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छात्राओं को फर्नीचर नसीब नहीं
Updated Mon, 04 Sep 2017 11:57 PM IST
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प्राथमिक व पूर्व माध्यमिक स्कूल महमूरगंज के जर्जर भवन में चलती हैं कक्षाएं
- फोटो : अमर उजाला
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एटा। राजकीय बालिका इंटर कालेज वाकलपुर में अव्यवस्थाओं का बोलबाला है। 12 साल बाद भी विद्यालय को प्रधानाचार्य, शिक्षक, लिपिक, कर्मचारी यहां तक कि फर्नीचर भी नहीं मिल पा रहा।
करोड़ों रुपये की लागत से वर्ष 2003 में बना राजकीय बालिका इंटर कॉलेज वाकलपुर की बदहाली दूर नहीं हो रही। सवा दशक बाद भी यहां स्टाफ तो दूर फर्नीचर तक नहीं मिल पा रहा। ऐसे में विद्यालय की तीन सौ अधिक छात्राएं जमीन पर बैठने को मजबूर हैं। इंटर की छात्राओं को जमीन पर बैठने में परेशानी ही नहीं संकोच भी होता है।
प्रधानाचार्य के अनुसार सर्वाधिक परेशानी परीक्षा के दिनों में होती है। इन दिनों में कुर्सियां किराए पर मंगाकर परीक्षा कराई जाती हैं। गौरतलब है कि तीन सौ छात्राओं पर स्कूल में मात्र तीन टीचर्स हैं। लिपिक, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी एवं सफाई कर्मी के नाम पर यहां कुछ नहीं है।
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प्रयोगाें के नाम पर केवल प्रयोगशाला
विज्ञान वर्ग में स्वीकृत विद्यालय में प्रयोगों के नाम पर केवल प्रयोगशाला है। विज्ञान उपकरण तो दूर यहां विज्ञान शिक्षक भी नहीं हैं। ऐसे में छात्राओं को हवा में ही विज्ञान एवं प्रयोग की बातें बताई जा रही हैं।
राजकीय बालिका इंटर कालेज वाकलपुर में सृजित पद एवं सेवारत स्टाफ
पद सृजित सेवारत रिक्त
प्रधानाचार्य 01 00 01
प्रवक्ता 09 00 09
सहायक अध्यापक 08 04 04
कार्यालय सहायक 03 00 03
चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी 05 00 05
डीआईओएस से लेकर शिक्षा निदेशक तक को विद्यालय की अव्यवस्थाओं से अवगत कराकर स्टाफ व अन्य व्यवस्थाएं करने की मांग की है। 12 साल गुजरने के बाद भी इस ओर किसी का ध्यान नहीं है। बालिकाओं के विद्यालय में लिपिक एवं सफाई कर्मी तक नहीं है। छात्राएं जमीन पर बैठती हैं।
राकेश कुमार यादव, प्रभारी प्रधानाचार्य
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करोड़ों रुपये की लागत से वर्ष 2003 में बना राजकीय बालिका इंटर कॉलेज वाकलपुर की बदहाली दूर नहीं हो रही। सवा दशक बाद भी यहां स्टाफ तो दूर फर्नीचर तक नहीं मिल पा रहा। ऐसे में विद्यालय की तीन सौ अधिक छात्राएं जमीन पर बैठने को मजबूर हैं। इंटर की छात्राओं को जमीन पर बैठने में परेशानी ही नहीं संकोच भी होता है।
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प्रधानाचार्य के अनुसार सर्वाधिक परेशानी परीक्षा के दिनों में होती है। इन दिनों में कुर्सियां किराए पर मंगाकर परीक्षा कराई जाती हैं। गौरतलब है कि तीन सौ छात्राओं पर स्कूल में मात्र तीन टीचर्स हैं। लिपिक, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी एवं सफाई कर्मी के नाम पर यहां कुछ नहीं है।
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प्रयोगाें के नाम पर केवल प्रयोगशाला
विज्ञान वर्ग में स्वीकृत विद्यालय में प्रयोगों के नाम पर केवल प्रयोगशाला है। विज्ञान उपकरण तो दूर यहां विज्ञान शिक्षक भी नहीं हैं। ऐसे में छात्राओं को हवा में ही विज्ञान एवं प्रयोग की बातें बताई जा रही हैं।
राजकीय बालिका इंटर कालेज वाकलपुर में सृजित पद एवं सेवारत स्टाफ
पद सृजित सेवारत रिक्त
प्रधानाचार्य 01 00 01
प्रवक्ता 09 00 09
सहायक अध्यापक 08 04 04
कार्यालय सहायक 03 00 03
चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी 05 00 05
डीआईओएस से लेकर शिक्षा निदेशक तक को विद्यालय की अव्यवस्थाओं से अवगत कराकर स्टाफ व अन्य व्यवस्थाएं करने की मांग की है। 12 साल गुजरने के बाद भी इस ओर किसी का ध्यान नहीं है। बालिकाओं के विद्यालय में लिपिक एवं सफाई कर्मी तक नहीं है। छात्राएं जमीन पर बैठती हैं।
राकेश कुमार यादव, प्रभारी प्रधानाचार्य