाजा वोटरों ने पहला मेयर चुनने के लिए गजब का उत्साह दिखाया। चुनावी जमीन पर मुकाबले के लिए सपा से सावित्री देवी गुप्ता, भाजपा से नूतन राठौर, बसपा से पायल राठौर, कांग्रेस से शहाजहां परवीन और एआईएमआईएम से मशरूर फातिमा सहित 11 प्रत्याशी नगर निगम के पांच लाख मतदाताओं का जनमत लेने उतरी थी। पिछड़ा वर्ग महिला के लिए आरक्षित सीट पर पहले तो जंग प्रमुख दलों में टिकट हासिल करने को लेकर हुई।
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भाजपा में लंबी सूची थी लेकिन टिकट पार्टी के कद्दावर नेता मंगल सिंह राठौर की बेटी नूतन राठौर ने बाजी मार ली। सपा से पार्टी के पूर्व प्रदेश सचिव राज नरायन गुप्ता मुन्ना की टिकट फाइनल हुई। इस बीच पार्षदों की टिकट वितरण में उपेक्षा का आरोप लगाते हुए सपा के पूर्व विधायक अजीम भाई ने पार्टी का साथ छोड़ दिया और एआईएमआईएम का समर्थन कर दिया। बुधवार को चुनावी मुकाबले की तस्वीर भाजपा और सपा के बीच दिखाई दी। जानकारों के अनुसार मतदान का रूझान सपा और भाजपा के बीच मुकाबले का रहा।
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लेकिन बसपा को इसलिए कम नहीं आंका जा रहा कि बसपा अपने परंपरागत वोट बैंक के साथ सजातीय राठौर समाज के वोट और मुुस्लिम समाज के वोटों पर मतदान के अंत तक जोर लगाए रही। बसपा के लिए पड़ा खामोशी का वोट समीक्षक कम नहीं आंक रहे हैं। मतदान के रूझान में कांग्रेस लड़ाई से पूरी तरह से बाहर दिखाई दी।
अजीम भाई की सपा से बगावत के बाद माना जा रहा था कि मुस्लिम वोट एकजुट होकर एआईएमआईएम प्रत्याशी के पक्ष में जाएगा, लेकिन मुस्लिम बस्तियों में वोट चार जगह विभाजित दिखा। एआईएमआईएम, सपा, बसपा और कांग्रेस के बीच मुस्लिम मतों का रूझान रहा। अब गणित लगाया जा रहा है सर्वाधिक मुुस्लिम वोट किसके पक्ष में गया। मुस्लिम मतों को लेकर चारों ही दलों में जोर अजमाइश चल रही थी।
एआईएमआईएम को मिलने वाले वोटों को लेकर सभी का अपना गणित है। जबकि सपा को मिले मुुस्लिम वोटों पर कई तरह के दावे हैं। चुनाव मुकाबले में आम आदमी पार्र्टी की प्रत्याशी सुनीता शर्मा भी थी। मतदान का रुझान बताता है कि आप मुकाबले में नहीं आ पाई।
हार-जीत के फैसले के दिन भीतरघात से कोई भी दल बच नहीं सका। भाजपा में भीतरघात की स्थिति रही। पार्टी के बस्तों पर बैठे कई कार्यकर्ता और नेता भी दूसरी ओर इशारा करते दिखे। सपा में भी भीतरघात करने वाले सक्रिय रहे। बसपा में भीरतघात का खतरा कम दिखा। कांग्रेस का वोट अंत में इधर-उधर खिसकता दिखाई दिया। मतदान का रूझान चौंकाने वाला यह है कि एआईएमआईएम विधानसभा चुनाव से अधिक ताकतवर बन कर उभरी है।